औरत की शक्ति

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दो शब्द औरतों के नाम
दो शब्द औरतों के नाम

औरत वो दृढ़ संकल्प हैं, जो खुद में ही सशक्त है।
जब तक प्रेम की डोर है, तब तक ही वह कैद है।
जीस दिन टुटा मोह है, फिर सारे बंधन कमजोर है।
आँसुओं से बंधा हुआ, ख़्वाबों की बांध है।

मोह माया सब छलावा, अरमानों का खेल सारा।
अपने पराये नाम के है, दर्द भरा य़ह जीवन सारा । 
आँसुओं से सजा है जीवन, कांटो का है पग पग डेरा। 
कभी मोह ने घेरा, कभी माया का बसेरा।

आशाओं का साथ है, फिर भी जीवन विषाक्त है।
आरम्भ से अंत तक, दिखता बस घनघोर अंधेरा।
पग अपना राह पराया, मंजिल बना अंतिम साया । 
एक पल सब लगता अपना, दुसरे पल बन जाए छलावा। 

जीने का कोई मोह न होता, आंचल य़ह कमजोर न होता। 
सहनशीलता की य़ह मुरत, त्याग भरा है औरत जीवन,
जब भी आया मुश्किल छाया, ढाल बन डटी जिसकी काया। 
वह औरत की ही काया, जिसने यमराज तक को झुकाया। 

मुश्किलों का विकल्प है, औरत खुद में ही सशक्त है। 
जिम्मेदारियों का सागर में, डूबना जिसकी फितरत है। 
कहने को तो रिश्ते कितने, अपने कितने कोई न जाने। 
ऐसी स्थिति रिश्तों की है, अपने पराये बस नाम के है। 

हो जाये आँखों से ओझल, याद करे न दुनियां खोकर।
ताकत आस्था की है, जीवन संस्कारों से भरी है। 
निभाना जिसको दोनों की जिम्मेदारी है


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