एंटी सैटेलाईट क्लब में भारत

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एंटी सैटेलाईट क्लब में भारत
एंटी सैटेलाईट क्लब में भारत

आर्थिक क्षेत्र में भारत विकासशील देशों की सूची में नम्बर एक पर आ गया है | सामरिक क्षेत्र में भी उसकी गिनती विश्व की एक उभरती ताकत के रूप में होती है | विशेष रूप से स्वदेश में निर्मित सामानों एवं यंत्रों के उपयोग से इस क्षेत्र में उसकी धाक बढ़ी है | अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी यह विकसित देशों की श्रेणी में आ गया है | अन्तरिक्ष में प्रेक्षण के मामले में इसकी अपनी शान है | अभी हाल में भारत ने अपने और विश्व के कई देशों के सैटलाईट कुल सौ से अधिक सैटलाईट को एक साथ अन्तरिक्ष में प्रेक्षण कर सफलता पूर्वक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर कीर्तिमान बनाया | और अब ए-सैट का सफल परीक्षण कर पूरी दुनियां को स्तब्ध कर दिया |

ए-सैट का पूरा फार्म है एंटी सैटलाईट और उसका काम है अन्तरिक्ष से दुश्मन के जासूसी करने वाले सैटलाईट को पृथ्वी पर से मार कर गिरा देना | ये काम बहुत कठिन है | ऐसे सैटलाईट को मारने के लिये पृथ्वी की कक्षा में चक्कर काटते हुए उसकी स्थिति का डाटा निर्धारित कर पृथ्वी से निशाना बनाना | इस योजना को अंजाम देने के लिये कुछ हीं मिनटों का समय मिलता है | इतने कम समय में हीं उसे अपने देश की धरती से लोकेट कर अपने हीं अंतरिक्ष में मार गिराया जाता है | इसके लिये बहुत हीं उच्च स्तर की तकनीक की आवश्यकता होती है | ए-सैट मारक मिसाईल का विकसित रुप है | इसकी मारक क्षमता अन्तरिक्ष में 1000 कि.मी. की है | मजे की बात है की भारत ने विना किसी विदेशी मददगार के इस तकनीकी को प्राप्त कर लिया है | पहले प्रयास में ही भारत ने यह बड़ी उपलब्धि प्राप्त किया है | यह गौरव की बात है |

भारत ने अपनी इस क्षमता का परीक्षण करने के लिये 24 जनवरी 2018 को 740 किलोग्राम का 1.5 मीटर बाय 1.5 मीटर का एक छोटा सा सैटलाईट अंतरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया | जिसकी दुरी 274 किलोमीटर थी | यह सैटलाईट लगभग 8 किलोमीटर प्रति सेकेण्ड की गति से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा था और मात्र 8 मिनट के लिये ही भारतीय क्षेत्र में रहता था | इसी 8 मिनट के अंदर उसे मारा जाना था | भारत ने सारे पारामीटरों की गणना करते हुए उसे 3 मिनट के अंदर मार गिराया | यह दुरी नष्ट किये जाने वाले सैटलाईट के कचरे से अंतरिक्ष को बचाने के लिये तय की गई थी | महत्वपूर्ण बात यह रही की इस कार्य में कोई गोला या बारूद का व्यवहार नहीं कर गतिज ऊर्जा के सिद्धांत का उपयोग किया गया |

ए-सैटलाईट की क्षमता रखने वाला भारत विश्व का चौथा देश हो गया | इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन के पास यह तकनीक थी | पाकिस्तान और चीन, भारत की इस क्षमता से चिंतित हो गया है | लेकिन भारत ने अपनी सुरक्षा की मजबूती के लिये किया है | यह किसी देश के विरुद्ध नहीं है | भारत का यह परीक्षण बहुत ही सही समय पर हुआ है | चीन, अमेरिका और रूस से विमर्श में था की न्यूक्लियर हथियारों की तरह अंतरिक्ष में भी ऐसे परीक्षणों पर बैन लगाया जाय | इससे पहले की बैन पर कोई निर्णय लिया जाता भारत ने अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखकर परीक्षण किया | ए-सैट की तकनीक रखने वाला भारत विश्व का चौथा देश बना |

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