कौन बाँट रहा है देश को?

0
4
कौन बाँट रहा है देश को?
कौन बाँट रहा है देश को?

सरकार और विपक्ष आमने सामने खड़े हैं | एक दूसरे पर देश के बँटवारे का आरोप लगा रहे हैं | सरकार की ओर से दलील दी जा रही है कि भारत के पड़ोसी इस्लामिक देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के प्रताड़ित अल्पसंख्यक जो विभाजन के बाद विहित प्रक्रियाओं का अनुपालन करते हुए भारत आये और वर्षों से यहाँ के विभिन्न भागों में रह रहे हैं उनको नागरिकता प्रदान करने के लिये नागरिकता संशोधन कानून का प्रावधान किया गया | विपक्ष की ओर से कहा जा रहा है की इस कानून में उन देशों के बहुसंख्यकों को भी सम्मिलित किया जाय |

दूसरी समस्या राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लेकर हैं जिसकी जरुरत आसाम  में  बांग्लादेश और म्यांमार(वर्मा) से आये घुसपैठिये के कारण वहाँ जातीय एवं सामाजिक असंतुलन पैदा होने के कारण पड़ी | समस्याओं से उत्पन्न वहाँ के उग्र आन्दोलन के समाधान के लिये तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने असमियों के साथ एक समझौता किया जिसे आसाम ऐकार्ड के नाम से जाना जाता है | लेकिन उसका अनुपालन नहीं होने के कारण मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा | सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय समय सीमा के अन्तर्गत राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर तैयार कर घुसपैठियों को देश के बाहर भेजने के आदेश के आलोक में बर्तमान सरकार ने रजिस्टर तैयार करने का काम करवाया | केंद्र सरकार की मंशा है कि इस कार्यक्रम को पूरे देश में लागू कर विभिन्न भागों में रह रहे घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें भी बाहर किया जाय | विपक्ष इससे सहमत नहीं हैं |

विपक्ष सीएए और एनआरसी को एक साथ जोड़ कर उसे भारतीय मुसलमानों के विरुद्ध कह कर उनको भड़काया और सरकार पर आरोप लगाया कि वो मुसलामानों को भारत से निकाल बाहर करने की साजिस कर रही है | इसके लागू होने से भारत एक बार फिर बँटने की स्थिति में आ जायेगा | उनके भड़काऊ बयानों और देश के अलग अलग भागों में सभा आयोजित कर मुसलमानों को समझाया जाने लगा कि देश हिन्दू राष्ट्र की ओर जा रहा है | अलग अलग जगहों से प्रदर्शन और आगजनी की घटनाओं की ख़बरें आने लगी | इन घटनाओं में कुछ अपराधिक चरित्र के लोगों की संलिप्तता की भी पुष्टि हुई | सरकारी पक्ष की ओर से इन घटनाओं की निंदा की गई साथ हीं नसीहत भी दी गई कि विपक्ष के लोगों को गलत बयानी नहीं करनी चाहिये | झूठ और अफवाह न फैलायें | आम लोगो से अपील की जाने लगी कि वे अफवाहों पर न जायें | विपक्ष पर प्रहार करते हुये आरोप लगाया गया कि वो हिन्दू मुसलमान के बीच नफरत नहीं पैदा करें देश को बाँटने की बात न करें |

प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित साह ने अलग अलग बयान जारी कर आस्वस्त करने की कोशिश की कि सीएए से किसी भी भारतीय मुसलमान को कोई खतरा नहीं है | किसी को भी कोई चिंता करने की जरुरत नहीं है | एनआरसी तो अभी आया ही नहीं है | इससे सबन्धित किसी ड्राफ्ट पर कोई चर्चा भी नहीं की गई है | फिर विपक्ष द्वारा क्यों भ्रम पैदा किया जा रहा है |

विपक्ष गैर मुस्लिम शरणार्थियों को अपने लिये खतरा मानते हैं | उनकी सोच में गैर मुस्लिम आज के राजनीतिक परिवेश में उनके वोटर नहीं हो सकते | इसलिये वो इस संशोधन को वापस लेने की बात करते है | इस संशोधन को वो तभी लागू होने देंगे जब उसमें उन देशों के मुसलमानों को भी सम्मिलित किया जायेगा | वे इस विचार को खुलेआम व्यक्त नहीं कर सकते इसलिये मुस्लिमों को भारत से भगा देने, उनकी सम्पत्ति जप्त हो जाने की बात के बहाने सीएए का विरोध कर रहे हैं | इसको आधार बना कर देश को एक और बँटवारे का खतरा बता रहे हैं और सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं |   

सरकार का पक्ष है की जिन लोगों को नागरिकता देने की बात की गई है वो भारत में बर्षों से रह रहे शरणार्थी हैं | भला इस्लामिक देश पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान में रह रहे बहुसंख्यक मुसलमानों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिये सरकार खुला आमंत्रण क्यों भेजें | वहाँ के जिन मुसलमानों ने भारतीय नागरिकता की माँग की सरकार ने उनको दिया | इन पाँच सालों में सरकार ने छ: सौ के लगभग ऐसे जरूरतमंद मुसलमानों को भारत की नागरिकता प्रदान की है | विपक्ष का विरोध भारतीय हिन्दू और मुसलमान के बीच टकराव उत्पन्न कर देश के बँटवारे का भय पैदा कर जनता को भ्रमित करना हैं और सरकार को बदनाम करना हैं |

सरकार और विपक्ष दोनों पक्षों के नीतियों पर एक साथ विचार किया जाय तो इस निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है कि विपक्ष के पास मुद्दे तो कई हैं पर नेपथ्य में | सबों को समेट कर धरातल पर जो बहस, धरना और प्रदर्शन विपक्षियों द्वारा चलाया जा रहा हैं उसे नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) एवं राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) जैसे मुद्दों की संवेदनशीलता पर लाकर केन्द्रित कर दिया गया है | भावनाओं को भड़का कर विपक्ष के पास मोदी सरकार को दवाब में लाने का सबसे आसान और सरल तरीका उनके पास सिर्फ और सिर्फ यही है | लेकिन उनके विरोध का आधार झूठ है और काल्पनिक भी | सरकार सबूतों के साथ भारतीय संस्कृति की छवि के रक्षार्थ और सम्मानार्थ एवं एक लोकतान्त्रिक सरकार की अपनी जिम्मेवारी के निर्वहण हेतु नागरिकता संशोधन कानून लाया है | सरकार की भूमिका स्पष्ट और निष्पक्ष है और विपक्ष की भूमिका संदिग्ध है |

Follow @India71_

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here