मेरी माँ

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मेरी माँ
मेरी माँ

जबसे आया तेरे अंदर, तेरा ही अंश कहलाया,
अपने लहू से शिंचा तूने, दिया तूने रूप रंग अनोखा मेरी माँ।
कितने कष्ट कितने दर्द सहे, तुमने सहे कितनी मुश्किलें,
एक जीवन के ख़ातिर, कितनी बार मर मर के जीया मेरी माँ

दिन रात है जागी, फिर भी न थकते हैं यह आँखे तेरी,
राह हो कैसी भी मुश्किल, आसान बनाया उसको तूने मेरी माँ। 
काँटों को भी फूल बनाया, अंगारों पर भी साथ निभाया,
हमारे सपने हमारी खुशियां, बन गयी तुम्हारी दुनिया मेरी माँ।

अपनी आंखों से सपने दिखाया, तूने ही अरमानों का दीप जलाया
चाहे अनचाहे हर राह को, ढाल बन कर आसान बनाया मेरी माँ।
तेरी मेरी राह एक थी, आंखों से दिल की समझ नेक थी,
फिर भी धरती पर लाके, औरों के नाम किया तूने मेरी माँ।

अंश हूं तेरा मैं भी जानू, फिर तुझको ही छलता हूं क्युं,
जबभी जरूरत मेरी थी, पाया तुझको खुदके पास,
तेरी जरूरत पर न जाने, कहाँ गया वो एहसास मेरी माँ।
होता हमको तब एहसास, दोहराता जीवन में जब इतिहास,

चाहे अनचाहे दौर वही आता है, बीत जाता समय जब,
इतिहास वही दोहराता है, मेरी माँ।
तब सोचूं मैं भी बात यही, मिल जाए मुझको वक़्त वही,
मिल जाए फिर मुझको तेरा वह हाथ, छोड़ कर सब कुछ,
तुझ में ही समा जाऊँ, बन कर वही तेरा अंश मेरी माँ।


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