चुनावों में फंसी सुरक्षा

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चुनावों में फंसी सुरक्षा
चुनावों में फंसी सुरक्षा

आज बीसवीं शताब्दी  में आकर भी हम सही गलत का भेदभाव नहीं समझ पाते हैं। आज हमारे देश के तकरीबन 60 से 70 फीसदी लोग साक्षर हैं। लोगों में जागरूकता है। हर कोई अपना सही गलत समझ सकते हैं। फिर भी न जाने यह नेता लोग हम आम इंसान को इतना बेवकूफ़ क्यूँ समझते हैं।

जितना हमने नेताओं को और आम जनता को देखा और जाना है इससे तो यही पता चलता है कि इंसान दो प्रकार के होते हैं – पहला वह इंसान जो हर बात पर अपना विचार रख सकता है क्या करने से देश कि उन्नति होगी। हमारा क्या योगदान होना चाहिए अपने देश के प्रति। अपना स्वार्थ बाद में देश हित सर्व प्रथम। यही उनका सोच और कर्म होता है। खैर इस तरह के लोग अब हमारे देश में गिने चुने ही बाकी है। दूसरा वह लोग जो खुद से तो कुछ सोचते नहीं हैं और दूसरों के कामों का हिसाब करने में और उसके अंदर खामियाँ निकालने में सारी जिंदगी बिता देते हैं। यह लोग अपनी पूरी जिंदगी यही सोचते रहते हैं कि किस तरह दूसरों के कामों में नुक्स निकाला जाए। उस पर कौन सा तोहमत लगाया जाय जिससे उसे उसकी जगह से नीचे गिराया जा सके। 

आज हम सारी दुनिया में अपना एक स्थान बनाएं है। हर कोई भारत को एक सम्मान भरी नजरों से देखता है। यहाँ के लोगों के काम, धर्म और निष्ठा को अत्यंत आदर के साथ देखा जाता है। हमारे देवी देवताओं की उपासना पूरी दुनिया में की जाती है। यहां के लोगों की इमानदारी और देश प्रेम के चर्चे पूरे विश्व में फैली हुई है। 

अगर आज हमे कहीं पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है तो वह है हमारी राजनीति। मैं राजनीति को गलत नहीं कहती क्यूंकि यह तो हमारे विकास की नीव है। इसी के ऊपर तो हमारे देश की आन बान और शान है। मैं उन तथाकथित बुद्धि जीवियों की बात कर रही हूँ जो सिर्फ़ जरा सी स्वार्थ के लिए न अपने देश की सोचते हैं और न ही इनको अपने देश की इज्जत की पड़ी है। यह लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए किसी भी क्षेत्र को अपना निशाना बना सकते हैं। यह ऐसे लोग हैं जो देश की सुरक्षा को भी दाव पर लगा सकते हैं। इन जैसे लोगों को सिर्फ अपने स्वार्थ और सत्ता से मतलब है। बदले में किसी भी चीज की कुर्बानी यह लोग दे सकते हैं। 

अब आप हमारे विपक्ष की ही बात ले लीजिये यह लोग किन किन बातों को अपना मुद्दा बनाये हुये हैं। रक्षा क्षेत्र यह हमारे देश की ताकत है इसमें इस्तेमाल होने वाले अस्त्र-शस्त्र हमारी जरुरत है। रक्षा से जुड़ी जल, थल और नभ तीनों ही क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण हैं। जो भी सत्ता में रहेगा वो इन क्षेत्रों में लिये गये सारे फैसलों के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार होगा यह सभी जानते हैं। फिर भी न जाने यह नेता सब क्यूँ ये भूल जाते हैं कि यह क्षेत्र चुनावों के लिए नहीं है। यह अत्‍याधिक संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र है इसको अपने स्वार्थ के लिए कभी रफेल को लेकर तो कभी हमारे वीर जवानों को लेकर कभी सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर कोई न कोई मुद्दा बना ही लेते हैं। अब तो लगता है विपक्ष के पास रक्षा क्षेत्र को छोड़ कर दूसरा कोई मुद्दा ही नहीं है। हम यह नहीं कहते कि आप गलतियां मत बताओ लेकिन कम से कम बेतुके सबूत दिखा कर हमें पूरी दुनिया के सामने हंसी का पात्र तो नहीं बनाए। लोग हमारे राजनीति क्षेत्र को घृणा की नजरों से तो न देखे।


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