खुले नभ में सपने कई

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खुले नभ में सपने कई हैं”
कुछ अधूरे ,तो कुछ दिल में दबे हैं”
लेकिन सब संघर्ष के पथ पर अड़े हैं !
साम -दाम ,दंड भेद सब लेकर
खड़े हैं “
इस खुले नभ में सपने कई अधूरे खड़े हैं “!!
कुछ सरलता से शिखर की चोटी छू जाते हैं “
कुछ संघर्ष की रात में सब जला कर भी पीछे खड़े हैं “
सपने सभी के बड़े हैं,!!

आंखों में सपने सबके सजे हैं ,
लेकिन खास और आम के बीच में सबने द्वंद्व के खम्बे खड़े करें हैं”!
तुम नींव नहीं , उचाईयों को हासिल करने की हर जिद्द पर अड़े हैं !!

जीवन की कठोर राह में सब संघर्ष में जुटे हैं,
घर ,सँसार छोड़ दूर किसी किराए के मकान में सपनों से जंग में जुटे हैं ,
कुछ टूटे जरूर है लेकिन बुलन्द हौसलों को लिए खड़े हैं,
हार जीत से दूर सब संघर्ष पथ पर खड़े हैं।।

करियर से लेकर ,जनसंख्या सब पर आम संघर्ष कर रहे हैं ,
तुम अपने में लगे हो , तुम अपने में लगे हो, !!
नेता विकास को छोड़ ,रोजगार का गलाघोंट ,अपनी कुर्सी को बचाने की जिद्द में खड़े हैं “
राजनीति में मुद्दों से ज्यादा धर्म के नाम पर लड़ने के लिए सब लगे हैं,
आम से खास सबको बनना है लेकिन जनता को नजरअंदाज करने की सबने ठानी है।।
यह पथ है संघर्षशीलों या खुद में व्यस्त निजी अवसरवादियों का ?

जहाँ सबको अपनी ही ठानी है,
सही ,गलत किसी को पता नहीं ! सबने अपनी ही मनमानी करने की ठानी है,
साम -दाम ,दंड भेद सब आजमाने की होड़ में जुटे हैं,
खुले नभ के नीचे सपने कई अधूरे खड़े हैं”
कुछ अधूरे तो कुछ दिल में दबे अंधे पड़े हैं!! #❣️रजनी

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