जाति धर्म से बड़ा देश

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जाति धर्म से बड़ा देश
जाति धर्म से बड़ा देश

आज हम और हमारे समाज पर फिर वाही जातिवाद हावी हो रहा है | न चाहते हुए भी हम किसी न किसी प्रकार से अपने अपने जाती धर्म को प्रमुख बनाने और बताने में लगे हुए हैं |

जब देश को आज़ाद करना था तब तो किसी ने नहीं कहा की मैं सिर्फ अपने राज्य या सिर्फ अपने जाती के लोगों को ही आज़ादी दिलाऊंगा | तब तो किसी ने ये सोचा भी नहीं था की हम किस धर्म किस जाती के हैं | हर कोई खुद को सिर्फ भारतीय ही समझ रहा था |

ये कैसी विडम्बना है हमारी हम कितने बदल गए | जब हम अधिक पढ़े लिखे नहीं थे, हमारे पास जानकारी की कमी थी, हम आर्थिक रूप से भी सक्षम नहीं थे, तब भी हम अपने कर्तव्यों को समझते थे | देश के प्रति किये गए सही गलत काम की पहचान थी | हर काम का परिणाम हूँ देश के हित अहित से जोड़ते थे |

आज हम हर तरह से सक्षम है, वो चाहे आर्थिक अवस्था हो, दुनियाँ भर की जानकारी हो या कैसे भी हालत  हो हम हर तरह से हर हालात का सामना कर सकते हैं | 

फिर भी हम ये क्यों नहीं समझते जिस देश को आज़ाद करने में जाती धर्म नहीं आया | क्या उस देश को सँभालने या उसके विकास को बढ़ाने में जातिवाद आना जरुरी है? क्या हम किसी भी प्रकार का फैसला सिर्फ एक हिन्दुस्तानी बन कर नहीं ले सकते | हमारे या हमारे भविष्य के लिए क्या सही है क्या गलत है ये हम नहीं जानते? क्या हम कुछ समय के लिए स्वार्थहीन नहीं हो सकते |

इससे दूसरों का तो नहीं हमारा ही फायदा है | हमारा ही भविष्य व्यवस्थीत उज्जवल और आसान होगा |

एक साधारण सी बात है हम घर बनाते हैं, तो ये सोचते हैं की ये एक संपत्ति है जिसका सुख हमारे बच्चों या उनके बच्चों को होगा | भले उसका सुख हमें हो या न हो | उसी प्रकार जब देश के प्रति कोई फैसला लेना हो तो हम उसमे अपना अपने जाती का या अपने धर्म का हित क्यों देखने लगते हैं | हम उस फैसले को भविष्य के लाभ हानी से क्यों नहीं देखते हैं? अर्थात वो फैसला भले कड़वा हो लकिन उसका फायदा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हमें और हमारे परिवार को भी जरुर होता है |

अर्थात हर कोई प्रगति को देखें किसी धर्म या जाती को नहीं, यही आप सबसे हमारी प्रार्थना है |

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