बाल विवाह

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बाल विवाह
बाल विवाह

हमारे भारत देश में समाज के द्वारा बनाये गये कई कुरीति आज भी शक्रिये हैं जिन में सबसे अधिक कष्ट और विनाशकारी कुरीति है “बाल विवाह” | 

बाल विवाह वैसे तो पूरी दुनियाँ में फैली है | ४९% बाल विवाह पुरे विश्व में हर साल होती है | जिसमें ४०% बाल विवाह सिर्फ हिंदुस्तान में होती है |

बाल विवाह तब अस्तित्व में आया जब दिल्ली सल्तनत  में राजशाही प्रथा प्रचलन में थी | हिन्दू समाज अपने बेटियों के रक्षा के लिए और विदेशी सरकार द्वारा अपरहरण बलात्कार जैसी घटनाओं से बचने के लिए इस प्रथा का आरम्भ किये |

लकिन धीरे धीरे इस प्रथा का अस्तित्व ही बदल गया | गरीब और माध्यम वर्ग के लोग उस प्रथा की आड़ लेकर अपने बेटियों की परवरिस  उनकी जिम्मेदारी और दहेज़ न देने से बचने के लिए करने लगे और ये प्रथा पुरे देश में आग की तरह फ़ैल गई |

भारत जैसे बड़े और विकासशील देश में आज भी ४०% बेटियों का विवाह १८ साल से भी कम उम्र में कर दिया जाता है | जिसका खामियाजा यह होता है की कम उम्र में ही बच्चे एक ऐसे सम्भन्ध में बांध जाते हैं, जिसका वो ठिक से मतलब भी नहीं समझ पाते हैं | उन पर परिवार और समाज की जिम्मेदारी दाल दी जाती है | खेलने कूदने, पढने लिखने की उम्र में लड़कियां चूल्हा चोका सँभालने और लड़के रोजगार ढूंढने में लग जाते हैं |w

पूरी तरह से विकसित न होने के कारण उन्हें कई तरह की बिमारियों का सामना करना पड़ता है | कम उम्र में माँ बनना, माँ बच्चों के उम्र में अधिक अन्तर न होना और इन कारणों से  माँ बच्चों का अधिकतर अस्वस्थ होना और असमय मृत्यु हो जाना |

वैसे तो सरकार ने इस प्रथा को रोकने के लिए कई कानून बनाये हैं , कई अभियान चलाये हैं | यहाँ तक की बाल विवाह में बंधें बच्चों को बालिग होने पर इस विवाह को न मानने का भी अधिकार मिला है |

लकिन इसका पालन कोई नहीं करता है इतना बदलाव जरुर आया है की ये प्रथा अब अधिकतर गरिवों में ही देखने को मिलता है| लकिन हमें तो इस प्रथा को पूरी तरह से रोकना है | इसके लिए हमें मिलकर प्रचार या नाटक के रूप में जगह जगह कार्यक्रम करने होंगे और लोगों को जागरूक करना होगा | उनको अपने बच्चों को स्कूल भेजने और शिक्षित बनाने के फायदे बताने होंगे उन लोगों को बच्चों के प्रति सही जिम्मेदारी क्या है उसका एह्सास करना होगा | तब ही हम एक स्वस्थ और शक्तिशाली समाज की रचना कर पायेंगे |

ये हमारी जिम्मेदारी है की हर इन्सान किसी न किसी तरीके से लोगों को हर समय सही और गलत का अन्तर बताते रहें और हमेसा एक दुसरे को जागरूक करते रहें |

हमको मिला है फूल वो 

बच्चों के रूप में 

टूटे कभी न बिखरे 

कुविचारों के कड़ी धुप में |

आये न कोई पतझड़ 

समृधि हो इनकी इतनी

मिले आज़ादी इनको इतनी 

चहकती  महकती रहे हमेशा 

गैरों अपनों के बिच वो |

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