जरूरत नहीं आस्था है राम मन्दिर

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जरूरत नहीं आस्था है राम मन्दिर
जरूरत नहीं आस्था है राम मन्दिर

“सबकी जिज्ञासा राम मन्दिर, हमारी लालसा राम मन्दिर
आस्था का द्वार जीवन का कल्याण, निकले मन से राम ही राम 
दिल मेरा है राम का धाम , फिर क्युं भटके मेरे राम। 
आज मिले कल मिल जाते, भगवन मेरा आश्रय को तरसे। 
जाने कितने युग हैं बीते, आयी गयी सरकारें कितने। 
मिला न मंजिल आज भी देखो, टेंट बना बस्ते भगवान। 
आस्था लालसा के बीच फंसा, मन्दिर तेरा ओ मेरे राम । 
जाने कब छटेंगे यह बादल, मिलेगा राम को उनका धाम ।”

आज सरकार को अपने जीतने का प्रतिफल देने का समय आ गया है। मौजूदा सरकार के वायदे के अनुसार राम मन्दिर के निर्माण को लेकर विशेष रूप से चर्चा करने की आवश्यकता है। बिना किसी विघ्न के एक सही और ऐतिहासिक निर्णय लेने का समय आ गया है। राम लला आज 34 वर्षों से टेंट में रह रहे हैं ।उनके वनवास के दिनों को अंत करने का समय आ गया है। 

मानते हैं कि तकरीबन साढ़े चार सौ सालों से यह मस्जिद जो कि बाबरी मस्जिद के नाम से अयोध्या में विद्यमान है। लेकिन 1527 से पहले यह राम जन्मभूमि भव्य मंदिर के रूप में स्थापित था। साधु संतो की माने तो ईशा के लगभग 100 वर्ष पूर्व चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने अपने शासन काल में राम मंदिर का निर्माण कराया था।  उसके बाद बाबर के आने तक जो भी हिन्दू बौद्ध जैन धर्म को मानने वाले आयें उन्होंने समय समय पर मंदिर की देख रेख में अपना योगदान देते रहे। आज भी मन्दिर में हिन्दू बौद्ध जैन धर्म के अवशेष मिलते हैं। राम मन्दिर को मस्जिद बनने में अयोध्या की भव्य सुन्दरता का ही हस्तक्षेप रहा है। सोने चांदी हीरे मोती से परिपूर्ण, भव्य गगनचुम्बी इमारतें, पवित्र नदियां झील सरोवर यह सब देखकर किसी भी आम लोगों का मन ललच जाये।

 फिर तो वहां राजा महाराजाओं का मन था ऐसे मनमोहक स्थान को देखने के बाद उसे अपना बनाने की जिज्ञासा होना जायज सी बात है। और जब बात अपने धर्म को महत्व देने की हो तो ऐसे में मंदिर का टूटना मस्जिद बनना तो तय ही होता है। ऐसे स्थिति में हर कोई अयोध्या पर अपना अधिकार साबित करना अपनी ताकत का प्रदर्शन करना य़ह सब अपना सौभाग्य समझते थे। 

भारत के राजाओं ने अपने अपने जाति के हिसाब से अयोध्या में बदलाव किये हैं। तो इसमें कोई गलत बात नहीं है कि आज भारत एक हिन्दू राष्ट्र  है। मानते हैं कि यहां सभी जाति के लोग रहते हैं, लेकिन फिर भी यह हिन्दू राष्ट्र है। यहां हिन्दुओं की अपनी आस्था है। यहां हिन्दुत्व की रक्षा होती है। हिन्दू धर्म संस्कृति का संरक्षण किया जाता है। जिस कारण हिन्दुओं के अधिकार अथवा संस्कृति को दबाया नहीं जा सकता है। 

जब सबने यहां सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए अयोध्या की सुन्दरता और संस्कृति से खिलवाड़ किया है तो इसमें कोई अन्याय नहीं है कि मौजूदा सरकार जल्द से जल्द मन्दिर निर्माण के कार्य में सफलता पूर्वक अपना हस्तक्षेप करे। अथवा अयोध्या राम जन्मभूमि थी। इसलिए वहां राम मन्दिर ही बनना चाहिये। यह पूरे देशवासियों की हार्दिक इच्छा है।


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