बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ – 2

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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ - 2
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ - 2

कुछ समय पहले जब मैंने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर कुछ लिखने की कोशिश की थी तब मन दुःखी था। क्योंकि बेटियों की स्थिति बहुत ही भयावह थी। 2001 के सर्वेक्षण अनुसार प्रति 1000 लड़कों पर 927 लड़कियां हमारे देश में थी फ़िर 2011 में जब सर्वे हुआ तब यह अनुपात घट कर के औसतन प्रति हजार लड़कों की अपेक्षा 918 लड़कियां हो गई। फिर जब भाजपा की सरकार आयी तब 2015 में मोदी जी द्वारा आयोजित “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” अभियान शुरु किया गया। बेटियों के लिए तरह तरह के अभियान चलाये जाने लगे “सुकन्या योजना,इसमें से एक है। जिसमें जन्म से लेकर 10 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए खाते खुलवा सकते हैं।18 वर्ष तक इसमें पैसे जमा कर सकते हैं, 1000 से 150000 तक साल भर में जमा कर सकते हैं। बेटियों के भविष्य को संवारने के लिए इन जमा पैसों पर 8.5 फीसदी तक ब्याज देगी सरकार। इस पर कोई कर भी नहीं लगेगा। इन्हीं कारणों से आज बेटी के जन्म पर माता पिता निराश नहीं हो रहे हैं। अथवा लोग बेटियों को लेकर जागरूक हुए हैं तब ही तो आज चार सालों में लिंगानुपात में काफी हद तक सुधार हुआ है तकरीबन हजार लड़कों की अपेक्षा 931 हो गई है |

तकरीबन सारे राज्य अथवा केन्द्र शासित प्रदेशों में जिनमें 11 राज्यों को छोड़ दिया जाए तो 25 राज्यों में थोड़ी न थोड़ी बढ़त ही हुई है। इनमें से कुछ राज्य जिनमें “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” अभियान शुरु हुआ था जिस कारण से वहां काफी हद तक बढ़ोतरी हुई है। 

11 राज्य जिनमें गिरावट दर्ज की गई है उनमें से कुछ हैं अरुणाचल प्रदेश 956 से 914, जम्मू कश्मीर में 958 से 943, तमिलनाडु 947 से 936, महाराष्ट्र में 940 से 930 ये राज्य जहां सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। 

 25 राज्यों में जहां बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिनमें से कुछ है जहां सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 1000 के औसत में, केरल-छत्तीसगढ़ में 923 से 959, मिजोरम 923 से 958, गोवा 918 से 954 तक, नगालैंड में 904 से 936, उत्तराखण्ड में 906 से 938, हरियाणा में 887 से 914, सिक्किम 928 से 948, तेलंगाना 925 से 943 जैसे राज्य हैं। 

बेटियों को जीने का अवसर प्राप्त हुआ सिर्फ भाजपा सरकार के कारण। बेटियों के सुरक्षा अथवा आत्मनिर्भरता के लिए नए नए अभियान चलाये गये । उनको हर तरह से सरकार मदद दे रही है। आए दिन स्कूल कालेजों में ल़डकियों की उपस्थिति को बढ़ाने के लिए नयी नयी योजनायें चलाई जा रही है कभी शौचालयों की व्यवस्था। कभी किताबों के लिए राशि तो कभी पोशाक के लिए। कहीं साईकल तो कहीं लैपटॉप दिया जा रहा है। जिससे ल़डकियों को पढ़ा लिखा कर आत्मनिर्भर बनाया जा सके। 

इतनी सुविधाओं के कारण बेटी के जन्म पर अब माता पिता दुःखी न होकर सुकून अनुभव करते हैं वह जानते हैं कि बेटी होगी तो माता-पिता के साथ सरकार भी उनके जीवन और भविष्य को संवारने में अपना योगदान दे रही है। आज बेटियां भी स्वयं को सुरक्षित अनुभव कर रही है। सरकार का य़ह कदम सराहनीय है।


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