लौकडाउन जरूरी है

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लौकडाउन जरूरी है

कोरोना का कारण मानवीय भूल या प्राकृतिक दंड है इस पर चर्चा हमने “कोरोना की वास्तविकता क्या है” शीर्षक ब्लॉग में की थी | कारण जो भी हो जबतक हमारे वैज्ञानिक / डाक्टर इसकी दवा और टीका तैयार नहीं कर लेते तबतक इस महामारी को फैलने से रोकने में ही हम सबों की भलाई है और इसलिये हमें एक दुसरे के संपर्क में नहीं आना चाहिए | सामाजिक दूरी (social distancing) बना कर रखना जरूरी है | अतः घर में हीं रहे | लौकडाउन का यही अर्थ है | इसी सोच के आधार पर पूरे देश में लौकडाउन की घोषणा 25 मार्च से लागू की गई | लेकिन कुछ लोगों की नासमझी के कारण परिणाम हुआ की संक्रमित मरीजों की संख्या 25 मार्च 2020 के 500 से बढ़कर 13 अप्रैल 2020 तक 10000 अर्थात 20 गुणा हो गया | यह गम्भीर चिंता का विषय बन गया | फिर भी अन्य विकसित देशों यथा इटली, ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, स्पेन आदि की तुलना में हमारे देश की स्थिति बहुत हीं बेहतर है | लगभग इतने ही अवधि में अकेले अमेरिका में यह संख्या 5 लाख 60 हजार से ऊपर हो गई और पूरे विश्व में यह संख्या बढ़कर 18 लाख से ज्यादा हो गई | संक्रमित मरीजों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए अपनी स्थिति को और बेहतर करने के लिये अर्थात संक्रमण को पूर्ण रूप से समाप्त करने के लिये आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने 14 अप्रैल 2020 को राष्ट्र को संबोधित करते हुए कोरोना के फैलाव को रोकने में 25 मार्च 2020 से 14 अप्रैल 2020 तक के लौकडाउन की सफलता पर विचार करते हुए इसकी अवधि का विस्तार 03 मई 2020 तक करने की घोषणा की साथ ही सभी भारतीयों को एक अनुशासित सिपाही की तरह पूर्ण रूप से लौकडाउन के नियमों का पालन करने का आग्रह किया | इस अवधि विस्तार के प्रथम सप्ताह 15,04.2020 से 20.04.2020 तक के लौकडाउन का सख्ती से पालन करने का  अनुरोध किया | कोरोना से पीड़ित लोगों से सावधान रहने के लिये अपने मोबाइल में “आरोग्य सेतु” ऐप डाउनलोड कर लेने सलाह दी |

कोरोना पर प्रभावकारी पहल एवं अपने ही संसाधनों से करोना को पछाड़ने की क्षमता से  दुनिया में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा हमारे हीं बीच के कुछ लोगों को अच्छी नहीं लग रही है | लौकडाउन से आवागमन की असुविधा, कारोबार में क्षति, दिहारी मजदूरों के भोजन की समस्या, देश की जीडीपी (GDP) का घटना, किसानों के फसलों की कटाई एवं उगाही की समस्याओं पर जब आम जनों को लौकडाउन के विरुद्ध बहकाने में असफल रहे तब पूर्व के कश्मीर के हालात देश के अन्य भागों में करोना के योद्धाओं डाक्टरों, नर्सों और पुलिस की टीम पर पत्थरवाजी और उनसे मारपीट की घटनाओं को अंजाम देने और धार्मिक भावनाओं को भड़काने का वीड़ा उठा लिया है | विरोध में महिलाओं और बच्चों को आगे किया जा रहा है | परन्तु जनता का सरकार और उसके मुखिया श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा कोरोना पर की गई कारवाई पर अटूट विश्वास ने उनके इस द्रोह को भी क्षीण कर दिया है |

कोरोना महामारी ने विश्व की आर्थिक व्यवस्था को बर्बाद करके रख दिया है | फ्रांस का जीडीपी -8 (minus 8) पर पहुँच गया है | भारत भी अछूता नहीं है | भारत का जीडीपी भी घट रहा है | विश्व के अन्य देशों के लोग इसको लेकर कोई चर्चा भी नहीं कर रहे हैं, सब मिलकर इस महामारी से एक जुट होकर लड़ रहे हैं | भारत में कुछ लोग इस परिस्थिति को लेकर हल्ला मचा रहे है | लौकडाउन से बेरोजगारी, कारोबारी और किसानो में बढ़ रही समस्याओं को उछाल कर देश में अराजकता की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं | सरकार अपनी पूरी ताकत और चिकित्सिय संसाधनों द्वारा एक एक की जान बचाने में लगी है | ऐसे लोगों को जान की कीमत समझ में नहीं आती | अर्थ व्यवस्था  को महीनो, सालों में सुधारी जा सकती है मगर एक जान को किसी भी कीमत में लौटाई नहीं जा सकती | ये उनको समझ में नहीं आती हैं | ऐसी बात नहीं की सरकार को अपनी आर्थिक स्थिति का बोध नहीं है | यही सोचकर सरकार ने 20 अप्रैल तक लौकडाउन को सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है और उस अवधि के फलाफल पर विचारोपरांत 21 अप्रैल से विभिन्न क्षेत्रों में सख्ती में ढील देने की संभावनाओं का आश्वासन दिया है | सरकार की पहली प्राथमिकता लोगों की जान बचाने की है जो लौकडाउन से ही सम्भव है | इसलिए हम सबों को लौकडाउन का पालन करना चाहिए | हमें सरकार के निर्देशों का सही से पालन करने में ही हमारी जान को कोई खतरा नहीं है | एक एक जान के रक्षार्थ सरकार कड़े से कड़े कदम भी उठा सकती है |

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