मेरी पहली कमाई

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मेरी पहली कमाई
मेरी पहली कमाई

आज पहली बार मेरे हाथों में मेरी अपनी कमाई आयी है। मानती हूं मेरे पति की कमाई के मुकाबले ये उसका एक भाग भी नहीं है। लेकिन इतनी छोटी सी कमाई भी मानो मुझमें एक सुकून और आत्मविश्वास पैदा कर रही है। मैं एक गृहिणी हूं जिस कारण घर खर्च के लिए हर महीने पैसे  मिलते है । लेकिन उन पैसों को कहां अथवा कैसे खर्च करना है उसका एक लिस्ट भी साथ में ही रहता है। अगर अधिक कुछ ख़र्चे हों जैसे खुद को कुछ चाहिए या घर अथवा बच्चों के लिए परिवार के दूसरे सदस्यों के लिए कुछ लेना हो तो उसके लिए मांगना पड़ेगा। फ़िर उस खर्चे पर कुछ समय विचार विमर्श करने में ही लग जाएगा। फिर भी इसी बार मिलेगा  इस बात की  संभावना कम ही होती है। सबकी अपनी उलझने ही बड़ी होती है।

कई बार आपने देखा होगा कि एक गृहिणी और बाहर काम काज़ी महिला के प्रति लोगों की सोच में भी बहुत अन्तर होता है। गृहिणियों के प्रति सहानुभूति और कामकाजी महिलाओं के प्रति गर्व जैसी स्थिति का अनुभव करते हैं। लेकिन जब हम एक गृहिणी की हालात को जीते हैं और इस अवस्था में रह कर एक बाहर कमाने वाली शादी शुदा महिलाओं को देखते हैं तब जाके अपनी स्थिति का एहसास होता है कि हम य़ह कैसी जिन्दगी जी रहे हैं। आजादी हर तरह के लोगों का हक अथवा अधिकार है। सम्भवतः लोग यह नहीं समझ पाते हैं। जो कमाता है उसकी भी आवश्यकताएं हैं। जो नहीं कमाता उसकी भी उतनी ही आवश्यकताएं होती हैं। फर्क़ बस इतना ही है कमाने वाले किसी के मुहताज नहीं होते और……… 

अक्सर आपने देखा होगा मध्यम वर्ग की गृहिणियों का मांगने के अधिकार भी दो तरह के होते हैं। अगर ससुराल वालों के लिए कुछ लेना हो तो आत्मविश्वास के साथ मांगो मिलना तय है। वहीं अगर मायके वालों के लिए कुछ लेना देना हो तो कृतार्थ होकर मांगो। फिर भी मिलेगी ही इस बात की कोई तय सम्भावना नहीं होती है।

कभी कभी गृहिणी और कामकाजी महिलाओं के बीच का अन्तर या दर्द वहां अधिक दिखता है। जहाँ दो भाई पड़ोसी की तरह रहते हों। जिसमें एक घर के दोनों सदस्य कमाते हों और दूसरे के सिर्फ़ एक सदस्य कमाते हों । दोनों के रहन सहन और अपने अपने बच्चों के परवरिश को देखो एक औरत के कमाने अथवा दूसरे औरत के न कमाने की सत्यता का पता चल जाएगा। मै कदाचित य़ह नहीं कहना चाहती हूं कि हर गृहिणी एक मजबूर या लाचार गृहिणी है। लेकिन हर दूसरी गृहिणी की स्थिति सम्भवतः ऐसी ही है।

कई बार हम देखते हैं बड़े बड़े कलाकार, अभिनेता बड़ी बड़ी हस्तियां अपनी माताओं या उन गृहिणियों को लेकर अच्छी अच्छी बातें करते हैं और उनको अपने आप में एक खास व्यक्ति होने का एहसास दिलाते हैं। लेकिन वह भी य़ह जानते हैं कि औरतों की स्थिति तब तक नहीं सुधरेगी जब तक उनको भी आत्मसम्मान से जीने का अधिकार नहीं मिल जाता है। गृहिणी सिर्फ गृहिणी नहीं होती वो अपने घर की नींव होती है। उसने अगर अपना रुख बदल लिया तो घर घर नहीं रहेगा बच्चे लायक नहीं बन पाएंगे। परिवार वाली गाड़ी अपना संतुलन खो देगी पूरा परिवार अस्त व्यस्त हो जाएगा। ऐसे माहौल में पति पत्नी दोनों को एक-दूसरे की बातों को जरूरतों को बिना बोले समझने की आवश्यकता है। जिस दिन एक पति य़ह समझ लेंगे कि औरतों की भी जरूरतें होती है, इच्छाएं होती है वो क्युं किसी से मांगे या किसी को कोई हिसाब दे, एक कमाने वाली औरत की तरह उसको भी बिना मांगे मिलने का अधिकार है। अपनी जिन्दगी में अपनी इच्छाओं को पूरा करने का अधिकार है। 

अगर ऐसी होती हमारी जिंदगी तो शायद आज मैं इस पैसे को पाकर इतना सुकून महसूस नहीं कर रही होती। तब शायद मैं आज से अधिक बीते कल में खुशी का अनुभव कर रही होती………


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