आरक्षण: वरदान या अभिशाप

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आरक्षण: वरदान या अभिशाप
आरक्षण: वरदान या अभिशाप

आज हमारे समाज का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा आरक्षण बन गया है। वैसे अपको यह भी बता दें कि आरक्षण क्या था और क्युं लागु किया गया था?

आरक्षण देने की पहल अंग्रेजों ने की थी। अंग्रेजों ने प्रशासन में हिन्दुस्तानियों की हिस्सेदारी को सुनिश्चित करने के लिए 1935 में आरक्षण लागू किया | इसके बाद बाबा साहेब अम्बेडकर ने 1942 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण की मांग की।

कुछ समय बाद अलग अलग जाति  के लोगों ने लगभग अपने अपने राज्यों में आरक्षण की मांग को लेकर आन्दोलन करने लगे।

उस समय आरक्षण उन लोगों को ध्यान में रखकर लागू किया गया था जो समाज में अति पिछड़े वर्ग के थे। जिनके पास समाज में न कोई स्थान था न कोई व्यवस्थित रोजगार। उस पर ऊंची जाति वालों का दबदबा था। जमींदार साहूकार जैसे धनवान और ऊंची जाति के लोग नीची जाति के लोगों को समाज में कोई प्रतिस्ठित दर्जा देना नहीं चाहते थे। ऊंची जाति वाले हर क्षेत्र में अपना ही दबदबा कायम रखना चाहते थे। नीची जाति के लोगों को शिक्षा, रोजगार, राजनीति जैसे क्षेत्रों से वंचित रखा जाता था।

तब सरकार ने नीची जाति के लोगों को समाज में एक स्थान दिलाने के लिए उनका आर्थिक और सामाजिक विकास को ध्यान में रखते हुए आरक्षण को तीन भागों में विभाजित किया –

  • अनुसूचित जाति (एस सी ), 
  • अनुसूचित जनजाति (एस टी )
  • अन्य पिछड़ा वर्ग (ओ बी सी ) 

नीची जाति के विभाजन के बाद उनको हर क्षेत्र में 50% की हिस्सेदारी दी गई। बाकी सामान्य वर्ग को 50% दी गई। साथ ही सामान्य में सभी जाति के लोग आते हैं। लेकिन पिछड़े वर्ग में सामान्य लोग नहीं आते हैं। ऐसा आरक्षण के तहत नियम बनाया गया था। 

धीरे धीरे देश के विभिन्न राज्यों में छोटे बड़े कई जाति के लोगों ने आरक्षण की मांग की और तरह तरह के आंदोलन भी किए। कभी आंध्रप्रदेश तो कभी राजस्थान तो कभी गुजरात जैसे राज्यों में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन होता रहा है, कभी हिंसक तरीके से तो कभी शांतिपूर्ण तरीके से। आज आरक्षण की मांग उठ रही है महाराष्ट्र से।

महाराष्ट्र में मराठा समाज का कहना है कि वो अति पिछड़े हुए हैं और उन्हें समाज में दबाया जा रहा है, पूरे महाराष्ट्र में 30% मराठा लोग हैं जो आरक्षण कि मांग कर रहे हैं | वो आरक्षण जैसी संवेदनशील मामले को सड़क से लेकर सदन तक पहुँचाना चाहते हैं। सब कुछ ठीक था लेकिन तब तक, जब तक कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा था, लेकिन आज य‍ह आंदोलन आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। कहीं कोई आरक्षण के नाम पर आत्महत्या कर रहा हैं तो कहीं भीड़ के हाथों किसी निर्दोष को मारा जा रहा है, तो कहीं सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अगर हमारा उदेश्य सही है और हम एक तथ्यात्मक मुद्दा लेकर आये हैं तो उसे सरकार अवश्य सुनेगी और इस पर विचार भी अवश्य करेगी। बस थोड़ा संयम रखने की जरूरत है। माना कि आज भी हमारे देश में आरक्षण की बहुत आवश्यकता है क्योंकि आज भी तकरीबन 30 % लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। अभी हमारे देश अथवा समाज को इसकी जरूरत है। इसलिए आरक्षण मिलना ही चाहिए। 

मेरा मानना है कि सभी कानून अथवा नियम को समय समय पर बदलाव की जरूरत होती है। और आरक्षण में भी कुछ बदलाव आने चाहिए। पहले का मुद्दा अलग था पहले जाति में भेदभाव थी। आज ऐसा नहीं है आज जाति में फर्क नहीं करते लोग। 

आज आरक्षण उनके लिए नहीं है जो किसी नीची जाति से आते हैं। आज आरक्षण सिर्फ और सिर्फ उनके लिए है जो शारीरिक, मानसिक अथवा आर्थिक रूप से कमजोर है। हमें एकजुट होकर उनके लिए आरक्षण की मांग को सरकार के सामने रखना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो मुझे पूरा विश्वास है कि कुछ ही सालों में हमारे देश या किसी भी समाज को इस भेदभाव पैदा करने वाले आरक्षण की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। हम हर तरह से सक्षम और समृद्ध हो जाएंगे।

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