जानकार बने और साइबर क्राइम से बचें

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जानकार बने और साइबर क्राइम से बचें
जानकार बने और साइबर क्राइम से बचें

आज के समाज में जितना विकास हुआ है। जितना लोग पढे लिखे और जागरूक हुये हैं। उतने ही तरह के अपराध भी बढ़ गया है। य‍ह तो हम भी जानते हैं कि हम जितना अपराध रोकने और उसे कम करने के लिए नियम बनाते हैं। अपराधिक प्रवृत्ति के लोग उन नियमों को तोड़ने के रास्ते ढूंढ़ लेते हैं। 

कुछ समय से हमारे सामज पर काले बादल की तरह छाया हुआ है साइबर क्राइम (इंटरनेट के द्वारा किया गया अपराध )। इंटरनेट आज के समय में एक माया जाल कि तरह है। हम इसे जितना जानने की कोशिश करते हैं य‍ह हमारी जिज्ञासा को और बढ़ाता है लेकिन यह हमारे और हमारे समाज के लिए तब तक सही है जब तक कि हम इसका उपयोग सही कामों के लिए करते हैं।

हमारे देश में या कह सकते हैं कि पूरी दुनिया में इंटरनेट जितना फायदेमंद है उससे कहीं ज्यादा नुकसानदेह हो रहा है। हर तरह के सही या गलत जानकारी हमें इंटरनेट के माध्यम से मिल जाती है। आतंकवादी, अलगाववादी जैसे दूर्विचार वाले लोग हमेशा इसका गलत उपयोग किया करते हैं। बड़े बड़े शहरों में ऐसे अपराध तो अब आम बात हो गई है। वहीं पर लोग भी काफी हद तक  जागरूक हो गयें हैं। वो सतर्कता और समझदारी से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। 

लेकिन आज की बड़ी समस्या छोटे छोटे शहर और गाँव कि है। जहाँ लोग मोबाइल या इंटरनेट चलाते तो हैं लेकिन उनसे भविष्य में होने वाले नुकसान को नहीं समझ पाते हैं। 

यही सब कुछ देखते हुए मुझे एक बात याद आयी है। कुछ समय पहले मैं अपने गांव गयी थी, वहां मैंने छोटे छोटे बच्चों (12से 14 साल ) के पास मोबाइल देखी तो मेरी जिज्ञासा य‍ह जानने की हुई कि आखिर इतने कम उम्र के बच्चे क्या देखने या जानने के लिए उत्सुक है इसमें। कई दिनों के छानबीन पर मुझे उनकी सोच और जिज्ञासा का पता चला। जिससे मुझे बेहद दुख हुआ वो बच्चे जो भी देख रहे थे उसे समझने और जानने के लिए आपस में उसका विश्लेषण कर रहे थे। जो कदाचित् सही नहीं था। वो भविष्य में होने वाली किसी भी तरह के अपराध से अनजान थे। सायद उनको सही मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं था। कौन उनका मार्गदर्शन करता आसपास कोई बड़ा या समझदार व्यक्ति था ही नहीं। यह बच्चे जिस रास्ते पर चल रहे थे। उससे तो यही निष्कर्ष निकलता था कि यह बच्चे या तो आपराधिक मानसिकता वाले निकलेंगे या किसी अपराध का शिकार बन जाएंगे। 

मोबाइल या इंटरनेट से अंजान लोगों द्वारा रोज ही कोई न कोई ठगी का मामला सामने आता ही है। कभी किसी के निजी जीवन के साथ छेड़छाड़ का मामला, तो कभी किसी के बैंक खाते से रासी निष्कासन मामला। हम आये दिन इन सभी घटनाओं से वाकिफ़ होते ही हैं। 

यहीं सब सोच कर मै थोड़ी सी जानकारियां उन सबके लिए इकट्ठा कर के लायी हूं। जो मोबाइल चलाते तो हैं लेकिन इससे होने वाले फायदे या नुकसान को समझ या समझा नहीं पाते हैं। 

मोबाइल या इंटरनेट चलाने वाले लोगों को हमेशा सतर्क और अत्याधिक सावधानी रखनी चाहिए । 

किसी भी तरह के अंजाम व्यक्तियों द्वारा कॉल आए तो उसे अपनी कोई भी निजि जानकारियां न दे। वो बैंक अथवा किसी संस्थान से ही क्युं न हो। 

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बैंक अथवा कोई भी संस्थान से फोन कॉल करके किसी भी तरह की जानकारी नहीं मांगी जाती है। 

निजी जानकारियां जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड नंबर, बैंक अकाउंट नंबर, डेबिट अथवा क्रेडिट कार्ड नंबर, अथवा पीन नंबर कभी कीसी से भी साझा न करें। 

अपना ई मेल अथवा जी मेल का पासवर्ड भी कीसी से साझा कभी नहीं करें। 

कभी भी कोई भी दस्तावेज अगर किसी को दें तो उस पर देने का कारण अथवा तारीख जरुर लिख कर दें। 

फिर भी जब कभी इंटरनेट या मोबाइल से संबंधित कोई परेशानी आ जाये तो घबराए नहीं धर्य रखें। और अपने पास के पुलिस थाना या ब्लाक तेहशीलदार के पास जाएँ और अपना शिकायत दर्ज कराएं। 

इससे आपका शिकायत धारा 509 के तहत दर्ज हो जायेगा। 

आई पी सी 509 वो धारा के तहत आता है जिससे किसी औरत या महिलाओं के आत्म सम्मान के साथ छेड़छाड़ का मामला हो। 

एक बात और यह भी है कि जब तक आप नहीं चाहेंगे तब तक आपसे जुड़ी सभी जानकारीयों को गोपनीय रखा जाएगा। और आपकी सीकायतों पर तुरन्त सज्ञान ली जायेगी। 

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने बच्चों के सभी गतिविधियों पर निरंतर नजर रखे। छोटे बड़े हर बदलाव को गहरायी से ले।

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