18 सालों के बाद मोदी का वेकेशन

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18 सालों के बाद मोदी का वेकेशन
18 सालों के बाद मोदी का वेकेशन

हम सभी हिंदुस्तानियों को इस बात की पूर्ण जानकारी है कि हमारे प्रधानमंत्री जी अपने काम के प्रति कितने कर्मठ अथवा समर्पित हैं। वे जब गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे तबसे लेकर भारत के प्रधानमंत्री बनने तक पिछले अठारह सालों से पूर्ण रूप से स्वंय को देश अथवा देशवासियों के लिए समर्पित कर दिया है।

मात्र 3.30 घंटे की नींद लेना। सदा शाकाहारी भोजन खाना शुद्ध विचार रखना दूसरों के सुख के लिए हर संभव कोशिश करना ऐसा उनका व्यक्तित्व है। दिन के 15 से 18 घंटे काम करना। कभी न थकना ऐसी उनकी जीवन शैली है। 

हम सब अपने जीवन में अगर सप्ताह में 6 दिन काम करते हैं तो सातवें दिन हर हाल में आराम चाहते हैं। न कहीं जाना चाहते हैं न ही कोई अन्य कार्य करना चाहते हैं। अगर मज़बूरी बस कोई ज़रूरी काम आ जाए तो ऐसा प्रतीत होता है कि अब जीवन भर कोई छुट्टी नहीं मिलने वाली है। हमारी छुट्टी हमेशा के लिए समाप्त हो गई। 

लेकिन हमारे प्रधानमंत्री जी को ही ले लीजिए उन्हें जंगल घूमने तथा जंगल के प्राकृतिक सौंदर्य को देखने का मौका मिला उन्होंने बेहत करीब से खतरनाक जानवरों को देखा सुन्दर  साफ बहती नदियों को देखा। वहां उनका साथ दे रहे प्रकृति के सौंदर्य को पूरी दुनियां से रूबरू कराने अथवा जंगल के बीच किस तरह खुद को जीवित रखना और बचाने के तरीके को दुनियां को बताने वाले मिस्टर बेअर ने । 

बेअर और प्रधान मंत्री जी के बीच कुछ निजी कुछ उनके कामों को लेकर कई बातों पर चर्चा भी हुई। बातों बातों में हमारे प्रधान मंत्री जी ने अपने जीवन से जुड़ी बहुत सी बातें बताई। कुछ सुनी अनसुनी किस्से सुनाऐ। लेकिन हर बार बातों का तात्पर्य प्राकृति से जुड़ी होती थी। कीस तरह पानी बचाना पेड़ की रक्षा करना कितनी भी मज़बूरी क्युं न हो पेड़ काट कर अपने सुख की प्राप्ति नहीं करना। बरसात के दिनों में किस तरह पानी को बचाना है। इन सभी सिद्धांत पर हमारे प्रधान मंत्री जी और उनका पूरा परिवार चलता था। इन्हीं बातों के बीच में अपने परिवार से जुड़ी कई वाक्या सुनाया। जिसमें एक था…… 

पी. एम. ने कहा “कई साल पहले जब हमारी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी तब मेरे चाचा जी को लकड़ी के व्यापार के बारे में जानकारी प्राप्त हुई। तो वो उस व्यापार को करने के लिए घर में अपनी माँ से मंजूरी मांगी उन्होंने कहा हमारी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है तो लकड़ी को काट कर उसे समान बनाने योग्य बना कर बेचा जाये तो हमें काफी फायदा होगा अथवा हमारी आर्थिक स्थिति भी ठीक हो जाएगी।”

इस बात पर मेरी दादी मां ने कहा “हमारी आर्थिक स्थिति कितना भी खराब हो हम भूखे रह जाएंगे मजदूरी करेंगे लेकिन हम पेड़ नहीं काटेंगे क्यूंकि पेड़ में जीवन होता है और हम अपने सुविधा के लिए प्रकृति को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं।”

इस तरह से हमारे प्रधानमंत्री जी और उनके परिवार वाले प्रकृति से जुड़े थे। 

वो भले इस एक दिन के जंगल भ्रमण को अपना छुट्टी (वेकेशन) मानते हों लेकिन घूमने से अधिक वह हमें पर्यावरण को कैसे संरक्षण कर सकते हैं। जानवरों का संरक्षण करना उनसे प्यार करना उनकी रक्षा करने के लिए अपना योगदान देना। पेड़ न काटना पर्यावरण से प्यार करना। जिससे हमारा जीवन और प्रकृति दोनों का संतुलन बना रहेगा और हमारे आने वाले समय को हम एक स्वस्थ जीवन दे पाएंगे। इन्हीं सभी बातों पर अधिक जोर था।

हमेशा की तरह उन्होंने अपने जीवन के इस समय को भी अपने काम के लिए समर्पित कर दिया और अपने वेकेशन को देश वाशियों के लिए सेव टाइगर अभियान से जोड़ दिया। उन्होंने दुनियां को दिखा दिया की हम भारतीय हैं। संस्कार हमारी मिट्टी में है। जिससे हम सब जुड़े हैं।

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