बाबा नगरिया चलो काँवरिया

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बाबा नगरिया चलो काँवरिया
बाबा नगरिया चलो काँवरिया

हमारे देश में कई देवी देवताओं की पूजा की जाती है। सभी देवी देवताओं की अलग अलग महिमा है। इतने मान्यताओं में भी सावन महीना का एक अलग महत्व है। लोग बड़े ही श्रद्धा भावपूर्ण होकर भोले बाबा के दर्शन के लिए 105 किलोमीटर दूर कंधे पर काँवर लिए,मन में ढेरों आस और सपने लिये, कोई दर्द में डूबा तो कोई टूटती आस लिए आते हैं | बस एक बार दर्शन हो जाये तो मानो दुखियों का दुःख और बेआसरों को मानो आश्रय मिल जाएगा। इन्ही हौसलों के साथ टूटे फूटे रास्तों पर कहीं धूप कहीं बरसात कहीं पहारों की तरह चढ़ान तो कहीं नदियों की गहराइयों को पार करते हुए, बोल बम का नारा लेकर एक दूसरे का साथ और दर्द को थामें चले जाते हैं भोले बाबा के दर्शन को। कोई एक दिन का संकल्प लिये तो कोई हर हाल में पहुंचने का। मनसा सबकी एक ही होती है। दर्शन हो जाएँ बस भोले बाबा के। आस हो जाएं पूरे इसी सोच के साथ हम भी कुछ गुनगुना ले सावन के महीने में। 

आया महीना सावन का, 
धूम मचा है काँवर का। 
जहां भी सुनते बोल बम, 
वहीं पर रूकता मेरा मन। 
बच्चे बुढे सबके हाथ, 
काँवर चमके सबके पास। 
बाबा महिमा सब है कहते,
सुनते सुनते मन नहीं थकते।
आंखों में हैं दरस के सपने,
आस जगे हैं कितने भोले।
रुप बनाके रंग बिरंगे,
नंदी कहीं तो बनके भोले।
होड़ लगी है जाने कैसी,
भागे दौड़े बेसुध जैसी।
मन में जागे एक तरंग,
भोले बाबा अपने संग।
जाना हमको बाबा नगरिया,
साथ तू लेले सबको काँवरिया। 
आया महीना सावन का,
धूम मचा  है काँवर का।
दरस को नैना कितने व्याकुल, 
सबसे पहले पहुंचे डाक बम। 
आज न रुकने पाए मन ये, 
थम न जाएँ कदम ये अपने। 
पहुंचेगे अब ये ठानी हमने, 
आये धूप या हो बरसातें। 
कांटे हो या बिछे हो रोरे 
टूटेंगे न आस हमारे। 
सबको लेके साथ चलेंगे, 
पुरे होंगे सबके सपने। 
बस तुम रखना अपने मन में, 
बाबा न देंगे हमको झुकने। 
जाएँगे हम बाबा शरण में, 
चढ़ायेंगे हम गंगा जल ये। 
आया महीना सावन का, 
धूम मचा है काँवर का।

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