भारत – पाकिस्तान के बीच देवदूत नवजोत सिंह सिध्दू ?

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भारत - पाकिस्तान के बीच देवदूत नवजोत सिंह सिध्दू ?
भारत - पाकिस्तान के बीच देवदूत नवजोत सिंह सिध्दू ?

दिसम्बर 2015 से भारत और उसके पड़ोसी पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं हो रही है | पकिस्तान लगातार आतंकी घुसपैठियों को भारत में प्रवेश करवा रहा है | वो यहाँ की शान्ति व्यवस्था को भंग कर अराजकता की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रहा है | यह अलग बात है कि हमारे जांबाज़ सैनिक द्वारा घुसपैठिये आतंकी मारे जाते हैं |

अभी हाल के चुनाव से पाकिस्तान में प्रधानमंत्री बदल गये | इमरान खान वहाँ के नये प्रधानमंत्री बने हैं | इमरान खान एक क्रिकेटर रह चुके हैं | एक क्रिकेटर को किसी देश का प्रधानमंत्री बनना उस क्रिकेटर की बड़ी उपलब्धि मानी जायेगी और शायद यह विश्व स्तर पर पहला उदाहरण है कि कोई क्रिकेटर राजनीति में इतना ऊँचा गया हो | हमारे देश में भी नवजोत सिंह सिध्दू एक क्रिकेटर रह चुके हैं और वो अपनी पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं | संयोग की बात है कि इमरान खान को मित्र सिध्दू की याद आयी | इस कारण से इमरान खान ने सिध्दू को अपने प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में शरीक होने के लिये पाकिस्तान आने का न्योता दिया | एक क्रिकेटर अपने साथी क्रिकेटर को सर्वोच्च पद के शपथ ग्रहण समारोह के अवसर पर शरीक होने से अपने को रोक नहीं पाये | सिध्दू ने इस निमंत्रण से अपने को सम्मानित समझा | वे आगे पीछे सोच कर पाकिस्तान गये और इमरान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए | सिध्दू को यह समझना चाहिये था कि वो भारत गणराज्य के एक राज्य के कैबिनेट मंत्री हैं |

अब यह समझना होगा कि इमरान और सिध्दू दोनों ही क्रिकेटर रह चुके हैं | आज की तारीख में दोनों राजनीतिज्ञ हो गये | इमरान पाकिस्तान के सर्वोच्च पद पर पहुँचे तो सिध्दू भारत के राज्य स्तर पर | राजनीति में क्रिकेट की तकनीकी का इस्तेमाल इमरान ने कैसे किया इसका लाभ लेने की इच्छा से सिध्दू पाकिस्तान गये | पाकिस्तान के राष्ट्रीय मेहमान के रूप में इनका स्वागत हुआ और वे धन्य हो गये | खुशी में शेरो-शायरी वहाँ के लोगों को सुनाने लगे | खुशी में सिध्दू ने पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष क़मर बजवा से दो बार गले लगे और हँसते हुए उनसे कुछ गुफ्तगू भी की | समारोह में इनके बैठने की जगह पाक अधिकृत कश्मीर के राष्ट्रपति मसूद खान के साथ थी | सिध्दू ने मसूद खान से हाथ भी मिलाया | भारत पाक अधिकृत कश्मीर की मान्यता नहीं देता है और न ही भारत के किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि को वहाँ के राष्ट्रपति के साथ बातचीत की अनुमति देता है | पूरा कश्मीर भारत का हिस्सा है | सिध्दू ने उन सारी शर्तों को भूला दिया |

शंका तो यह भी व्यक्त की जा रही है कि इमरान के शपथ ग्रहण समारोह से ठीक एक दिन पहले 17-08-2018 को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अंत्येष्टि में पाकिस्तानी प्रतिनिधि का सम्मिलित होना कहीं इमरान और सिध्दू की कूटनीति का कोई हिस्सा तो नहीं | उधर 18-08-2018 को सिध्दू इमरान के शपथ ग्रहण समारोह में दावत खा रहे थे इधर उसी दिन पाकिस्तान ने आतंकियों का एक दल भारत भेजने का प्रयास किया मगर भारत के सैनिकों ने तीन आतंकियों को मार गिराया | इस तरह पकिस्तान का यह प्रयास सफल नहीं हो सका |

खैर अब जो हुआ सो हुआ देखना है सिध्दू पाकिस्तान से क्या लेकर आते हैं भारतीयों के लिये | भारत से पाकिस्तान जाकर सिध्दू ने वहाँ के लोगों को तो खुश कर दिया और खुब वाह-वाही लूटा | भारतीयों को उनसे अपेक्षा है कि भारत लौटकर वो भारतीयों को भी खुश करें ताकि दोनों ही देश के बीच की कटुता कम हो सके | वो जिस मंशा से पाकिस्तान गये थे वो मंशा भी उनकी पूरी हो | सिध्दू अगर इसमें असफल रहे तो फिर “धोबी का गधा न घर का न घाट का” वाली कहावत चरितार्थ हो जायेगी | यदि गधे वाली हालत बनते हैं तो “कश्मीर क्या पंजाब भी पाकिस्तान को दे दिया जाय” सिध्दू को कहना पड़ेगा तभी इमरान से उनकी दोस्ती बरक़रार रहेगी | बस हम भारतीयों को अब इंतज़ार है सिध्दू के देवदूत बनकर वापस लौटने की |


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