अपनी सोच अपनी स्थिति

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अपराधिक मानसिकता !
अपराधिक मानसिकता !

अपराध क्या है ? आये दिन हमें कुछ न कुछ सुनने अथवा देखने को मिलता है जो कि हमारे सोच से विपरीत होती है, जिससे हमारी जिन्दगी भी आघात होती है। वही अपराध है। क्या लोग जन्म से ही अपराधिक मानसिकता वाले होते हैं। नही कदाचित् नहीं, माता पिता अपनी हर सन्तान की अच्छी अथवा सही परवरिश करते हैं या करने की कोशिश करते हैं।

लेकिन अगर फिर भी किसी इंसान में अपराधिक मनोवृत्ति जन्म लेती है तो इसका जिम्मेदार कौन है ? हमारा समाज या फ़िर हमारी गलत संगत ! 

आज मैं बात कर रही हूं ऐसे ही गलत संगत में बर्बाद होती एक जोड़े की। प्रियांनजली मध्यम वर्ग की प्रतिभाशाली पढ़ी लिखी समझदार लड़की थी। लेकिन अपने प्रेमी के गलत विचार और जल्द से जल्द अमीर बनने की लालसा को मना करने के बजाय समर्थन देकर दोनों की जिंदगी को बर्बाद कर दिया। दोनों ने मिल कर एक अमीर लड़के को पहले तो अपने प्यार में फंसाया फिर उसके साथ गलत संबंध बनाया फिर उस लड़के को बलात्कार के मामले में गिरफ्तार करवा दिया। यहां तक तो दोनों ने जो सोचा था वही हो रहा था लेकिन इस के बाद उस लड़के की सच्चाई और पुलिस की समझदारी की वजह से दोनों अपने ही रचे चक्रव्यूह में फंस गए और उनकी सारी की सारी अपराधिक मानसिकता उन पर ही हावी हो गयी। तब सामने आया कि उस लड़के को इन मामले से बचाने के बदले में मोटी रकम वसूल की जाने की मानसिकता थी। लेकिन जुर्म कभी नहीं छुपता है उल्टा दोनों पर धोखा धरी का मामला दर्ज किया गया है और दोनों की जिंदगी बर्बाद हो गई है।और दोनों के ऊपर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। 

बात बहुत मामूली है, लेकिन आजकल के नौजावानो में अत्याधिक रूप से पनप रही है। रातोंरात अमीर बनने की लालसा अथवा सभी आकर्षित चीजों को अपना बनाने की जिज्ञासा। चाहे इसे पाने का रास्ता कोई भी हो बस ख्वाहिशें पूरी होनी चाहिए। लेकिन क्या इस तरह की ख्वाहिशें रखना गलत है ?नहीं लेकिन इन को पाने में जल्दबाजी करना गलत है।

लोगों को अपनी मानसिकता बदलनी पड़ेगी। जीवन में हर किसी को सही गलत चुनने का मौका मिलता है। अपने लिये जीने और अपनी ख्वाहिशें पूरी करने के लिए एक अवसर हर इंसान को अवश्य मिलता है। बस वो समय कौन सा है और उसका उपयोग किस तरह से किया जा सकता है वह अपनी सोच और हमारी सही परवरिश का ही परिणाम होता है। 

यह तो आपने भी सुना होगा कि अत्यधिक रफ़्तार हमेशा ही दुर्घटना का कारण होता है। मंजिल हर किसी की दूर और कठिन होती है जो तेज़ रफ़्तार में जाने की कोशिश करते हैं या जाने की ख्वाहिश रखते हैं वो कहाँ और कैसे पहुँचते हैं यह हम सभी जानते हैं। लेकिन जो समय अथवा समझदारी से आगे बढ़ते हैं वह अवश्य ही एक न एक दिन अपनी मंजिल पाते हैं और सुकून से अपनी और अपनों के साथ मिलकर जीते हैं। 

तो बस कौन सा रास्ता किसके लिए सही है यह आप पर निर्भर करता है, सही रास्ता चुने सुरक्षित रहें।


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