कांग्रेस सोच में, भाजपा तैयारी में!

0
13
कांग्रेस सोच में, भाजपा तैयारी में!
कांग्रेस सोच में, भाजपा तैयारी में!

भारत विभिन्न धर्म, जाति, समुदाय, भाषाओँ वाला एक विशाल देश है | यहाँ कहीं न कहीं कोई विवाद होना अस्वभाविक नहीं कहा जा सकता | दुनियाँ के हर देशों में प्रायः ऐसी घटनाएँ होती रहती है | मगर भारत में छोटी से छोटी और व्यक्तिगत स्तर पर घटित होने वाली घटनाओं को महिमामंडित करने में यहाँ के नेतागण या उनकी पार्टियां पीछे रहना नहीं चाहती है | चुनाव कोई भी हो राजनीतिक पार्टियां इसे अपना चुनावी मुद्दा बना लेती है | इस तरह चुनाव जीत लेना पहले आसान था लेकिन जनता अब समझदार बन चुकी है | विगत कई चुनावों से ऐसा ट्रेंड देखने को मिलता है | चुनाव चाहे राष्ट्रीय स्तर का हो या राज्य स्तर का जनता समझ गयी है किसी भी सामूहिक एवं गंभीर समस्या का समाधान स्थायी सरकार ही कर सकती है| देश का विकास स्थायी सरकार में ही संभव है | इसीलिए वो एकमत से एक ही पार्टी को अपना मत देती है | व्यक्तिगत स्तर का विवाद हो, या जाति धर्म का विवाद हो या क्षेत्रीय स्तर का विवाद हो सबों को वो ख़ारिज कर देती है |

केंद्र की सरकार के गठन के लिए २०१९ में लोकसभा का चुनाव होने वाला है | नेताओं को जनता के बीच जाकर समझाना है कि वे और उनकी पार्टी केंद्र में स्थायी सरकार देगी | साथ साथ यह भी दिखाना होगा कि उनकी पार्टी ने विगत ५ सालों में उनके लिए क्या क्या किया और उसका लाभ उनको क्या मिला है या किस स्तर तक वो लाभान्वित हुए हैं तथा इस चुनाव के बाद वो उनके लिए क्या क्या करेंगे | क्षेत्र के साथ साथ देश का विकास कैसे होगा |

केंद में भाजपा की सरकार ने अन्य विकासकारी कार्यों के अलावे कुछ ऐसा काम किया है जो स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद न कभी सोचा गया या कभी सोचा भी गया तो वो जनता के समक्ष नहीं आ सका | महिलाओं की रक्षा एवं सुरक्षा के लिए तीन तलाक का बील सदन में पेश किया गया | इसे उच्चतम न्यायालय की सहमती थी | सर्वदलीय बैठक के आलोक में लोकसभा द्वारा इस बिल को पास किया गया परन्तु राज्यसभा में जाकर कांग्रेस एवं उनके सहयोगी दलों ने बिल का विरोध कर दिया जिससे वो कानून में तब्दील नहीं हो सका|

भाजपा की सरकार ने श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागु किया | आम नागरिक को GST की समझ नहीं भी हो सकता है लकिन यह तो सच है की GST के चलते अब उन्हें रिटेल दाम पर कोई सामान मिलती है चाहे गाँव हो अथवा शहर, सब जगह एक ही दाम | देश में इस तरह की व्यवस्था पहली बार लागु किया गया है “एक देश एक कर” (Tax) | इसके लागू होने से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है |

नोटबंदी जैसा कठिन निर्णय लेने में भी केंद्र की मोदी सरकार नहीं हिचकिचायी | इसका असर कुछ समय के लिए हुआ परन्तु थोड़े ही समय के भीतर सब ठीक-ठाक हो गया | घरों में जमा धनराशि बैंकों के माध्यम से सरकारी खजाने में पहुँच गया | सरकारी खजाने में अधिक धनराशि जमा हुई | सरकार उस पैसे से जनता के लाभार्थ एवं देश की सुरक्षा के लिए उपयोग कर रही है | पहले रोड ३ किलोमीटर प्रतिदिन के हिसाब से बन रहा था अब ४० किलोमीटर प्रतिदिन की दर से बन रहा है | गाँव-गाँव, घर-घर बिजली पहुँच गयी है | गरीबों के लिए आवास की व्यवस्था की गयी है | गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों के घर गैस चूल्हे जलते हैं और ५ लाख रुपये तक का चिकित्सा बीमा की व्यवस्था की गयी है | किसानों को उनके फसलों का मूल्य बढ़ाकर डेढ़ गुणा कर दिया गया है |

बेरोजगारी दूर करने के लिये मोदी सरकार ने कई कदम उठाये हैं | “मेक इन इंडिया”, “कौशल विकास योजना”, आदि कई कार्यक्रम इसके अन्तर्गत आते हैं | सरकारी नौकरियों में भरती के लये विज्ञापन आ रहे हैं | इसके साथ यह भी सच है की सबों को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती है | “मेक इन इंडिया” के तहत विदेशी निवेश बहुत बढ़ गया है जिसमें भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में नौकरियाँ उपलब्ध है और उपलब्ध होती रहेगी | “कौशल विकास योजना” के अन्तर्गत काफी लोग लाभान्वित हुए हैं | स्वरोजगार योगना बहुत सफल रही है |

विदेशों में भारत की साख बढ़ी है | पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गया है, चीन भी चिंतित है | सुरक्षा सम्बन्धी हथियार एवं सामान अब देश में बनना शुरू हो गया है | सुरक्षा व्यवस्था में काफी प्रगति हुई है | भारत अब दुनिया के दूसरे देशों में भी अपना निवेश कर रही है | सफल विदेश नीति का परिणाम यह है की दुनिया के दो देश जो एक दूसरे के जानी दुश्मन हैं, भारत के अच्छे मित्र हैं |

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के उलट मोदी सरकार की कैबिनेट ने एस० सी०, एस० टी० के हित में, ड्राफ्ट बिल को मार्च २०१८ से पूर्व की स्थिति में लाकर स्वीकृत किया है |

भाजपा सरकार द्वारा लाभकारी योजनाओं से जनता में सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है | विपक्षी दल खासकर कांग्रेस इससे काफी परेशान हो रही है | उसे समझ नहीं आ रहा है की इसका प्रतिकार कैसे किया जाये | इसको लेकर वो क्षेत्रीय दलों से गठबंधन कर रही है | लेकिन इसके लिये कांग्रेस को यह समझना होगा की भारत में २९ राज्य हैं और लगभग हर राज्यों में एक-दो-तीन तीन क्षेत्रीय पार्टियां हैं हर राज्य का अपना अपना क्षेत्रीय मुद्दा होता है | २०१९ का चुनाव राज्यों में सरकार गठन के लिए नहीं है | कांग्रेस को विभिन्न क्षेत्रीय दलों की क्षेत्रीय समस्या पर विचार कर उनमें राष्ट्रीय स्तर की समस्याओं की सूची तैयार करना होगा और गठबंधन में सम्मिलित दलों की सहमती से २०१९ का चुनावी एजेंडा तैयार करना होगा | कांग्रेस के नेता एवं नेतृत्व पर भी सवाल खड़े होते रहते हैं | इससे अपने अपनों को बचते बचाते बड़ी सावधानी से गठबंधन चलाना होगा | सिर्फ चुनाव तक ही गठबंधन सीमित नहीं है, चुनाव के बाद सरकार भी गठबंधन का होगा | सरकार गठन में भी क्षेत्रीय भावनाओं का दबदबा बना रहेगा |

कांग्रेस अपनी नीति से भटकती दिखाई दे रही है | पुराना कांग्रेस (इन्दिरा  कांग्रेस) आज राहुल कांग्रेस बन गया है | राहुल गाँधी आज मंदिरों में माथा टेकते नजर आ रहे हैं | लोग इसे दिखावा मानते हैं | वास्तविकता में वो मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीती कर रहे हैं | नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजनशिप (NRC) के मुद्दे पर इन्दिरा कांग्रेस और राहुल कांग्रेस के विचार अलग हो गये हैं | इन्दिरा गाँधी ने १९७१ में पूर्वी बंगाल के युद्ध के दौरान घुसपैठियों को आने से नहीं रोका था लकिन उन्होंने साफ़-साफ़ कहा था की बांग्लादेश में स्थिति सामान्य होने पर घुसपैठियों को वापस जाना पड़ेगा | पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के समय १९८५ में उसपर अमल करने के लिए असम अकॉर्ड तैयार हुआ था | आज राहुल कांग्रेस उसे मानने को तैयार नहीं है जबकि उच्चतम न्यायालय ने भी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने के मुद्दे पर अपनी मुहर लगा दी है | घुसपैठियों को वापस जाना देशहित में है | बाबजूद इसके राहुल कांग्रेस इसका विरोध कर रहे हैं | ममता बनर्जी भी इस मुद्दे पर राहुल कांग्रेस के साथ खड़ी है | ममता बनर्जी ने तो यहाँ तक कह डाला की घुसपैठियों को वापस भेजने के मुद्दे पर देश में गृह युद्ध का खतरा है | उनका यह बयान सिर्फ विरोध ही नहीं दर्शाता है बल्कि शत प्रतिशत धमकी है | ये धमकी वो किसे दे रही है वो तो खुद एक प्रान्त के संवेधानिक प्रशासनिक प्रधान है उनका इस तरह का बयान देना देश को गृह युद्ध की तरफ ले जाना है | राहुल कांग्रेस अगर इन बयाओं पर चुप्पी साधती है तो यह समझा जाएगा की राहुल कांग्रेस भी गृह युद्ध फ़ैलाने की आशंका को बढ़ावा दे रही है | राहुल कांग्रेस को यहाँ यह ध्यान देना होगा की ममता की पार्टी एक क्षेत्रीय पार्टी है, पश्चिम बंगाल के बाहर उसका कोई अस्तित्व नहीं है |

भाजपा NRC के मुद्दों को २०१९ के चुनाव में किस तरह इस्तेमाल करेगी यह तो अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन उच्चतम न्यायालय के आदेश का अनुपालन करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है | घुसपैठिये की समस्या असम के लिए बहुत पुरानी और गंभीर समस्या है | उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालनार्थ भारत सरकार को घुसपैठियों की पहचान कर वापस भेजना देशहित में है | इसे वोट की राजनीति नहीं कहा जा सकता |

कांग्रेस को NRC का विरोध, देश की जनता में कांग्रेस की छवि देश के प्रति निष्ठावान स्थापित नहीं करती है | २०१९ लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका जवाब जनता को देना पड़ेगा |

वर्तमान परिपेक्ष में भाजपा २०१९ चुनाव के लिए अपना शहर जमीन तलाश ली है और कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों अभी टटोलने में लगी है ऐसा जान पड़ता है |  


Follow @_India71

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here