महिलाओं में बदलता हुआ सोच

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महिलाओं में बदलता हुआ सोच

महिलाएं पुरुष की कैद से बाहर निकलने के लिये छटपटा रही थी| बाहर निकल कर आज महिलाएं बहुत से क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी में आ गई है| सिविल सेवा हो या सेना, समाज सेवा हो या राजनीति हर क्षेत्र में वो आगे आ रही है| सरकार की ओर से भी उनको प्रोत्साहित किया जा रहा है| महिला आयोग उनकी सुरक्षा एवं बचाव के लिये हर कदम पर सजग है| बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की सफलताओं ने उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से आत्मनिर्भर होने का पाठ पढ़ा रहा है| लकिन कुछ ऐसे भी पहलू उजागर हुए है जो महिला जाति को कलंकित करता है| दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने रातों-रात करोड़पति बनने के लिये अपने नवालिग़ छोटे-भाई की मदद से अपने मकान मालिक के ३ वर्षीय बेटे का अपहरण कर लिया| उसे जिन्दा वापस करने के एवज में पाँच करोड़ रुपये की फिरौती की माँग की| संयोगवश उसका सपना चूर-चूर हो गया और बीच में ही वो पुलिस की गिरफ्त में आ गई| सबसे चौकाने वाली बात यहाँ यह है की उसने पुलिस से बचने के लिये जिस मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया वो ऐप आतंकवादी ही प्रायः अपना लोकेशन छिपाने के लिये करते हैं| ऐसे कई उदाहरण हैं| यह एक गम्भीर विषय है जिसपर समाज और सरकार दोनों को ही सोचना पड़ेगा|

सोचने वाली एक बात और है| और वो है उस छात्रा को रातों-रात करोड़पति बनने की इच्छा कैसे आई| इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं इसपर विचार करना आवश्यक है| महिलाओं में अंगीकार करने की शक्ति बहुत ज्यादा होती है| सिनेमा, टी०वी० सीरियल एवं मोबाइल ऐप का बुरा परिदृश्य उनके दिमाग पर तुरंत असर करता है| आज वैश्विक युग में पैसे का बहुत बड़ा कद है उसके नीचे सब कुछ  बौना हो गया है| सामाजिक रिश्ते कमजोर हो गये हैं| स्नेह और ममता की प्रतिमूर्ति कही जाने वाली अब आतंकी एवं राक्षसी प्रवृति के आगोस में आ गई है| महिला जाति अपमानित हो रही है| मानव जाति भी खतरे में है| अतः जरुरी है साफ़ सुथरा वातावरण तैयार किया जाय|

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