बुधिजीवी और सब असफल – आम चुनाव २०१९

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बुधिजीवी और सब असफल – आम चुनाव २०१९
बुधिजीवी और सब असफल – आम चुनाव २०१९

आम चुनाव २०१९ अब अपने अंतिम दौर में आ गया है | १९ मई को अंतिम दौर का चुनाव होना है |  बुधिजीबियों ने चुनाव आयोग की अधिसूचना आने से बहुत पहले हीं चुनाव के किये वैचारिक मुद्दे तैयार करने प्रारम्भ कर दिये थे | पहली समस्या जो जनता के सामने आई वो था “असहिष्णुता” | पूरे देश में इस पर काफी हाय तौवा मच गया | बड़े बड़े विद्वान, लेखक, कलाकार, एवं हस्तियों में से कुछ लोग जनता के बीच बढ़ती असहिष्णुता से बहुत क्रुद्ध हो गये | विरोध स्वरुप उन्होंने अपने अपने राष्ट्रीय सम्मानों को, जो उन्हें अपने अपने क्षेत्रों में किये गये विशिष्ट उपलव्धियों के लिये भारत के राष्ट्रपति द्वारा अलंकृत समारोह में प्राप्त हुआ था, वापस करना शुरू कर दिये | जबकि वास्तविकता का दूर दूर तक इससे कोई रिश्ता नहीं था | धीरे धीरे यह मुद्दा स्वतः समाप्त हो गया | किसी के द्वारा अपने पुरस्कार वापसी की जानकारी नहीं मिली | दूसरा प्रकरण उठ गया “मोब लिंचिंग” का | इस विषय को धर्मनिष्पक्षता पर गहरी चोट बता कर पूरे देश में बवाल मच गया | सत्तारूढ़ दल को शक के दायरे में ला दिया गया और उस पर संविधान संशोधन करने  की  साजिश का आरोप लगाकर हर फ्रंट पर बहस छिड़ गई | लेकिन यह प्रकरण भी स्वतः समाप्त हो गया | देश के प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की एक घटना ने तो देश की रक्षा सुरक्षा एवं संविधान की मर्यादा को तार तार कर दिया | विश्वविद्यालय छात्रों के एक समूह ने अपने एक कार्यक्रम के दौरान “भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह टुकडे होंगे टुकड़े होंगे , क्या चाहिये – आजादी आजादी , के साथ पाकिस्तान जिंदाबाद” का नारा देकर देश को सकते में ला कर खड़ा कर दिया | सत्तारूढ़ दल के लोगों ने इस का विरोध किया | विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जब उन छात्रों पर कारवाई शुरू हुई तो मुख्य विपक्षी दल के साथ अन्य विपक्षी दलों ने भी छात्रों के बचाव में उतर आये | सरकार से लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को ही दोषी ठहराने लगे | सत्तारूढ़ दल पर अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश लगाने का साजिश मढ़ दिया | पूरा मामला न्यायालय में है |

एक घटना ने तो सबको अचंभित कर दिया | १२ जनवरी २०१८ को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने अपनी और कोर्ट की सारी मर्यादाओं को ताक पर रखकर कोर्ट परिसर में हीं एक प्रेस कान्फ्रेंस किया | उन्होंने सीधे सीधे मुख्य न्यायाधीश श्री दीपक मिश्रा की कार्यशैली पर अंगुली उठा दिया और लोकतंत्र पर  मंडराते खतरों से एहसास कराया | लोगों से लोकतंत्र को बचाने का आग्रह किया | भारत के न्यायपालिका के इतिहास का यह दिन काला दिवस कहलायेगा | न्यायपालिका से जुड़ी कहानी यहीं खत्म नहीं होती है | सुप्रीम कोर्ट की विश्वसनीयता भी संदेह के घेरे में आ गई | प्रमुख विपक्षी दल ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री दीपक मिश्रा पर संसद में महाअभियोग लगाने का प्रस्ताव लाने पर विचार कर लिया | शर्म आनी चाहिए | स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली वार वैज्ञानिकों का एक समूह अपने प्रयोगशाला से बाहर निकला और आमजनों से आग्रह किया की भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को बचायें और संविधान की रक्षा करें | सोच समझ कर वोट करें | इस रास्ते पर कुछ अवकाशप्राप्त सैनिक भी चल पड़े | सैकड़ों सिनेमा संसार की हस्तियां भी वैचारिक जाल में फँसकर तत्कालीन सामाजिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों से घबड़ा गये और इन विषयों पर सत्तारूढ़ दल के रवैये पर काफी नाराजगी जतायी एवं इन समस्याओं के लिये उन्हीं को जिम्मेदार ठहरा दिया | | कुछ तो अपने बच्चों को देश से बाहर बसाने की तैयारी में जुट गए उन्होंने सत्तारूढ़ दल के विरोधियों को अपना मत देने की अपील की

किसी व्यक्ति या संस्थान की बदनामी या सम्मान उसके  द्वारा निर्वहण किये गये या किये जाने वाले दायित्वों की निष्पक्षता पूर्ण विश्लेषण से प्राप्त होता है | इस चुनाव के दौरान कई समस्यायें आती गई और जाती गई | न्यायिक प्रक्रिया से उत्पन्न भय ने सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश माननीय रंजन गोगोई को एक महिला से बलात्कार के झूठे मामले में घसीट कर मानवता एवं न्यायालय को दुबारा शर्मसार कर दिया | इस चुनाव में राष्ट्रपति भी नहीं बच सके | गूंगा बहरा दलित आदि विशेषणों से उन्हें भी सम्मानित कर दिया गया | भारत के एक भी संस्थान नहीं बचे जिसे घसीटा नहीं गया हो | तथाकथित बुधिजिवियों ने अपने दूषित विचारों से कुछ लोगों को फांसने में सफल तो हुए मगर सामाजिक एवं राजनीतिक व्यवस्था में भूचाल लाने की उनकी मंशा असफल हो गई | लानत है | आम जनता को धन्यवाद् , जिन्होंने उनकी सारी योजनाओं को बहुत जल्द हीं परख कर उन पर पानी फेर दिया |

इस चुनाव के लिये जनता ने मात्र एक हीं मुद्दा बनाया – क्या नरेन्द्र मोदी को रहना चाहिए | मतदाताओं ने जो मत डाला या डालने जा रहें हैं वो सिर्फ मोदी के पक्ष में या मोदी के विरोध में | सत्ता या विपक्ष के सभी दलों ने इसी आधार पर अपनी रणनीति तैयार की | इस वार भारत की जनता ने सभी राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणा पत्रों को चूल्हे में जला डाला | चुनाव का केंद्र बिन्दु मोदी को रखा गया | चुनाव से एक हीं निर्णय होने जा रहा है –  “मोदी सही थे सही रहेंगे” ? एक अनोखा चुनाव | वाह मोदी जी ! महान हैं |

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