झारखण्ड के नतीजे ?

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झारखण्ड के नतीजे ?
झारखण्ड के नतीजे ?

झारखण्ड विधानसभा चुनाव भाजपा के एक नये प्रयोग के रूप में देखा जा सकता है | हाल के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अपने सहयोगी दल शिवसेना से धोखा खाना एवं एनडीए के अन्य घटक जद(यु) एवं लोजपा द्वारा चुनाव आयोग की चुनाव घोषणा के तुरत बाद अपने स्तर से अकेले अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा ने भाजपा को सकते में ला दिया | इस तरह भाजपा, जद(यु) एवं लोजपा तीनो घटक अपने अपने दम पर उम्मीदवार खड़े किये जबकि जद(यु) और लोजपा का कोई जनाधार झारखण्ड में नहीं था |

अभी मतगणना चल रही है | जद(यु) और लोजपा दोनों को एक भी सीट मिलती हुई दिखाई नहीं दे रहा है | दोनों दलों के उम्मीदवारों की जमानत भी बच जाय तो उनकी जीत हीं मानी जाएगी | आजसू को भी बड़ा नुकसान होता  हुआ दीख रहा है | भाजपा को चार से पाँच सीट का नुकसान होता दिख रहा है लेकिन सरकार बनाने की स्थिति उनकी भी नहीं है | लेकिन भाजपा को 29 से 32 सीट अपने दम पर मिलना और सहयोगियों को मुँह दिखाने लायक नहीं रहना भविष्य के एक नये गठबंधन बनने बनाने की सोच पैदा करता है | खास कर भाजपा को दिल्ली और बिहार में विधानसभा के चुनाव लड़ने हैं | बिहार के दोनों घटक दलों को लोकसभा चुनाव में अप्रत्याशित सीट मिल जाने को लेकर  

अति उत्साहित होना भाजपा के लिये चुनौती है | वे अपनी जीत में भाजपा को श्रेय नहीं देते हैं | शिवसेना द्वारा उत्पन्न की गई जैसी समस्या से भाजपा को पुन: दुसरे सहयोगी से मिलने की सम्भावना बन सकता है |

ये सच है कि झारखण्ड चुनाव में भाजपा सरकार बनाने की स्थिति में नहीं दिख रही है मगर उसका वोट प्रतिशत 2014 की अपेक्षा लगभग 1.5% हीं कम हुआ है | इसलिए उसे चिंता करने की उतनी आवश्यकता नहीं है | चिंता उन दोनों को करनी है | नीतीश कुमार सत्ता के लिये कुछ भी कर सकते हैं और लोजपा एक परिवार की पार्टी है | यह भी सच होती दिखाई दे रही है भाजपा को रोकने के लिये अन्य सभी दल करीब आ रहे हैं | ऐसी परिस्थिति में भाजपा को अकेले लंबी लड़ाई लड़ने के लिये तैयार होना पड़ेगा |

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