औरत एक वजूद न की वहम

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औरत एक वजूद न की वहम
औरत एक वजूद न की वहम

एक औरत क्या है औरत वो लोहा का टुकड़ा है जिसे शीशे के चार दीवारों में तराशा जाता है और हर रोज अपने जरुरत के मुताबिक थोड़ा थोड़ा करके उसे तोड़ा जाता है। कभी माएके में मजबूरियां दिखा कर कभी ससुराल में जोर दिखा कर। जैसे कहते हैं न “लकड़ी जल कोयला भया कोयला जल राख” हमारे देश की औरतों की दशा दीसा कुछ हद तक वैसी ही है। हर मोड़ पर उसे राख़ करने वाले तैयार बैठे हुए मिलेंगे। 

मै यह नहीं कहती यह सिर्फ गरीबों की घर की बात है यह हर वर्ग के परिवार वालों के घरों की बात है बस दर्द का तरीका बदल जाता है। कई बार तो खुद औरतें यह समझ नहीं पाती की उसकी यह जिन्दगी उसके लिए भी है। इस धरती पर उसका भी कोई वजूद है। उसे भी जीने का हक़ उतना ही है जितना दूसरों को। लेकिन सच्चाई तो यही है एक औरत की जन्म से लेकर जिन्दगी तक दूसरों की जरुरत पूरी करने के लिए होती है। जब तक दूसरों की जरूरत के मुताबिक जीती है तब तक तो वह आदरणीय संस्कारी सहनशील और न जाने कितने ही अच्छे और बड़े नाम दिये जाते हैं।

लेकिन जिस दिन वह अपने लिये जीने की सोचतीं हैं उस दिन अपनो के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए मिसाल बन जाती है। ऐसे ही एक औरत की कहानी।

शक्ति ने 18 वर्ष की आयु में एक 25 वर्ष के युवक से प्रेम कर शादी कर ली। अपना परिवार पढाई सब कुछ छोड़ कर शादी का फैसला लिया। कुछ समय सब कुछ ठीक रहा। ससुराल में इतनी कम उम्र में ढेरों जिम्मेदारियां तरह तरह के कामों का दवाब उसे अन्दर ही अन्दर तोड़ने लगा। फिर आये दिन बहस शुरू होने लगी अपनी इच्छाओं के विरुद्ध काम करना और बातें सुनना उसे दीमक की तरह खोखला करने लगा। मानो उसके खुली विचारों को घुन लगने लगा था वो इस कदर टूटती जा रही थी कि उसके पास दो ही विकल्प दिखायी दे रही थी वो संघर्ष किये बिना ख़ुद को ख़त्म कर दे या अपने कमजोरियों को ख़त्म कर दे और नयी जिन्दगी शुरू करे और एक समझदार इन्सान की तरह उसने दूसरा रास्ता चुनने का फैसला किया। और एक बार मिला यह जीवन इस तरह से नष्ट न करने का संकल्प लें कर ख़ुद को इस शादी नाम के कैद से आजाद कर के नये रास्ते बनाने निकल गई। अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करते हुए अपनी पढ़ाई पूरी कर नौकरी की और जब अपने दम पर खड़ी हो गयी तब। उन्होंने अपने जीवन से प्रेरणा लेकर कार्यक्रम करना शुरू कर दिया और न जाने कितने ही औरतों को सही फैसला लेने में मददगार साबित हुई। अपने नाम की ही तरह कई कमजोर पड़ती औरतों की शक्ति बनी | 

ऐसे लोगों से हमें प्रेरणा लेने की जरूरत है क्यूंकि आये दिन न जाने कितनी ही औरतें पति और ससुराल के द्वारा होने वाले प्रताड़ना को सहती हुइ प्राण त्याग देती है। या घुट घुट कर जीने पर मजबूर रहतीं हैं।

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