आज की समस्या – छोटी जाति बनाम ऊंची जाति

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आज की समस्या - छोटी जाति बनाम ऊंची जाति
आज की समस्या - छोटी जाति बनाम ऊंची जाति

भेदभाव शब्द छोटी सी जरूर है। लेकिन आज हमारे देश के विकास की दिशा में बहुत बड़ी चुनौती बन कर सामने आयी है। शहर हो अथवा गांव, गरीब हो या अमीर,जाति छोटी हो या बड़ी, लोग पढ़े लिखे हों या अनपढ़ भेदभाव हर तबके के लोगों में बराबर रूप से मौजूद है। कभी लोग पैसों के नाम पर भेदभाव करते हैं तो कभी जाति के नाम पर। आजकल लोगों द्वारा भेदभाव को दिखाने का नया तरीका विरोध प्रदर्शन करना है । वो चाहे किसी की हत्या को लेकर हो रहा हो या बलात्कार को लेकर। जब भी ऐसी कोई घटना घटती है तो लोग पीड़ित व्यक्ति को नहीं सबसे पहले य़ह देखते हैं कि वह किस जाति का है। यदि पीड़ित छोटी जाति का है तो प्रदर्शन बड़ा और क्रुर होगा। अगर पीड़ित बड़ी जाति की है तो एक दो मोमबत्ती से भी काम हो जाता है। 

जाति से याद आया हाल ही में घटित एक बहु चर्चित घटना है। एक बहुत ही होनहार पढ़ाई में अव्वल अथवा अपने दम पर कुछ कर दिखाने का जुनून रखने वाली गरीब अथवा नीची जाति की बेटी जिसका नाम राखी था। जिसने 12 वीं तक कि पढ़ाई खत्म करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए। घर से 10 किलोमीटर दूर किसी दुकान में काम करने जाती थी। उससे जो पैसे कमाती थी उनमें से कुछ अपनी पढाई के लिए बचाती कुछ से आगे की तैयारी करती अथवा कुछ घर खर्च में हाथ बटाती थी। लेकिन एक छोटी जाति की लड़की जो इतनी तेज तथा स्वाभिमानी थी वो किसी को देखा कैसे जा सकता था। एक शाम जब वह अपने काम के जगह से घर नहीं पहुंची तो उसके पिता ने उसे घर से दुकान तक हर सम्भवतः जगह खोजा। लेकिन राखी कहीं भी नहीं मिली। अगली सुबह उसी रास्ते के किनारे उसकी लाश मिलती है। पुलिस आती है छान बीन शुरू होती है। पता चलता है कि उसके साथ बलात्कार हुआ, उसके बाद उसकी हत्या को अन्जाम दिया गया था। पोस्टमार्टम से पता चला कि एक से अधिक लोगों ने मिलकर बलात्कार किया था। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मरने तक राखी ने अत्यधिक बहादुरी से संघर्ष किया था। ऐसी स्थिति में जहां परिवार वाले सदमें में थे उसके दोस्त उसके जानने वाले सभी शोक में डूबे हुए थे। वहीं दूसरी तरफ गांव के तथाकथित बुद्धिजीवियों ने इस मामले को जातिवाद से जोड़ कर न्याय के लिए प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था। बिना किसी सुबूतों के आधार पर दूसरे जाति के लोगों पर इल्ज़ाम लगा के पुलिस अथवा प्रसासन का सारा ध्यान अपनी ओर केंद्रित कर रहे थे। उन्हें किसी को इन्साफ़ दिलाने में रुचि नहीं थी उन्हें तो बस अपनी जाति को दुःखी और असहाय दिखाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस को इन सभी कारणों से छान बीन में ख़ासा  दिक्कतें आ रही थी। बार बार पुलिस वालों का ध्यान बड़ी जाति वालों पर केंद्रित किया जा रहा था। अत्यधिक दबाव और दिक्कतों के बावजूद पुलिस ने राखी के असली गुनहगार को पकड़ लिया गुनहगार था राखी के अपने जाति का लड़का जो कि उसका स्कूल का दोस्त भी था। पूछ ताछ करने पर सामने आया कि राखी को शादी के लिए मना करने को उसकी अकड़ मान कर उसके साथ दुष्कर्म कर के उसके मनोबल को तोड़ने की कोशिश की जा रही थी और जब उसके स्वाभिमान को नहीं तोड़ सके तो उसकी हत्या कर दी गई। यह थी मानसिकता एक छोटी अथवा ग़रीब घर की बेटी को आगे बढ़ते न देख सकने की। 

यह सोच किसी जाति के दर्द को नहीं दिखाता है बल्कि यह घटना एक ऐसी मानसिकता को प्रदर्शित करता है जो जाति के नाम पर भेद भाव करते हैं। जो पीड़ित व्यक्ति के पीड़ा को नहीं देखते बल्कि पीड़ा कितनी है य़ह जाति तय करती है। अगर पीड़ित छोटी जाति की है तो पीड़ा अधिक है अगर पीड़ित मुस्लिम समुदाय से है तो आन्दोलन क्रुर रूप ले सकता है। हिन्दू मुस्लिम दंगे हो सकते हैं।  

आज लोगों को अपनी मानसिकता को बदलने की जरूरत है। पहले जाति नहीं आती इन्सान आते हैं उनके विचार आते हैं। दर्द जाति के हिसाब से कम अधिक नहीं होती है। हिन्दू का खून मुस्लिम के खून से अलग नहीं होता। लोगों को अपनी मानसिकता बदलने की आवश्यकता है। अपराध स्वयं ही खत्म हो जाएगा। इन्सान को इन्सान की कद्र होनी चाहिए। जाति के नाम पर किसी के भी घर की बहु बेटियों की बलि नहीं दी जानी चाहिए। जाति का भेदभाव नहीं करना चाहिए ब्लकि उनके कर्म से उनकी पहचान होनी चाहिए तभी तो इन्सान हर जगह इन्सान बन कर रह सकते हैं।


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