कहीं ख़ुशी कहीं गम – निर्भया कांड !

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कहीं ख़ुशी कहीं गम - निर्भया कांड !
कहीं ख़ुशी कहीं गम - निर्भया कांड !

बहुप्रतीक्षित फैसला 07 जनवरी 2020 को माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश से आया है | 22 जनवरी 2020 को चारों अभियुक्तों को तिहाड़ जेल में फांसी दी जायेगी | निर्भया के माता पिता को संतोष हुआ होगा कि उन्होंने अपनी बेटी के साथ हुए दुर्व्यवहार एवं बलात्कार के फल:स्वरुप उसकी मौत के आरोपी को सजा दिलाने में सफल हुये | तरह तरह की सामाजिक एवं मानसिक यातनाओं एवं प्रताडनाओं को सहन करते हुए अपनी जिद पर अड़ी रहने साथ हीं न्यायपालिका पर अटूट विश्वास रखने के लिये उस माँ का पूरा देश उनका कायल है | उनकी सहनशीलता और धैर्य की पराकाष्ठा बलात्कार और हत्या के अन्य मामलों में मार्गदर्शक   होगा | एक माँ अपनी बेटी की मौत के सदमे से बाहर निकलकर आज मिठाइयाँ बाँटने  की स्थिति में आ गई |

उन माँ ओं का हाल क्या हो रहा होगा जिनके बेटों को फांसी दी जायेगी ? वो अपने बेटों को कोस रही होगी या अपने भाग्य पर रो रही होगी | जिसने अपने बेटे से मुखाग्नि लेने की लालसा में उन्हें पाल पोश कर बड़ा किया था आज उसकी चिता तैयार करने के लिये लकड़ियाँ चुन रही होगी | इन माँ को अपने बेटे की मौत के सदमे से उबरने के लिये कोई विकल्प नहीं बचा है |  दूसरी ओर तिहाड़ जेल में बंद आरोपी पश्चाताप कर रहे होंगे | घटना को अंजाम देने के वक्त जिन नैशर्गिक आनंद का उन्होंने भोग किया होगा आज वही गर्म आँसुओं के माध्यम खाख होकर उनकी तलहथियों पर जम रहे होंगे |

माँ एक होती है ! यहाँ एक रोती माँ के चेहरे पर प्रसन्नता की झलक दिखाई दे रही है तो दूसरी पहले भी रोई थी और अब तो जीवन भर विलाप करती ही रहेगी | इस विडम्बना का एहसास हम सबों को करना चाहिये |

 न्यायालय के फैसले से इस तरह के मामलों में फंसे अन्य आरोपी भी बिना मरे हीं मर रहे होंगे | फैसले का स्वागत है |

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