भाजपा की एक और हार

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भाजपा की एक और हार
भाजपा की एक और हार

झारखण्ड विधानसभा में भाजपा के हार के वैसे तो कई कारण बताये जा रहे हैं। कहीं महंगाई तो कहीं भ्रष्टाचार तो कहीं उम्मीदवार सही नहीं । लेकिन लगातार हो रही हार पर भाजपा को पुनः विचार करने अथवा मतदाताओं की मानसिकता को समझने की आवश्यकता है। 

अधिकांश राज्यों में मतदाता ग़रीबी रेखा के नीचे होते हैं। उनकी सोच प्याज लहसून से ऊपर नहीं उठती है। अथवा यहां पर अधिकतर लोगों की सोच दूसरों पर निर्भर करती है, लोग क्या कहते हैं। अथवा कैसा प्रलोभन देते हैं। 

आज हमारे देश के अधिकांश क्षेत्रों मे CAB (नागरिकता संशोधन अधिनियम) के विरोध में जो आंदोलन फैला हुआ है सरकार को उसे ध्यान से देखने अथवा समझने की आवश्यकता है। इस आंदोलन में अधिकांश लोग गरीब और अशिक्षित हैं, जो CAB से दूर दूर तक कोई वास्ता ही नहीं रखते अथवा उन्हें कोई आवश्यकता भी नहीं है इस जानकारी की। बस दूसरों की बातों में अथवा अपने मनोरंजन हेतु ये लोग कहीं बन्द तो कहीं आंदोलन में शामिल हो जाते हैं।

इनकी असली मानसिकता है बस हो हल्ला करना तोड़ फोड़ करना लोगो को परेशान करना सरकारी चीजों को बर्बाद करना। अथवा सबसे बड़ी बात इन कामों को करने के बदले उन्हें पैसे भी मिल रहे हों तो क्या कहना।

आज CAB को जितनी जागरूकता से सरकार, सोशल मीडिया, न्युज नेटवर्क लोगों को बता रही है उतना में तो पूरी दुनिया जागरूक हो जाये। लेकिन य़ह नादान लोग (आंदोलन कर्ता) जहां के वहीं रुके है न सुनेंगे और न ही समझेंगे।

अब बात आती है विधानसभा चुनाव और लोक सभा चुनाव के अन्तर की। शिक्षित लोगों के लिए दोनों चुनावों में कोई अन्तर नहीं है य़ह लोग निजी फायदों से ऊपर की सोचते हैं। ऐसे लोग सर्वप्रथम देश का हीत देखते हैं। य़ह लोग देश के विकास को अपना विकास समझते हैं। वहीं दूसरी ओर गरीब और अशिक्षित वर्ग के लोग आते हैं इन लोगों का अपना निजी हित पहले आता हैं और इसे गलत भी नहीं कहा जा सकता। क्यूंकि जब पेट खाली तन नंगी और सर पर छत नहीं होती है। तो उस समय व्यक्ति अपनी अथवा अपनो की निर्मम अवस्था को देखता है, देश हित को नहीं। ऐसे समय में जो भी लोग इनकी स्थिति से जुड़ी सम्वेदनाऐं व्यक्त करता है य़ह लोग उनको ही अपना शुभचिंतक समझते हैं। ऐसे लोगों से अपनी बात मनवाना उतना ही आसान होता है जितना आसान आज हमारे समाज में आंदोलन हो गया है। बस किसी दल को दूसरे दल की कोई बात पसंद नहीं आनी चाहिए तब देखिए यह लोग किस तरह देश वाशियों को आपस में उलझा के अपना निजी स्वार्थ साधते हैं।

आज हमारे समाज को एक ईमानदार नेतृत्त्व वाली सरकार की आवश्यकता है। जो बीजेपी दे सकती है बस इस सरकार को भी अपना दोनों चुनाव लड़ने का तरीका बदलना होगा। लोकसभा चुनाव देश हित के अनुकूल होनी चाहिए जिससे देश को विकास की गति मिले। वहीं विधानसभा चुनाव में राज्य अथवा उसके गांव, गांव के लोगों की स्थिति पर तब्बजु देने की ज़रूरत है ऐसे जगहों पर  राम मन्दिर या आर्टिकल 370 काम नहीं आएगा, वहां मिशन चंद्र यान भी विकास की गति नहीं पहुंचाएगा। ऐसे समय में गरीबों के लिए रोटी कपड़ा मकान बहु बेटियों की सुरक्षा के वायदे वाला फॉर्मूला ही काम आएगा।

जब लागी पेट में आग, मन कैसे हरसाए।
बच्चे नंगे घूम रहे, मन को कौन बुझाये।
पेट भरे जब तन ढके, तब ज्ञान की बात समझाये। 
क्या देश क्या समाज, जो समझे हम उसको अपनाए।

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