मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता हैं।

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2020, भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के जन्म दिवस के मौके पर मनाया जाता है। यह दिवस भारत में प्रत्येक वर्ष 11 नवंबर को मनाया जाता है साथ ही मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए गए कार्य को याद किया जाता है। यह दिवस बिना छुट्टी किए मनाया जाता हैं। इस दिवस की घोषणा मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा सन 2008 में की गई । मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 11 सितंबर 2008 को घोषणा की ‘मंत्रालय ने भारत के इस महान बेटे के जन्मदिन को भारत में शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए मनाने का फैसला किया है। तभी से यह दिवस राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का परिचय
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का पूरा नाम – अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन था परंतु वह मौलाना आज़ाद के नाम से प्रसिद्ध हुए उनका जन्म 11 नवंबर 1888 को मक्का, सऊदी अरब में हुआ। उनके पिता मौलाना खैरूद्दीन अफगान मूल के एक बंगाली मुस्लिम थे और माता एक अरब थी। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद व उनके माता- पिता सन् 1890 में भारत , कलकत्ता वापस आए।
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने भारत में स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह एक प्रसिद्ध कवि, लेखक, पत्रकार रहे साथ ही उन्हें कई भाषाओं के विद्वान भी रहे। भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक नाम मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का भी है।वह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी आंदोलन में शामिल हुए और पूरे उत्तर भारत और बाॅम्बे में गुप्त क्रांतिकारी केंद्र स्थापित करने में मदद की , उनके द्वारा सन् 1912 में अल – हिलाल एक उर्दू साप्ताहिक पत्रिका निकाली जो सन 1914 में सरकार द्वारा बंद करा दी गई । परंतु कुछ समय पश्चात एक और साप्ताहिक पत्रिका निकाली अल -बालघ नाम की ।

भारत के पहले शिक्षा मंत्री द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए योगदान –
मौलाना अबुल कलाम आजाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री रहे सन् 1947 से 1958 तक उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरु के मंत्रिमंडल में शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया।
उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई सराहनीय कार्य किए, उनके द्वारा बड़ी संस्थाएं जैसे आईआईटी और आई आई एम उन्हीं के प्रयासों का फल है। उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना की ।
उन्होंने महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया व 14 साल की आयु तक नि:शुल्क शिक्षा देने पर भी कार्य किया।
साथ ही उन्होंने प्राथमिक शिक्षा, व्यावसायिक व तकनीकी शिक्षा पर भी ध्यान दिया।

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