हमारा पड़ोसी धोखेबाज चीन

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हमारा पड़ोसी धोखेबाज चीन

चीन भी हमारा पड़ोसी देश है | और भी कई देश हमारे पड़ोस में हैं जिनकी सीमाएं हमारी सीमा से जुड़ती है | चीन हमारे देश से धनी है इसको हम इंकार नहीं कर सकते | उसके धनी बनने में चीन की विस्तारवादी नीति का महत्वपूर्ण योगदान है | पड़ोस के छोटे देश को जबरन अपने में मिलाकर उसके संसाधनों का दोहन कर आर्थिक स्थिति को मजबूत करना उसका उद्येश्य है | तिब्बत, पूर्वी तुर्किस्तान, दक्षिण मंगोलिया, हांगकांग, सिंजियांग, मंचूरिया, और मकाउ जैसे छोटे क्षेत्रों/देशों को मिलाकर आज का चीन है जिसकी सीमा 13 देशों से मिलती है | कश्मीर के कुछ हिस्से पर पाकिस्तान के अबैध कब्जे को लेकर पाकिस्तान की सीमा भी चीन से लगी मानते  हैं | कुल 14 देशों से चीन को सीमा विवाद है | इसके अतिरिक्त दक्षिण चीन सागर के सभी देशों को वह अपना क्षेत्र मानता है या उसे सीमा का विवाद है | जापान एवं दक्षिण कोरिया से भी उसके मतभेद हैं | सिन्काकू द्वीप पर जापान के कब्जे को वह सिरे से ख़ारिज करता है | जापान को अपना दुश्मन समझता है | वैश्विक बाजार व्यवस्था से भी उसकी अर्थ नीति को काफी ताक़त मिली | आर्थिक बल से आधुनिक सामरिक हथियारों का निर्माण कर लिया है जिसकी ताकत से दुनिया को डराने की वह कोशिश करता है | विश्व के कुछ बड़े देशों के बुद्धिजीवियों – पत्रकारों से पैसों के बल पर चोरी छिपे अपना स्वार्थ सिद्ध करवाता है |

भारत की सीमा चीन, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान के अलावे अंग्रेजों की विघटनकारी कूटनीति से भारत से निकले दो देश पकिस्तान और बांग्लादेश तथा सगे सम्बन्धियों वाला देश नेपाल से मिलती है | चीन को छोड़ कर इनमें से किसी से भी भारत को सीमा विवाद नहीं है | पाकिस्तान अपनी विकृत मानसिकता के कारण भारत का घोर विरोधी है फिर भी उसके और भारत के बीच कोई सीमा विवाद नहीं है | चीन इस विवाद को सुलझाना नहीं चाहता और समय समय पर इसका लाभ छल और बल का धौंस देकर लेता रहा है |

चीन के साथ विवाद के सुलझने के मार्ग में भारत की अन्दुरूनी राजनीति भी बाधक रही है | समझौता हो जाने की स्थिति में भारत की कुछ राजनीतिक पार्टियों के चूल्हे चौके ठंढे पर जायेंगे | कदाचित चीन के पे रोल पर काम करने वाले कुछ बुधिजीबी एवं पत्रकारों की वाणी एवं कलम रूक जायेगी | वे लोग आज की वर्तमान परिस्थिति में जबकि दोनों देश के सैनिक सीमा पर आमने सामने खड़े हैं, देश विरोधी वयान देकर चीन का हीं गुणगान करते है | भारत की सरकार और सैनिकों का मनोबल गिराने का प्रयत्न कर रहे हैं |

कोरोना महामारी के फैलने की सच को छिपाने में नाकाम रहे चीन से नाराज विकसित देशों की बड़ी बड़ी कम्पनियां चीन छोड़ने का मन बना चुकी हैं | चीन को शंका है की उसके यहाँ से निकलने वाली कम्पनियां अन्य देशों में निवेश कर सकती है, कदाचित भारत का स्थान प्रथम है | उन कंपनियों को डराने एवं भारत की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर दिखाने की साजिस के तहत सीमा विवाद को हवा देते हुए गलवान घाटी में 15-16 जून 2020 को चीन ने धोखे में भारत के सैन्य गस्तीदल पर अचानक से हमला कर दिया जिसमें भारत के 20 सैनिक चीन के सेनिकों को मारते मारते शहीद हो गये तथा चीन के 45 से 50 सैनिक मारे गये और कितनों को घायल कर दिया गया | चीन के एक कर्नल को बंदी बना लिया जिसे बाद में वापस भेजा गया | एक भी गोली नहीं चली | भारतीय सैनिक पूर्ण रूप से सक्षम है और भारत की सरकार की नीति भी स्पष्ट है |

चीन की ओर से भारत को धमकी मिली थी कि युद्ध में भारत को तीन मोर्चे पर लड़ना पड़ेगा जबकि सच यह है कि खुद चीन चौदह मोर्चे पर लड़ रहा है, लेकिन वह अपनी पहली हीं दाँव में इतनी बुरी तरह पिट गया कि दूसरा कौन सा दाँव लगावे, उसे समझ में नहीं आ रहा है | वार्ता की गुहार लगा रहा है | भारत के लिये चीन की बातों पर विश्वास करना अब एक पहेली बन गई है |

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत ने अपने सैनिकों को समयानुकूल निर्णय लेने का अधिकार दे दिया है | भारत की मंशा स्पष्ट है, चीन उसके  भूभाग को वापस कर दे और सीमाओं का निर्धारण करे | भारतीय सैनिकों को जज्बा है और युद्ध तकनीकी में चीन पर भारी है | सामरिक हथियारों की संख्या अधिक होने के बावजूद चीनी सैनिक उसके संचालन में दक्ष नहीं हैं और न हीं उन्हें युद्ध लड़ने का अनुभव है, दुनियाँ जानती है | पहले दिन की करारी हार से दुनिया में दंभ भरने वाले चीन का नैतिक पतन हो गया है | वह भारत से बात करना चाहता है | 22/6/2020 को कोर कमांडर स्तर पर दोनों सेनाओं के बीच बातचीत चल रही है | भारत आश्वस्त है युद्ध की स्थिति में वह चीन से ऊपर है, उसकी जीत निश्चित है, इसलिए  चीन के साथ हुए सारे संधियों को भारत ने अपनी ओर से समाप्त कर दिया है |

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