अपराधिक मानसिकता ! गतांश के आगे

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अपराधिक मानसिकता !
अपराधिक मानसिकता !

मैंने कुछ किताबों में मानसिक रोगियों के बारे में पढ़ा है | ऐसे रोगियों के बारे जानिये  जिनका सम्बन्ध अपराध से जुड़ जाता है | कुछ को अपने जीवन से घृणा हो जाती है और उनमें आत्महत्या करने की प्रवृति तक जागृत हो जाती हैं | वे अकेले में आत्महत्या करने का प्रयास भी करते है | ऐसे लोगों को अकेले में नहीं छोड़ा जाता है | कुछ लोग अपनी खिन्नता और दुःख तकलीफ पर अकेले में बैठकर उस पर सोचने में लीन रहता है , किसी से कोई चर्चा भी नहीं करता, एकदम शांत रहता है | आग्रह से पूछने पर अपनी बात कहते हुए रो भी पड़ता है | वहीँ दूसरी ओर कुछ लोग ऐसी हालत में चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो जाता है | शांत्वना से उसकी खीज बढ़ जाती है | झगड़ा करने पर उतारू हो जाता है | कुछ लोग खासकर महिलाएं अपनी संतान और पति का खयाल नहीं रखती है | उन्हें भला बुरा कहती है | लेकिन उनका अहित वो किसी भी में रूप बर्दास्त नहीं कर सकती | इस मानसिकता का दूसरा पक्ष भी होता है | वो अपने सबसे प्रिय को नुकसान पहुँचाना चाहती है जबकि अपरिचित से काफी घुलमिल कर उपदेशक एवं शांतिप्रिय दिखती है | कई महिलायें अपने को सबसे ज्यादा समझदार मानती है और धनी भी | यह एक दिलचस्प बात है कि किसी को अपनी दाहिनी तरफ एक चेहरा नजर आता है तो  बायीं तरफ दूसरा | उसे एहसास होता की वह किसी के अधीन है और वह उसके आदेश का पालन करता है | उसका मन किसी गलत काम को करने के लिए मना करता है लेकिन अपने हीं मन के दुसरे पक्ष के अधीन उस काम को करना पड़ता है | इस तरह के रोगी अपराधिक वारदात से ज्यादे सम्बद्ध होते हैं | लेकिन बाद में उसे पश्चाताप भी होता है | सोचता है वो दुबारा कोई अपराध नहीं करेगा | लेकिन वो दुबारा अपराध करने से भी अपने आप को रोक नहीं पाता है | और भी कई तरह के मानसिक रोगी होते हैं सबका जिक्र करना यहाँ प्रासंगिक नहीं है | कुछ पुरूष ऐसे भी होतें है जिन्हें महिलाये एकदम पसंद नहीं है | वे उनसे घृणा करते हैं | उसके आस पास भी जाना नहीं चाहते | ठीक इसके विपरीत, कुछ महिलायें भी पुरुषों से घृणा करती है | वो उनसे कोई सम्बन्ध नहीं रखती | ऐसे मानसिक रोगी परिस्थितिजन्य कारणों से ज्यादेतर अपराधिक घटनाओं के आरोपी या शिकार हो जाते हैं | उन्हें किसी तरह के दंड देने से पहले उनकी मानसिक जाँच की जानी  चाहिए |

कुछ लोग अपनी क्षमता को सही रूप में नहीं आँक सकते और आसमान में छलाँग लगा लेते हैं | परिवार वालों को भी उनसे काफी अपेक्षायें रहती है | आसमान में छलाँग लगाने वाले ऐसे लोग जब गिरते हैं तब निराशा एवं हताशा के सिवा उनके पास कुछ नहीं बचता | उन्हें अपने घर वाले की प्रताड़ना भी झेलनी पड़ती है | वे अच्छी अच्छी बातें भी करेंगे, आपको सही दिशा भी दिखायेंगे, उपदेश भी देंगे परन्तु खुद को सँभालना उनके लिये मुश्किल होता है | वे कहीं अपने घर या बाहर जाने अनजाने में कोई गलती कर बैठें और उन्हें संभालने के बदले प्रताड़ित किया गया तो फिर उन्हें  अपराधी बनने से रोकना कठिन है |

ऐसे रोगी प्राय: जन्मजात नहीं होते | वे किसी न किसी गंभीर उपेक्षा के शिकार होते हैं | घर एवं आसपास के सामाजिक परिवेश भी ऐसे रोग के मुख्य कारणों में एक हैं | समाज में भेद – भाव की राजनीति भी एक कारण हैं और ऐसे मामलों में राजनीतिक संरक्षण का मिलना अपराधिक प्रवृति को बढ़ावा देता है | हम यह कहना नहीं चाहते हैं की सभी तरह के अपराधी मानसिक रूप से कमजोर या बीमार होते हीं हैं | लेकिन बच्चियों से रेप और उनकी हत्या करने वाले अपराधी किसी न किसी रूप से असामान्य मानसिकता वाले होते होंगे | सामान्य लोग ऐसा कभी नहीं कर सकते हैं |

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