हम और हमारा स्वास्थ्य

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हम और हमारा स्वास्थ्य
हम और हमारा स्वास्थ्य

स्वतंत्र भारत का इतिहास लगभग सत्तर सालों का है | इस लम्बी अवधि में स्वास्थ्य, चिकित्सा, खाद्य एवं स्वछता पर सरकारों द्वारा कोई कारगर नीति नहीं बनाये जाने के कारण इन क्षेत्रों में काफी गिरावट आई | नकली उत्पाद एवं खाद्य सामग्री में मिलावट बेरोकटोक जारी रहा | रसायन युक्त मसालों आदि से बीमार पड़े लोग नकली दवाओं के सेवन से अपने स्वास्थ्य को और बिगाड़ते ही गये | शहरों की भागमभाग जिन्दगी ने लोगों को एक मशीन बनाकर रख दिया | रहने के लिये घर नही | घर है तो हवा और सूर्य का प्रकाश नदारद | चारों ओर गन्दगी ही गन्दगी | हवा और पानी भी गंदा हो गया | फास्ट जिन्दगी में फास्ट फूड ने अच्छा खासा स्थान बना लिया | घर का खाना के लिये समय नहीं | ब्लड शुगर  ( डायबिटीज ), मोटापा, कैंसर एवं टी. बी. जैसे संक्रामक रोग से पीड़ितों की संख्या बढ़ गई | खासकर नई पीढ़ी में मोटापा तो आम बात हो गई जो काफी चिंता का विषय है |

इन मूलभूत समस्याओं पर यदि पिछली सरकारों के ध्यान में आया भी तो उसकी सही ढंग से मोनिटरिंग नहीं की जा सकी | धीरे-धीरे सभी लोग प्रभावित हो गये | वर्तमान सरकार ने इन समस्याओं पर गम्भीरता पूर्वक ध्यान दिया | खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बरकरार रखने हेतु एफ. एस. एस. ए. आई. (FSSAI) जैसी संस्था को शक्ति प्रदान की गई और इसे प्रभावकारी बनाया | बाजार में बिकने वाली खाद्य पदार्थों के लिये इस संस्था की मुहर लगनी आवश्यक कर दिया | समय-समय पर इन सामानों की सेम्पल की जाँच होते रहने से गुणवत्ता बरकरार होती दिख रही है मगर अभी और सख्ती की जरुरत है | दवाओं की बढ़ती कीमत पर अंकुश लगाया गया एवं दवाओं के दाम भी कम किये गये | बहुत सारी हानिकारक दवाओं पर प्रतिबन्ध लगाया गया | रोगियों की बिमारी पर बढ़ते खर्च को देखते हुए चिकित्सा बीमा का प्रावधान किया गया |

अच्छे स्वास्थ्य के लिये साफ-सफाई एवं स्वच्छता बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है | घर एवं आसपास की सफाई से हवा और पानी दोनों शुद्ध रहता है | शुद्ध हवा और पानी स्वस्थ आदमी के लिये तो आवश्यक है ही रोगियों के लिये वो संजीवनी का काम करता है | गंदा खाना एवं गंदा कपड़ा पहनने से ज्यादा नुकसान गंदी हवा और गंदा पानी से होता है | गंदगी से जहरीली गैस उत्पन्न होता है जो हवा और पानी दोनों को प्रदूषित करता है | घर से लेकर पास पड़ोस की सफाई करने की अहमियत को समझाने के लिये वर्तमान सरकार ने स्वच्छता अभियान अलग से चलाया है | धीरे धीरे लोगों के मन में यह भा रहा है |

सरकार द्वारा चलाये गये इस सन्दर्भ में जो भी अभियान चल रहा है या आगे भी कुछ नया आने वाला है उससे भी महत्वपूर्ण है हम खुद इन बातों को समझें और करें | बीमार हम होते हैं, दुःख-दर्द हमें होता है जिसके लिये हम भी जिम्मेदार है | इसका पूर्ण निराकरण तभी होगा जब हम जागरुक होंगे | इलाज के मामलों में भी हमें जागरुकता आनी चाहिये | इलाज की हर पद्धति ( एलोपैथिक, आयुर्वेदिक, होमियोपैथी आदि-आदि ) में हर रोगों का निदान नहीं है | उदाहरण के लिये टी. बी. का सटीक इलाज एलोपैथिक में ही है, लेकिन एलोपैथिक में मामूली सर्दी का इलाज नहीं है | वायरल बुखार के लिये एलोपैथिक पद्धति में मात्र प्रबन्धन (management) है कोई दवा नहीं है | जहाँ ऑपरेशन ही निदान है वहाँ एलोपैथिक पद्धति ही सही है | आप भी जानते होंगे कि डायबिटीज लाइलाज बीमारी है | कुछ समय के लिये ब्लड शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है मगर ठीक नहीं होता है | इन सब बीमारियों के लिये दवा की दूसरी पद्धति का उपयोग किया जाना चाहिये | सरकार ने भी आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद नामक संस्था स्थापित कर देसी दवाओं को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया है |


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