कोरोना की वास्तविकता क्या है?

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कोरोना की वास्तविकता क्या है?
कोरोना की वास्तविकता क्या है?

ये कोरोना महामारी का काल है | इसकी कोई दवा नहीं है | विशेषज्ञों की राय है कि लोग घर में हीं रहें | ना किसी से मिलें और दूसरे को भी मिलने देने में परहेज करें क्योंकि यह महामारी एक दुसरे के संपर्क में आने से ही फैलता है | लोगों के धैर्य और आत्मबल की परीक्षा की घड़ी है | ऐसे बैक्टेरिया या वायरस से उत्पन्न होने वाले कई रोग हैं जो संपर्क में आने के बाद हीं फैलते हैं परन्तु कोरोना वायरस के फैलने का तरीका/अंदाज कुछ ऐसा है कि इससे संक्रमित आदमी को तब पता चलता है जब उसके बचने की संभावना 50/50 होती है |

इस वायरस को फ़ैलाने के लिये चीन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है | चीन ने इस वायरस के बारे में दुनिया के सामने जब उजागर किया तबतक तो वहाँ हजारों लोगों की मृत्यु हो चुकी थी और यह पूरे विश्व में फ़ैल चुका था| एक लाख से अधिक लोग इस वायरस से मर चुके हैं | भारत में मरने वाले की संख्याँ 270 के पार चली गई है और कुल संक्रकित लोगो की संख्याँ 8440 को पार कर गई है| अभी तक 200 से अधिक देश इस वायरस से प्रभावित हैं |

सारे सार्क देश भारत पर निर्भर है | इन देशों की मदद के लिये भारत ने 10 मिलियन डॉलर देकर एक खाता खोल दिया है | दुनिया के विकसित देश अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, स्पेन, जर्मनी जैसे विकसित देश वेबश हो गये हैं | सबकी निगाहें भारत पर है | 130 करोड़ जनसंख्या वाले इस देश में संक्रमण फैलने की दर विकसित देशों की तुलना में बहुत हीं कम है | मात्र  30 करोड़ की आवादी वाले अमेरिका में संक्रमित लोगों की संख्याँ 5 लाख 30 हजार से ऊपर हो गई है जबकि भारत में 8 हजार से कुछ अधिक है |

संक्रमित लोगों को के लिये जो दवाईयां भारत उपयोग किया जा रहा है उसकी प्रशंसा सारे विश्व में हो रहा है | सर्व संपन्न विकसित देश अमेरिका से लेकर अन्य देश अब भारत से दवा की मांग कर रहे हैं | ऐसे 45 देशों को भारत उनकी मांग के अनुरूप हैय्द्रोक्सीक्लोरोकुँनिन दवा का निर्यात कर चुका है | इससे भारत की प्रतिष्ठा बढ़ गई है |

कोरोना वायरस के इस खतरे से विश्व अभी तड़प रहा है वहीँ चीन ने इस वायरस के नये स्वरुप का भी संकेत दिया है जो लोगों में उत्पन्न इस वायरस के वर्तमान लक्षण से परे हैं | इससे संक्रमित लोगों में सर्दी, खांसी बुखार के लक्षण नहीं होते हैं | यह संयोग की बात है कि विश्व के सभी देश लौकडाउन की स्थिति में हैं इसलिए कोरोना वायरस का यह नया स्वरुप चीन तक हीं सीमित है | चीन एवं उसके पड़ोसी दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस से संक्रमित लोग अस्पताल से संक्रमणमुक्त हो जाने के बाद फिर से संक्रमित हो रहे है | चीन का वुहान शहर 76 दिनों के लौकडाउन के बाद संक्रमण मुक्त घोषित कर दिया गया और उस के लगभग 15 दिनों बाद वहीँ 13.04.2020 तक कोरोना से पीड़ित मरीजों की संख्या एक हजार के पार पहुँच गया |

विश्व के कुछ लोग अब इस महामारी को दैविक प्रकोप मानने लगे हैं | हम भारतीयों के जीवन में अध्यात्म का बड़ा महत्व है | हमारी जीवन शैली को अध्यात्म बहुत हीं विनियमित करता है | हाँ कभी कभी हम अंधविश्वास में भी फँस जाते हैं | परन्तु इस महामारी के फैलाव का असर हम जीवन से जुड़े अन्य साधनों पर महसूस कर रहे हैं | वायु प्रदूषण घट गये हैं| नदियों का जल साफ और स्वच्छ हो गये हैं | यमुना का पानी इतना साफ़ हो गया है की उसमें मछलियाँ तैरती नजर आती हैं | गंगा का पानी भी इतना साफ हो गया जिसे दस वर्ष के काफी मशक्कत के बाद भी नहीं किया जा सका था | जंगली जानवर स्वछन्द विचरित करते नजर आ रहे हैं | इन घटनाओं पर यदि गंभीरता से विचार किया जाय तो स्पष्ट दिखता है कि एक तरफ लोगों की जाने जा रही है तो दूसरी तरफ जीवन के विकास एवं रक्षार्थ उपलब्ध प्राकृतिक साधनों का परिष्कृतिकरण स्वत: होता जा रहा है | यह जीवन के एक नये रूप की संभावना का आभास देता है | इस तरह इन दोनों घटनाओं को एक साथ होना एक सोच की ओर ले जाता है कि प्रकृति अपनी ओर से जीवन को संतुलित करने की दिशा में आगे बढ़ गई है | कोरोना एक मानवीय भूल का फल है या प्रकृति का दंड |

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