आरक्षण बना अभिशाप

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आरक्षण बना अभिशाप
आरक्षण बना अभिशाप

आज हमारे चारों तरफ से एक ही अवाज आ रही हैं आरक्षण। हर कोई अपने लिये या अपनों के लिए किसी न किसी तरह की मदद की मांग कर रहे हैं। आज स्थिति ऐसी हो गई है कि हमारे आसपास जिस भी क्षेत्र में नजर डालिये वहां दो तरह के लोग ही आपको नजर आएंगे। एक जो आरक्षण के द्वारा चयनित हुए हों अथवा दूसरे वो जिनको आरक्षण नहीं मिला तो घूस दे कर नौकरी ले लिये हों। अब जहाँ स्थिति इतनी भयावह हो तो उस समाज का भविष्य कैसा होगा।

कुछ समय पहले की बात है यहीं पास के ही शहर में एक हास्पिटल था। आसपास के लोग वहीं पर अपना इलाज कराने के लिए जाते थे। वहीं अपनी माँ की इलाज के लिए एक मित्र भी गया। उनकी माँ को बुखार और खांसी की परेशानी थी। उनको इलाज के लिए भर्ती कर लिया गया। डाक्टर के देखरेख में उनका इलाज होने लगा। रोज तरह तरह की दवाइयां और सूई दी जा रही थी। इतना खर्चा के बाद भी स्थिति सुधरने के बजाय उनकी हालत बिगड़ती जा रही थी। परिवार वालों के बार बार पूछने पर भी बीमारी के बारे में कुछ ठीकठाक बता नहीं रहे थे। तब परिवार वालों ने अपने मरीज को वहां से कहीं और दिखाने के लिए ले जाने की बात कही। और तब अचानक तकरीबन चौथे दिन किसी सूई देने के बाद उनकी मां की मौत हो गई। मौत का कारण दिल का दौरा आना बताया गया। लेकिन परिवार वाले इस रिपोर्ट को मनाने को तैयार नहीं थे। लेकिन तब थक हार के अपनी माँ का पोस्टमार्टम कहीं और से कराने का फैसला किया। लेकिन दूसरे हॉस्पिटल की भी रिपोर्ट यही थी लेकिन एक जानकार तजुर्बेवान डाक्टर ने जो गलती वहां हुईं थी उसकी भी सम्भावना जतायी। बस इतना सुनने या जानने की बात थी। वह लोग तब फिर उसी हास्पिटल पहुंचे जहां उनकी माँ कि मौत हुई थी सारी दवाई और सूई की जानकारी लेने के लिए। लेकिन उस हास्पिटल वालों को उन सब पर सन्देह हुआ तो सभी हास्पिटल करमचारियों ने कुछ भी बताने और दिखाने के बजाय उनलोगों के साथ बदसलूकी की और उन सबको वहाँ से भगा दिया। तब उन सबका सन्देह विश्वास में बदल गया कि उनके साथ वहां कुछ गलत हुआ है। और तब उन सबने अपने जैसे लोगों की तलाश की जिन्होंने अकस्मात अपने किसी परिजनों को हॉस्पिटल की गलती से खोया था। और फिर शुरू हुआ एक ऐसा आन्दोलन जिसने पूरी की पूरी समाज को हिला कर रख दिया और न जाने कितने ही लोग इसका शिकार हुए कितनों की जाने चली गई। लेकिन कहते हैं न कि हर अन्धेरे के बाद नई सुबह होती है।। इसमें जितने हॉस्पिटल जितने डाक्टर अथवा मेडिकल कॉलेज सब की जांच हुई तब जा कर पता चला कि यह सब डाक्टर तो थे लेकीन पढाई से नहीं बल्कि सिर्फ़ पैसों के दम पर जिसने जितना पैसा दिया उसे उतना अच्छा रैंक और कॉलेज मिला। 

अन्ततः उस हॉस्पिटल और उससे जुड़े कई मेडिकल कालेज कई तरह की संस्थान और न जाने कितने ही तरह के छोटे बड़े पदाधिकारियों के चेहरों से नकाब उतरा और आखिरकार सामने क्या आया कि उसमें दाखिला पाए जाने वाले डॉक्टर या तो घूस के जरिए चयनित हुए थे या आरक्षण के जरिये डाक्टर बनके छोटे मोटे हास्पिटल में कार्यरत थे। और यह सारे हम जैसे न जाने कितने ही लोगों का इलाज कर रहे हैं और हमारी जान को जोखिम में डाल रहें हैं।

एक साधारण सा सवाल है उन घूस देने या आरक्षण की मांग करने वाली उन समाज के सभी वर्गों के लोगों से अगर आपको पढाई में मदद चाहिए तो आप सरकार से पढ़ाई का खर्चा मांगिये किसी को कोई व्यापार करना है तो उसमें सहयोग मांगें। और सरकार ने तो कितने ही अभियान चलायें है उनके लिए जो पढना चाहते हैं अपने दम पर कुछ करना चाहते हैं। ऐसे संवेदनशील पदों के लिए घूस या आरक्षण क्यों।

अर्थात किसी भी तरह की नौकरी छोटी अथवा बड़ी सिर्फ और सिर्फ प्रतिभाशाली छात्रों को ही मिलना चाहिए जो भी छात्र छात्राऐं अपने क्षमता से अच्छा नम्बर लायेंगे उनका हर उस क्षेत्र में जिनके वो लायक है उनको ही पहला मौका मिलना चाहिए। 

ना ही हमें कम जानकार डाक्टर चाहिये ना इंजीनियर और ना कोई और। पैसे वाले, नेता अथवा अभिनेता को कभी कोई दिक्कत आती है तो वह बड़े बड़े जगहों पर अपनी परेशानी का इलाज कराते हैं। और गरीब मध्यमवर्गीय परिवार के लिए पीछे यह घूस और आरक्षण से बनने वाले डॉक्टर या इंजीनियर। 

नहीं अब नहीं सरकार को अब इस घूस और आरक्षण की सीमा तय करनी पड़ेगी। हमारे जान की भी उतनी ही कीमत है। जितना इन बडे़ नेता या अभिनेताओं की । 
अथवा सभी अभिभावकों से यह सहृदय प्रार्थना है कि अपने बच्चों को जबरन कुछ मत बनाये बल्कि वो जो अपने क्षमता से बने उनको वह बनायें। और अपराध कम करने में सरकार की मदद करें।।। सुरक्षित रहें सतर्क रहें।।।


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