आंतरिक पलायन

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महामारी ने ऐसे बहुत से विषयों पर सोचने के लिए विवश कर दिया है जिन पर शायद ही हम कभी विचार करते। देश में तालाबंदी लगते ही मजदूर प्रवासियों की इतनी बड़ी सँख्या देखने को मिली! ऐसे लोग जो रोजगार की तलाश में अपनी जन्मभूमि को छोड़ने पर विवश है। हांलाकि पलायन कोई समस्या नहीं है। देश का कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से किसी भी राज्य में जाकर बस सकता है। संविधान में इसका पूरा अधिकार दिया है, लेकिन ये चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि आंतरिक पलायन के बढ़ते आँकड़े एक गाँव या कस्बे को खाली कर सकते हैं और दूसरे ओर शहर की सुविधाओं को प्रभावित कर सकते हैं। अक्सर ग्रामीण परिवेश से प्रवास करने वाले लोगों का मुख्य कारण रोजगार का अभाव और सुख -सुविधाओं की कमी होती है जिससे वह गाँव छोड़ने को विवश होते हैं। ऐसे गांव जिनमें कभी लोगों की चहल -पहल हुआ करती थी ऐसी रौनक लॉकडाउन में देखने को वापस मिली । जब लोगों ने गाँव की ओर एक बार फिर से रुख करा और वह अपने कृषि कार्यों में जुट गए। पलायन विषय को समझने से पूर्व पलायन का अर्थ जान लेते हैं । पलायन का अर्थ होता है किसी भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर बस जाना या कुछ आंशिक समय तक वहाँ रहना पलायन कह लाता है। भारत में आंतरिक प्रवास के दो प्रकार है। दीर्घकालिक पलायन -जिसमें व्यक्ति या परिवार किसी दूसरी जगह बस जाता है। अल्पकालिक पलायन या मौसमी ,इसमें व्यक्ति कुछ महीनों के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है लेकिन वहाँ बसता नहीं । वहीं दूसरे देश में जाकर बस जाना अंतरराष्ट्रीय पलायन कहलाता है।

अधिकांश अल्पकालिक पलायनकर्ता सामाजिक आर्थिक रूप से वंचित समूहों जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के होते हैं । उनके पास न तो शिक्षा होती है और न ही जमीन जिसके कारण उन्हें पलायन करना पड़ता है।

पलायन का कारण :- पलायन का कोई एक कारण नहीं होता , बहुत से कारण होते हैं जैसे कि ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन का सबसे बड़ा कारण रोजगार और शिक्षा है। क्योंकि ग्रामीण इलाकों का कृषि आधार वहाँ रहने वाले सभी लोगों को रोजगार प्रदान नहीं कराता। साथ ही कृषि संसाधनों की कमी व अन्य सुख सुविधाओं अस्पताल, शिक्षा, यातायात इत्यादि कारणों से लोग रोजगार के लिए पलायन करते हैं।

पलायन के आँकड़ों पर गौर करें तो 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 1.21 बिलियन है। भारत में आंतरिक प्रवास करने वाली आबादी बढ़ी है 309 मिलियन आबादी का 30 प्रतिशत (जनगणना 2001) आंतरिक प्रवासी है। एनएनएसओं के हालिया अनुमान के मुताबिक 326 मिलियन या कुल आबादी का 28.5 प्रतिशत है। भारतीय जनगणना के अनुसार आंतरिक पलायन की बात करे तो इनमें से 70.7 प्रतिशत महिलाएं है। इसमें गांवों और शहरों में स्त्रियों के पलायन का मुख्य कारण विवाह है। एनएनएसओ के मुताबिक विवाह के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से 91 प्रतिशत महिलाएं पलायन करती हैं वहीं शहरों में 61 प्रतिशत पलायन होता है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएनएसओ ) के 2007 -2008 के आंकड़ो के मुताबिक पुरुषों के प्रवास का मुख्य कारण ग्रामीण तथा शहरी दोनों ही इलाकों में रोजगार से जुड़ा बताया जाता है। पलायन करने वाले 29 प्रतिशत ग्रामीण पुरुष तथा 56 प्रतिशत शहरी पुरुष रोज़गार के कारण प्रवास करते हैं। इसके साथ ही शिक्षा के लिए पलायन करने वाले बच्चों का आँकड़ा तकरीबन 15 करोड़ है, हालांकि शिक्षा से सम्बंधित ये आँकड़ा पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है।
किन राज्यों में पलायन अधिक हो रहा है। :- आंतरिक पलायन के मुख्य स्रोत जहाँ से लोग पलायन करने को विवश है। उत्तर प्रदेश , बिहार ,राजस्थान ,मध्यप्रदेश ,आन्ध्रप्रदेश ,छत्तीसगढ़ ,झारखंड ,उड़ीसा ,उत्तराखंड तथा तमिलनाडु और जिन राज्यों में पलायन करते हैं। वे राज्य हैं- दिल्ली ,महाराष्ट्र ,गुजरात, हरियाणा, पंजाब तथा कर्नाटक । 2011 की जनगणना के अमुसार उत्तर प्रदेश और बिहार से लगभग 20.9 मिलियन लोग पलायन कर अन्य राज्यों में चले गए थे। 20.9 मिलियन का यह आँकड़ा देश में होने वाली कुछ अंतर राज्यीय पलायन का 37 प्रतिशत है वहीं देश के दो बड़े महानगरों मुंबई और दिल्ली में पलायन करने वाले की कुल संख्या 9.9 मिलियन थी। आंतरिक पलायन में होती वृद्धि सरकारों की रोजगार जैसे मुद्दे व अन्य सुख- सुविधाओं की अनदेखी है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता। जिस कारण से छोटे गाँवों की आबादी घट रही है। आंतरिक पलायन के मामले पर सरकार को ध्यान देना चाहिए उसके कारणों को गहनता के साथ समझना चाहिए,ताकि इसमें सुधार किया जा सके । जिस राज्य में आंतरिक पलायन में वृद्धि हो रही ,वहाँ की सरकार को रोजगार के नए -नए अवसरों को बढ़ावा देना चाहिए । कृषि क्षेत्रों में संसाधनों की उपलब्धता को बढाना चाहिए जिससे अधिक से अधिक लोग रोजगार प्राप्त कर सके। इसी प्रकार अन्य छोटे कुटीर उद्योग ,पशुपालन ,मुर्गी पालन इत्यादि को बढ़ावा देना चाहिए। मनरेगा की तरह और स्कीमें लानी चाहिए व मनरेगा में सुधार किया जाना चाहिए जिससे इसमें पारदर्शिता बनी रहे और धोखाधड़ी कम हो। शिक्षा ,स्वास्थ्य यातायात के संसाधनों में सुधार करके भी आंतरिक पलायन को रोका जा सकता है। पलायन को समग्र तथा केंद्रीय रूप से नीति दस्तावेजों तथा राष्ट्रीय विकास योजनाओं में मुख्यधारा से जोड़े ( पंच वर्षीय योजनाएँ ,जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय नवीनीकरण मिशन तथा नगर विकास योजनाएं )। जिन क्षेत्रों में अधिक पलायन होता है। वहाँ वित्तीय व मानव संसाधन बढ़ाया जाएं। सरकार को आंतरिक पलायन के विषय पर ध्यान देना चाहिए ताकि पलायन को रोका जा सके।

विशेषक : रजनी यादव

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