बेरोजगारी लाईलाज ?

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बेरोजगारी लाईलाज ?
बेरोजगारी लाईलाज ?

विगत वर्षों में सरकार द्वारा किये गये प्रयासों से शिक्षा के प्रति लोगों में जागरुकता आयी | बूढ़े, जवान, बच्चे सभी लाभान्वित हुए | स्कूल एवं कॉलेजों में नामांकन बढ़ने लगा | बड़े-बड़े स्कूल और कॉलेज खुलने लगे | नये-नये विषयों, उपविषयों को लेकर नये-नये विश्वविद्यालय भी आगे आने लगे |

आज लाखों बच्चे हर साल डिग्री लेकर कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों से बाहर आ रहे हैं | हाथों में डिग्रीयाँ पाकर बच्चे काफी उत्साहित हो रहे हैं | उनकी अभिलाषा बहुत ऊँचे स्तर की होती है | अच्छे एवं सक्षम बच्चे तो अपनी मंशा पूरी कर लेते हैं | यह भी खबर मिलती है कि आवेदकों द्वारा परीक्षा में प्रतिबन्धित अंक (cut off marks) नहीं प्राप्त कर सकने के कारण पद खाली ही रह गये | इस तरह असफल बच्चों की संख्या काफी तादाद में होती है | धीरे-धीरे उनमें बेरोजगारी घर करने लगती है | आये दिन अखबारों / समाचारों से यह खबर मिलती है कि आदेशपाल के रिक्त पदों पर भर्ती के लिये काफी संख्या में स्नातक,स्नातकोत्तर, इंजिनियर और मैनेजमेंट के लड़कों ने आवेदन प्रपत्र भरें हैं |

वास्तविकता यह है कि कॉलेज या विश्वविद्यालय मात्र डिग्रीयाँ बाँटने का काम कर रही है | पढाई सामान्य विषयों का हो अथवा तकनीकी शिक्षा का, डिग्री तो बच्चों को मिल ही जाती है मगर उनकी योग्यता का स्तर पाँचवी पास बच्चों की तरह रहती है | कॉलेज में दाखिला से मतलब होता है | दाखिला हो गया तो डिग्री तो मिलनी है | डिग्री मिल गई तो नौकरी भी मिलनी है | ऐसे बच्चों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है |

बेरोजगारी को दूर करने के लिये सबसे पहले बेरोजगारी के कारणों पर ध्यान देना आवश्यक है | मुख्य कारणों में सबसे प्रथम है:- शिक्षा का उदारीकरण | कोई परीक्षा नहीं, स्कूल में नामांकन करवा लीजिये, 10वीं पास का प्रमाण पत्र मिल जायेगा | हालांकि पिछले वर्षों से इस पर रोक लग गयी है | सुधार के नाम पर 70 वर्षों के इतिहास में सिर्फ प्रयोग ही होता आ रहा है | परिणाम है कि शिक्षा का स्तर इतना नीचे गिर गया है जहाँ से उठने की सम्भावना वर्षों बाद ही नज़र आती है | इसके लिये दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है | कुकुरमुत्ते की तरह उग आये कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों की संख्या कम करनी होगी | क्षेत्रीय स्तर पर कॉलेजों को मिलाकर एक या दो कॉलेज रहने दिया जाय | प्रवेश परीक्षा के आधार पर उसमें नामांकन लिया जाय | कॉलेज में जरुरी संसाधनों की उचित व्यवस्था की जाय | खोज एवं विकास प्रभाग हर विषयों के साथ होनी चाहिये | उसके लिये समुचित वित्तीय प्रबंध किया जाय | छात्रों से ली जाने वाली फीस में बढ़होत्तरी की जाय,आज जो फीस की राशि ली जाती है वो गुलाम भारत के समय से ही आ रही है | शिक्षा में सुधार लाने के लिये नीतिगत परिवर्तन लाना होगा | उच्च शिक्षा को सर्व शिक्षा अभियान से अलग रखना पड़ेगा जो व्यावहारिक दृष्टि से अभी चलन में दिखाई पड़ता है | “उच्च शिक्षा कुछ के लिये” के सिद्धान्त पर काम करना होगा |

बेरोजगारी के लिये बच्चों के माता-पिता भी एक कारण हैं | माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षा की ओर तो मोड़ा, उसके लिये तत्परता भी दिखाई लेकिन दिशा सही देने में कामयाब नहीं हो सकें | वे अपने बच्चों की क्षमता एवं योग्यता को नज़र-अन्दाज़ कर सिर्फ उनसे अपेक्षा ही रखे |

स्वरोजगार से भी बेरोजगारी कम हो सकती है | छोटे-छोटे उद्योग, कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया जाना चाहिये | कोई काम बड़ा या छोटा नहीं होता है | मानसिकता होनी चाहिये | सरकार को देश में उपलब्ध साधनों से संसाधनों को बढ़ावा देने का प्रयास करना होगा | विदेशी निवेशकों को आमंत्रित करना चाहिये | इससे भी बेरोजगारी में कमी आ सकती है | अतः बरोजगारी लाईलाज नहीं है |  


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