ईवीएम का विरोध या जनता को गुमराह

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ईवीएम का विरोध या जनता को गुमराह
ईवीएम का विरोध या जनता को गुमराह

राजनीतिक दलों ने ईवीएम का विरोध करना अपना एक जुमला बना रखा है। चाहे चुनाव लोकसभा का हो या विधानसभा का चाहे जीत हो या हार कुछ तथाकथित दलों ने यह तय कर लिया है कि वह ईवीएम का विरोध करते ही रहेंगे। आजकल तो इन नेताओं ने भी खोज बीन शुरू कर दिया है कि किस देश में ईवीएम का प्रयोग किया जाता है अथवा किस देश में इतनी उन्नति के बावजूद आज भी बैलेट पेपर से ही चुनाव कराया जाता है। इन बातों पर विचार करिये लेकिन! कम से कम उन देशों की आबादी भी तो देख लीजिए। उन देशों की आबादी 10 करोड़, 12 करोड़ अथवा अधिक से अधिक 20 करोड़ यही न है। हमारी आबादी 135 करोड़। क्या जनसंख्या के आधार पर हम किसी भी देश के साथ बराबरी कर सकते हैं नहीं। फिर क्युं हम देश की तरक्की में रुकावटें पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं?

जब तक ईवीएम का मुद्दा निजी स्वार्थ हेतु देश के अंदर ही उठाया जाता था तबतक ठीक था। लेकिन आज जो लंदन में हुआ वह सही नहीं था। वहां एक तथाकथित तकनीशियन द्वारा ईवीएम को हैक करने की बात अथवा एक स्‍वर्गीय वरिष्ठ नेता के नाम पर पूरा तमाशा रचा गया। जिसमें कांग्रेस के नेता का शामिल होना अत्यधिक शर्म की बात है। इससे सिर्फ किसी दल की ही बेज्जती नहीं होती है। बल्कि चुनाव आयोग भी कटघरे में खड़ा कर दी जाती है। इतना ही नहीं पूरे देश को भी शर्मसार करने की कोशिश की गई है। शर्म की बात यह भी है कि जिस दिन इस हैकर ने अपना प्रेस कॉन्फ्रेंस लंदन में किया उसी दिन कोलकाता में विपक्षी दलों की रैली के दौरान मोदी हटाओ नारे के साथ ईवीएम के ख़िलाफ़ भी मोर्चा खोल दिया गया है। इतना ही नहीं ईवीएम में कथित गड़बड़ी को रोकने के लिए एक समिति का भी गठन किया गया है। हास्यास्पद बात यह है कि इस समिति में कांग्रेस के वो नेता भी शामिल हैं जिस कांग्रेस ने अभी अभी इन तीन राज्यों में जीत हासिल किया था ।

आज कांग्रेस इन तीन (राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़) बड़े राज्यों में जीत हासिल की है इसी ईवीएम के जरिये। फिर भी  कम से कम उनको तो यह सोचना चाहिए कि ईवीएम देश की प्रगति का हिस्सा है। इससे चुनाव में किसी भी तरह की रुकावटें नहीं आती। फर्जी वोट नहीं पड़ते, ज्ञान के आभाव में गाँव-देहात के लोगों का वोट बर्बाद नहीं होता। न लूट पाट किया जाता है ना ही खून खराबा की जाती है। सभी ख़ुशी से मतदान करते हैं और देश की प्रगति में अपना योगदान देते हैं। इससे मतदान के तुरंत बाद ही हमें अपना या अपने नेताओं का प्रतिफल मिल जाता है।

सारे तकनीकी जांच के बाद ही ईवीएम को संविधान में लागू किया गया था । इसी ईवीएम के जरिये 2009 के लोक सभा चुनाव में यूपीए ने अपना सरकार बनाया था। जानकारी हेतु एक बात यह भी है कि इसको न किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से जोड़ा गया है अथवा न यह किसी इंटरनेट पर उपलब्ध है। इसीलिए कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार से इसके साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता है। इतना फायदेमंद काम को अपना सहयोग देने के बजाय आये दिन कोई न कोई मुद्दा लेकर आम जनता को भ्रमित करने की कोशिश की जाती है। जिससे अशिक्षित लोग ईवीएम का बहिष्कार कर दें। अथवा देश फिर बुलेट ट्रेन के युग से सीधे गिर कर बैल गाड़ी के युग में पहुंच जाये।


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