मंदिर प्रवेश विवाद – एक नजर में

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मंदिर प्रवेश विवाद - एक नजर में
मंदिर प्रवेश विवाद - एक नजर में

पति-पत्नी का सम्बन्ध अमर है | दोनों के बीच का रिश्ता किसी भी तरह विवादित नहीं हो सकता | अगर रिश्ता विवादित हो गया तो पति-पत्नी का अस्तित्व ही मिट जायेगा | बचेंगे तो सिर्फ पुरुष एवं स्त्री | पुरुष एवं स्त्री दोनों के सत्व (entity) भिन्न हैं जिसके कारण दोनों एक नहीं हो सकते  | एक में पुरुषत्व है तो दूसरा प्रलोभक | ये गुण जन्म-जात होते हैं |

विवाह एक संस्कार है और यह दोनों के लिये है | विवाह के बाद दोनों पति-पत्नी के रूप में आते हैं | एक नये जीवन की शुरुआत होती है | धीरे-धीरे नैसर्गिक प्रेम उमड़ता है | प्रतीक्षित पीढ़ी के आने की संभावनाएं बनती है जो वैवाहिक जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक एवं सामाजिक जिम्मेवारी है | इसी से सृष्टि का निर्माण होता है और यही वास्तविकता है | पति-पत्नी ही इसे अन्जाम तक ले जाते हैं | पुरुष-स्त्री इस काम को नहीं कर सकते | यौन सम्बन्ध तो पुरुष-पुरुष एवं स्त्री-स्त्री में भी होता है | इस सम्बन्ध से सिर्फ वासना की तात्कालिक भूख मिट जाती है लेकिन भावनात्मक सम्बन्ध नहीं पनप सकता | व्यक्तिगत स्वार्थ या अपने आप को छिपाने के लिये ये सम्बन्ध बनाये जाते हैं | इसकी अवधि निश्चित है मात्र 15 से 20 वर्ष | इसके बाद न तो उन्हें भूख लगती है और न हीं वो किसी काम के रह जाते हैं | पूरे जीवन में वो सिर्फ नई पीढ़ी को आने से वंचित रखते हैं और पुरानी पीढ़ी का अन्त होते देखने के सिवा उनके पास जीने के लिये या देश-दुनियाँ को देने के लिये कुछ नहीं बचता | इन दिनों पढ़े-लिखे कुछ पुरुष एवं स्त्रियाँ राजनीतिक वर्चस्व के लिये शहरी संस्कृति (अंग्रेजीयत ) की आड़ लेती है जिससे मानसिकता में विकृति आती है |

स्त्री-पुरुष में एक अन्तर और है जिसे पाटा नहीं जा सकता | पुरुष के रूप में पति हो या सिर्फ पुरुष अगर वह सीमा लाँघ कर बाहर निकलता है तो वहाँ से लौटने की क्षमता भी रखता है | मगर एक स्त्री जो पत्नी है या सिर्फ स्त्री है  वह लौट नहीं सकती | वह और आगे बढ़ना चाहती है | उसे दिशा का ज्ञान नहीं होता | पत्नी के रूप में वैसी स्त्रियाँ अपवाद होती है | अपवाद पत्नियाँ भयानक से भयानक हो सकती है | दुर्भाग्य बस इसी तरह की स्त्रीयों की बात सुनी जाने लगी है | मगर हमारा देश लोकतंत्र है | यहाँ बहुसंख्यकों की बात सुनी जाति है | हमारे देश की संस्कृति दुनियाँ के दूसरे सभी देशों से भिन्न है और यही हमारी धरोहर है |

हमें ध्यान रखना चाहिये कि देश दुनियाँ के हर स्थान विशेष में जाने के लिये अलग-अलग नियम हैं | रेलवे स्टेशन हो या एयरपोर्ट चेकिंग तो होनी ही है | सबरीमाला की अयप्पा मन्दिर विवाद भी ‘पति-पत्नी’ एवं ‘पुरुष-स्त्री’ के बीच की खाई की उपज है जो आज राजनीतिक रूप ले रहा है |


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