जवानों पर छाया चुनावी बिसात

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जवानों पर छाया चुनावी बिसात
जवानों पर छाया चुनावी बिसात

जैसे जैसे लोकसभा चुनाव का समय पास आ रहा है राजनीतिक दल से लेकर चुनावी विशेषज्ञ मानव अधिकार आयोग सब के सब अचानक से कुछ ज्यादा ही सक्रिय हो गये हैं। हर विभाग पर ऐसे नजरें लगाएँ हैं मानो रोज इन सबको सरकार को घेरने का कोई न कोई मुद्दा मिल ही जायेगा। और जब मुद्दा आतंकवाद से संबंधित हो तब क्या कहना इनका।

आज हमारे विपक्ष से लेकर मानव अधिकार वाले सब के सब को आतंकवादियों की मौत और उनके साथ हुई सख्ती का बहुत दुःख हो रहा है। उन तथाकथित बुद्धि जीवियों को लगता है शरीर के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार क्यों। जीवित मनुष्य अपराध करता है। जब वह इंसान मर गया तो उसका अपराध समाप्त हो गया। तो उस निःशवर शरीर के साथ बर्बरता क्युं। लेकिन ये बुद्धिजीवि यह क्यूँ भूल जाते हैं कि, यह ऐसे दरिंदे हैं जो जीते जी हमें नुकसान पहुंचाते ही हैं लेकिन मरने के बाद भी हमारे लिये आग ही बरसाते हैं। वैसे भी इन्सानियत इंसानों के साथ होती है वैह्सी दरिन्दों के साथ नहीं। 

आए दिन हमारे जवानों के साथ जिस तरह की कट्टरता यह लोग जीते जी और मारने के बाद दिखाते हैं। उस का तो हम कभी कल्पना भी नहीं कर सकते। फिर भी हम कभी इनके शवों के साथ कोई बर्बरता नहीं दिखाते अपनी और अपने देश वासियों की रक्षा के लिए जितना जरूरी है उतना ही करते हैं। 

कुछ सालों पहले कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को बड़ी बेरहमी के साथ मौत के घाट उतार दिया गया और उनके परिवार वालों को अपना ही काम और घर छोड़कर जाने पर मजबूर कर दिया गया था। 

लगता है आज फिर वहीं मुसीबत हमारे जवानों पर आ गया है। आतंकवादी हमारे जवानों के अंदर की देशभक्ति को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं तो उनमें हिंदू और मुस्लिम ढूंढ़ रहे हैं। और जिन मुसलमान जवानों में उनको सिर्फ देश भक्त नजर आ रहे हैं। उन जवानों को ही अपना निशाना बना रहे हैं। उनके और उनके परिवार वालों के मन में दहशत का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

लेकिन यह आतंकवादी लोग यह भूल जाते हैं कि भारत ख़ुद में इतना सशक्त है कि यहां पैदा होने वालो की खून में मातृ भूमि के प्रति ईमानदारी और निर्भयता बसी हुई है। इस धरती पर जन्मे हर इंसान में अपने मातृ भूमि को बचाने के लिए मरना और मारना दोनों ही बख़ूबी आता है।

बस थोड़ी सी विनती हमारे तथाकथित देश के उन बुद्धिजीवियों से हैं कि, वे लोग बस इन देश के रक्षक जवानों के द्वारा किये गये किसी काम पर अपना राजनीतिक प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करें और उनको उनका काम उनके हिसाब से करने दें।


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