बरसात में रखें सावधानियां, तब रहें सुरक्षित

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बरसात में रखें सावधानियां, तब रहें सुरक्षित
बरसात में रखें सावधानियां, तब रहें सुरक्षित

मानसून के आने की खबर मात्र से ही हमारे देश की आधी गर्मी चली गयी। कितना आराम महसूस होता है ख़बर मात्र से ही। अभी कुछ दिन पहले ही तो केरल में मानसून ने दस्तक दिया है। पूरे देश में फैलने में तकरीबन एक महीने का समय लगेगा। और आते ही तूफ़ान से होने वाली तबाही को लेकर  केरल के चार राज्यों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। वैसे तो इस बार बारिश लगभग 93% तक होने के आसार हैं। जो कि औसत से कम है। कहते हैं 95% बारिश को सही माना जाता है। 

तकरीबन एक महीने बाद पूरे देश को पता चल जाएगा कि किस राज्य में बाढ़ का प्रकोप है अथवा कौन सा राज्य सूखा  ग्रस्त है। उम्मीद है पिछले साल की अपेक्षा इस बार सरकार अधिक तत्पर दिखेगी सूखा अथवा बाढ़ से बचने के लिए।

बारिश के कारण होने वाली परेशानियां अधिकतर गांव देहात अथवा कच्ची रास्ते वाली सड़कों पर अधिक होती है। वैसे बारिश की परेशानियां हर जगह एक जैसी ही होती है लेकिन मुंबई की बात ही अलग है वहां बारिश आयी नहीं की लोगों की चिंताएं पहले से शुरू हो गई होगी। समुद्र के किनारे या कह सकते हैं समुद्र के ऊपर बसे होने के कारण, बारिश आयी की! कभी न रुकने वाली मुंबई बन्द होने की परेशानी से चिंतित होगी। उसी प्रकार दिल्ली में यमुना के किनारे बसे हुए लोगों की चिंताएं अब बारिश के कारण होने वाली तबाही का सामना कैसे करें । उसी तरह नदियां, समुद्रतटीय क्षेत्र जो सब हैं उनके लिए बारिश कतई सुकून नहीं दिला सकता है। बड़े शहरों की स्थिति बरसात के दिनों में इतनी भयावह होती है! तो छोटे शहरों अथवा गांवों की सोचिए। 

हालांकि इन सब परिस्थितियों से निपटने के लिए बहुत सारे उपाय सरकार ने कर रखा है। दिक्कतें तो छोटे शहरों अथवा गावों में होती ही है। जहां नदी या समुद्र से जुड़ी परेशानियां नहीं होती वहां की सबसे बड़ी समस्या जलजमाव के कारण होती है। रास्तों पर छोटे छोटे गढ़े जो बरसातों में भर जाती है रात के समय रास्ता सही से न दिखने पर दुर्घटना का कारण बनती है। जलजमाव के कारण बच्चे बड़े सबके रोज मर्रा की जिंदगी अस्त व्यस्त हो जाती है। कहीं कहीं तो नालें तालाबों के समान बन जाते हैं, जिसे पार करना किसी जंग से कम नहीं होता है। अधिक बारिश हो गई तो कच्ची बाँध सड़कें सब ध्वस्त हो जाते हैं। एक जगह से दूसरी जगह जाने के रास्ते बन्द हो जाती है। इस मौसम में आँधी तूफ़ान भी समय समय पर आते रहते हैं। जिस कारण फुस मिट्टी के छोटे छोटे घर बहुत बुरी तरह से प्रभावित हो जाते हैं।

वैसे तो आज के समय में सरकार बहुत हद तक इन समस्याओं से निपटने के लिए तैयार हो गई है। लेकिन फिर भी लोगों को अपने परेशानियों से निपटने के लिए स्वयं भी तैयार रहने की आवश्यकता है। कुछ बातों का ध्यान विशेष रूप से रखना जरूरी है जैसे कि अपने आसपास पानी न जमा होने दें, अगर कहीं गड्ढे दीखे तो सब मिलकर विचार विमर्श करके भरवा दे। बारिश के पानी को निष्कासन के लिए बड़े बड़े नालों की सफाई करवा दें। बाहर खुले जगहों पर गंदगी को जमा न होने दे वर्ना बरसात में वहीं पर पानी लग कर गंध फैलेगा और बीमारियों का कारण बनेगा। बिजली के तारों का विशेष रूप से ध्यान रखें कहीं कोई बिजली की तार नंगी अथवा टूटी अवस्था में हो तो उसे तुरंत ठीक करवाने के लिए बिजली विभाग को ख़बर दें। बरसात के दिनों में आँधी तूफ़ान के कारण सबसे ज्यादा बिजली पोल ही प्रभावित होती है। यह सारे जानकारियां तो बहुत ही मामूली है इनका ध्यान तो हर तबके के लोग रख सकते हैं। क्योंकि दुर्घटना के बाद सोच विचार का कोई लाभ नहीं होता अथवा हमारे पास काश ऐसा किये होते या हमने ही करा होता तो आज ऐसा नहीं होता य़ह सोचने से कुछ नहीं होगा। 

“सही समय पर सही काम,देता हरदम मन को आराम, 
परिस्थितियों को समझ के एक, बन जाएं दिल से नेक।”
 

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