अपराधी कौन?

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अपराधी कौन?
अपराधी कौन?

हम कितने ही समृद्ध हो जाएं। हम कितने ही पढ़ लिख जाएं हमारी सोच कितने विकासशील क्युं न हो जाए। लेकिन बेटे और बेटी का अंतर करना और रखना हमे अच्छे से समझ आता है। इसलीए जब संतान पैदा करने की बात आती है तो हम सिर्फ और सिर्फ बेटा ही चाहते हैं |

क्योंकि वही ढकोशली वाली सोच बेटा से वंश बढता है। बेटा बुढापे में हमारी सेवा करेगा। बेटा कमा के लायेगा वगैरह वगैरह।  बस एक बार बेटी को बेटे की तरह प्यार और परवरीश तो देकर देखीए। बेटे से कहीं बेहतर पाएंगे बेटीयों को।

आज 20 वी सदि मैं आकर भी हम बेटे के लिए एक मां को जीम्मेदार मानते हैं तो आप ही सोचिए कि हम कीतने विकासशील हुए हैं इस पुरुष प्रधान समाज में औरतों की स्थिति में सुधार हुआ भी है या नहीं।

मेरे परोस में ही बिमला और उसका परीवार रहता था उसका घर मेरे घर के पास ही था। शायद इसलिए मैं उसके घर के हालात से वाकिफ़ थी। बिमला का पति काफी गुस्से और क्रूर प्रवृत्ति का था। सास ससुर का स्वभाव भी बिमला के प्रति कुछ अच्छा नहीं था। उसकी दो बेटियाँ थी बड़ी मुन्नी 8 साल की और छोटी गुड़िया 6 साल की थी। बिमला सारा दिन घर का सारा काम काज करती, लेकिन फिर भी सास के तानो की अवाज अरोस पड़ोस तक गूंजती थी। कभी मायके वालों को लगा कर गाली देती तो कभी कामों में बे वजह गलतियां निकाल कर। लेकिन ये सारे ताने और गालियां बेटा न होने के कारण ही होती थी। वो दिन भर गालियाँ खाती और चुप रहती मानो बेटा न होना इसमें उसकी ही ग़लती हो।

सबसे अधिक दुःख और तकलीफ तो तब होती जब रात में पति के द्वारा प्रतारीत और तानों की बरसात होती थी। तो मानो उसे इसी जीवन में नर्क की तरह महसूस हो रही थी। अब बिमला अपने जीवन से तंग आ गई थी। मायके भी नहीं जा सकती थी क्योंकि उनकी स्थिति भी कुछ ठीक नहीं थी। और तो और मानो उसे अपने बेटियों का भी भविष्य ऐसा ही दिखाई दे रहा था।

और अब ये नया झमेला,सास उसे झाड़ फूँक भी कराना शुरू कर दि थी अब तो बिमला की स्थिति मानो एक मानसिक रोगी की तरह हो गई थी। क्योंकि उसके अंदर की करवाहट अब नाशुर बन गया था। जीसकी जलन और पीड़ा उसे न जीने दे रहा था और न मरने। और इसी हालात में आ कर उसने अपनी छोटी बेटी की गला दबाकर हत्या कर दी। और खुद को पुलिस के हवाले कर के वो खुद को इस घर रूपी कैद से आजाद कर देती है।

मुझे ये नहीं समझ आ रहा है कि बिमला के इस फैसले का दोष किसे देना है, कौन है उस मासूम का कातिल। क्या बिमला के सास ससुर या उसके हालात को या उस पति को जो दुनिया की सारी खुशियां देने का वादा करके शादी के बंधन में बांध कर लाया था। क्या वो अकेली इस हत्या की गुनहगार है। क्योंकि उसके परिवार वालों को तो मानो कोई फर्क ही नहीं पड़ा। मानो उनके घर में कुछ हुआ ही नहीं हो।

अगर कोई आघात हुई थी तो सीर्फ वो 8 साल की मुन्नी। जीसने अपनी छोटी बहन खोई। और जीसके सर से मां का साया भी छीन्न गया।

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