कठुआ गैंग रेप केस – अदालत का फैसला

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कठुआ गैंग रेप केस – अदालत का फैसला
कठुआ गैंग रेप केस – अदालत का फैसला

लगभग १७ महीने पह्ले कठुआ में गैंग रेप के बाद हत्या एक मामला सामने आया था | महज आठ साल की एक लड़की के साथ यह घटना हुई | घटना तो काफी दुखद थी लेकिन जिस ढंग से इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया गया उससे प्रशासनिक, सामाजिक, एवं राजनीतिक व्यवस्था दागदार होती दिखाई पड़ रही थी | धर्मनिरपेक्षता की आड़ में राजनीतिक दलों ने भी पूरी घटना को अपने पक्ष में मोड़ने में लगे रहे | तथाकथित बुधिजीवियों का इसमें बहुत बड़ी भागीदारी रही | इंडिया गेट से लेकर देश के दुसरे दुसरे नगरों में सभायें और कैंडिल मार्च का आयोजन किया जा रहा था | विवाद मुस्लिम लड़की और हिन्दू लड़का के बीच होने के साथ इसका कश्मीर से सम्बन्धित होना उन बुधिजीवियों को तो जैसे बिन मांगे मोती मिल गया था | देश के मान सम्मान को ताक पर रखते हुए उन्होंने संयुक्त राष्ट्रसंघ में भी इन मुद्दों को उठवाया | पीड़ित परिवार को आर्थिक एवं क़ानूनी सलाह दिलवाने के लिये चंदे की उगाही की और लाखों रूपये जमा किये | दुःख की बात ये रही कि उस रकम से पीड़ित परिवार को कोई लाभ नहीं दिया गया | कोर्ट की कार्यवाही पर सवालिया निशान लगाने के कारण सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा और मामले की सुनवाई कश्मीर से बाहर पंजाब के पठानकोट के न्यायालय में हुई |

सोमवार १७ जून २०१९ को पठानकोट  की अदालत ने जो फैसला दिया है उससे कुछ नई चीजें प्रकाश में आये हैं | कुल सात आरोपियों में तीन को आजीवन कारावास, तीन को पांच पांच साल की सजा  के साथ अर्थ दंड भी दिया गया तथा एक आरोपी विशाल जन्गोत्रा को इज्जत के साथ बरी किया गया | ये वही जन्गोत्रा जिसको लेकर काफी विवाद था | उसका कहना था कि वो घटना के दिन कठुआ में था हीं नहीं | वो मुजफ्फरनगर में था और अपनी परीक्षा दे रहा था | कश्मीर का क्राईम ब्राँच इसे मानने को तैयार नहीं था और अपनी जाँच रिपोर्ट में उसने विशाल जन्गोत्रा को मुख्य आरोपियों की सूची में डाल दिया था | मामला अति संवेदनशील होने के कारण और जन्गोत्रा के पक्ष में आये मुज़फ्फरनगर के कुछ लोगों के आने से कुछ मीडिया कर्मीयों इस विवाद में दिलचस्पी ली और अपने स्तर से भी जाँच शुरू की | जन्गोत्रा को आरोपी सिद्ध करने के लिये क्राईम ब्रांच ने जिन साक्ष्यों को आधार बनाया उसके उलट एक मीडिया एजेंसी जी न्यूज ने अपना साक्ष्य लेकर अदालत में पेश हुआ | न्यायालय ने जी न्यूज के साक्ष्यों को सही मानते हुए विशाल जन्गोत्रा को बरी कर दिया | यह एक नई बात सामने आई की न्यायालय ने मीडिया आधारित साक्ष्य को स्वीकार किया | इस फैसले के आलोक में दो विधायकों का इस्तीफा भी अपने आप में एक नई घटना है | मगर एक राज का खुलासा होना बाकी है कि विशाल जन्गोत्रा को आरोपी बनाने के पीछे किसकी क्या मंशा थी | इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि कश्मीरियों ने न्यायालय पर विश्वास जताया |

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