गणेश वन्दना

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गणेश वन्दना
गणेश वन्दना

जबसे सुना है नाम गणेशा, मन में समाये तुम्हीं हमेशा ।।
माता पिता के अभिमान गणेशा, देवों का सम्मान गणेशा।
प्रथम वंदना तुम्हीं को करते, विघ्नहर्ता तुम्हीं को कहते।
जब तक न हो आराधना तेरी, पार लगे न नैया मोरी।
जबसे सुना है नाम गणेशा, मन में समाये तुम्हीं हमेशा ।।
जब जब जग पर आई विपदा, तब तूने ही उद्धार किया। 
विघ्न हरा जग में आके, तब विघ्नहर्ता का मान लिया । 
तेरे आह्वान मात्र गणेशा, त्रिदेवों के भी बन जातें काम। 
जबसे सुना है नाम गणेशा, मन में समाये तुम्हीं हमेशा ।।
देव दानव शीश झुकाते, आये विपत्ति तुमको भजते।
दुखियों के तुम दुःख हरता, तुम ही हो सबके विघ्नहर्ता।
जिसने भी पूजा तेरी काया, मजधारों में भी पार लगाया। 
जबसे सुना है नाम गणेशा, मन में समाये तुम्हीं हमेशा ।।
अभिमानी का अभिमान मिटाया, कुबेर को भी खाक बनाया। 
मूषक को वाहन बनाकर,जग में उसको पुज्य बनाया। 
तुम हो जग के पालन हारा, तुम ही हो विघ्न विनाशन हारा।
जबसे सुना है नाम गणेशा, मन में समाये तुम्हीं हमेशा ।।
पीताम्बर वस्त्र से सजाया, तिलक सिंदूर तुमको लगाया।
लड्डू मोदक का भोग लगाया, अच्छत पुष्प दीप जलाया।
गण गणपति गणेशा, भजते रहते तुमको हमेशा। 
जबसे सुना है नाम गणेशा, मन में समाये तुम्हीं हमेशा ।।


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