नागरिकता (संशोधन) कानून:- हम देखेंगे—–! आजादी —-?

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नागरिकता (संशोधन) कानून:- हम देखेंगे-----! आजादी ----?
नागरिकता (संशोधन) कानून:- हम देखेंगे-----! आजादी ----?

पाकिस्तान या बंगलादेश से आये मुसलमानों को भारतीय नागरिकता प्रदान की जाय या नहीं इस पर विचार करने से पहले विचार इस पर करने की आवश्यकता है कि वे भारत क्यों आये और आज भी आने की चेष्टा में लगे हैं | आजादी के समय मुसलमानों ने एक दूरगामी छद्म कार्यसूची को आधार बनाकर अपनी स्वेच्छा और पसंद के क्षेत्र वर्तमान भारत के पूरब और पश्चिमी भाग को चुना और उसका नाम पाकिस्तान रखा | पाकिस्तान का अर्थ होता है पवित्र स्थान | भारत को दोनों ओर से घेरने के पीछे उनके इरादे नापाक एवं कई और छिपे मंसूबे थे जिसे आज भारतीयों को समझ में आ रहा है | देश का  बँटवारा एक सोची समझी चाल के तहत की गई | जिसकी झलक 1952 में ही मिल गई थी जब नेहरू-लियाकत अली समझौता का अनुपालन पाकिस्तान ने नहीं किया | नागरिकता प्रदान करने के सवाल पर भारतीय मुसलमानों के बदले हुए तेवर, उनका पाकिस्तानी प्रेम और भारत विरोधी नारे कई सवालों को जन्म देती है |

अपने पसंदीदा क्षेत्र को लेकर भी पाकिस्तान संतुष्ट नहीं है और कभी काम के बहाने, कभी सिनेमा जगत में नाचने गाने और चोरी छिपे घुसपैठिये के रुप में लाखों की संख्या में पाकिस्तानियों का यहाँ आना तथा कुछ दिनों के अपने प्रवास के बाद उन्हें भारतीय नागरिक होने का समर्थन भारतीय मुसलमान नागरिकों द्वारा किया जाना भारत के आन्तरिक मामलों में पाकिस्तान की दखल अंदाजी  की पुष्टि करता हैं | यह भारत के लिये चिंता का विषय है | मुस्लिम पर्सनल लौ बोर्ड के निर्णय को यहाँ के मुसलमान भारतीय कानून से ऊपर मानते हैं | एक भारतीय नागरिक होते हुये भी  भारतीय नागरिकता (संशोधन) कानून का विरोध करते हैं जबकि उनको इससे कोई खतरा हीं नहीं है | बिना खतरा के अपने लिये खतरा बता विरोध प्रदर्शन एवं हिंसा फैलाना किस मकसद को पूरा करना हैं | शिक्षा के क्षेत्र में भी उनकी सोच अलग है | सामान्य एवं तकनीकी शिक्षा का खुलकर विरोध तो नहीं करते परन्तु मदरसे में दी जाने बाली शिक्षा उनकी पहली पसंद है |

घुसपैठिये आज भारत की कानून व्यवस्था तथा यहाँ की संस्कृति और भाषा के के लिये खतरा बन गये हैं | उनके पास न तो कोई पहचान होती है और न ही कोई सही ठिकाना | आपराधिक वारदातों में भारी संख्या में उनकी भागीदारी के प्रमाण पाये गये है | अपने विरादरी के बीच आसानी से शरण मिल जाने के फल:स्वरुप उनको ढ़ूँढ़ पाना कठिन हो गया है | कानून और व्यवस्था की समस्या तो तब उत्पन्न हो जाती है जब सरकार उन्हें भारत से बाहर करने का कार्यक्रम तय करती है | देश के सारे मुसलमान सामूहिक रुप से सरकार के विरोध में सड़कों पर आ जाते हैं | लोकतान्त्रिक देश होने के कारण उन्हें कुछ राजनीतिक दलों का समर्थन भी मिल जाता है | इससे निजात पाने के लिये मोदी सरकार ने नागरिकता कानून में कुछ बदलाव किये हैं जिसके आलोक में शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलेगी और घुसपैठिये को अपने देश वापस जाना होगा | इसको लेकर पूरे देश में घमासान मचा हुआ है | एक तो पहले से जो मुसलमान यहाँ रह गये वे आज भारत की राजनीतिक परिदृश्य में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं | वो अपने को अब इतने समर्थ मान लिये हैं जिसका प्रमाण वो एक पाकिस्तानी शायर फैज़ अहमद फैज की एक शायरी `हम देखेंगे——–हम भी देखेंगे’ का नारा देकर हिन्दुओं को खुली चुनौती पेश कर डाला है | अपने धार्मिक एजेंडे की आड़ में एक सोची समझी चाल के अंतर्गत वो भारत को टुकड़े करना चाहते हैं |

जब देश का बँटवारा हिन्दू और मुसलमान के नाम पर हुआ तो फिर उनको यहाँ रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं था | फिर भी जो मुसलमान यहाँ रह गये उनको हिन्दुओं का शुक्रगुजार होना चाहिए जो उन्हें बराबरी का दर्जा देकर उनको सम्मान के साथ रहने दिया | आज वो अपने को इस कदर ताकतवर समझने लगे हैं कि इस्लाम के नाम पर वो व्यावहारिक रुप से अपने को पाकिस्तान का ही नागरिक मानते हैं | वे भारत के प्रधानमंत्री पर भरोसा नहीं कर राजनीतिक एवं धार्मिक रुप से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के दिशा निर्देशों का अनुपालन कर रहे हैं | आज उन्हें पाकिस्तान याद आ रहा है | बंटबारे के समय उनकी मति क्यों मारी गई थी |

आज प्रदर्शनों में फैज़ अहमद फैज़ के नज्म “हम देखेंगे—–“ गाये जा रहे हैं | हिन्दुओं द्वारा इसका जबर्दस्त विरोध किया जा रहा है | वे इस नज्म को हिन्दू विरोधी मानते हैं | मुस्लिम पक्ष तर्क दे रहे हैं कि ये नज्म हिन्दू विरोधी नहीं है | जिसके समर्थन में उनका कहना है की फैज बंटबारे के समय पाकिस्तान में बसने चले गये और वहाँ जब उनको समर्थन नहीं मिला तो तत्कालीन तानाशाह सरकार के खिलाफ में इस नज्म को लिखा गया | अगर उन्हीं के तर्क को मान लिया जाय तो यह स्पष्ट है कि फैज़ के इस नज़्म को गाकर यहाँ के लोगों ने भारत की लोकतांत्रिक सरकार को तानाशाह करार कर दिया | ये उनका  भारत विरोधी सोच की पुष्टि करता है | इसका दूसरा पक्ष ये है की बंटबारे के समय हीं भारत का क्षेत्र हिन्दुओं के हिस्से में आया और तब से हीं वह अघोषित हिन्दू राष्ट्र है | किसी भी धर्म या जाति के लोग जो भारत में रह गये वो हिन्दू कहलाये और यहाँ धर्म के आधार पर हिन्दू ही बहुसंख्यक हैं | फैज़ ने यह नज्म पाकिस्तान की सरकार एवं वहाँ के बहुसंख्यकों के विरोध में लिखा था | इस तरह फैज़ का यह नज्म भारत के बहुसंख्यक हिन्दूओं साथ हीं यहाँ की सरकार के विरोध में है | तीसरा पक्ष यह है कि सरकार या धर्म के आधार पर हिन्दुओं का विरोध भारतीय कवि या शायर के नज्मों से भी किया जा सकता हैं तो फिर विरोध में पाकिस्तानी नज्म को पेश करना क्या माना जायेगा | हिन्दुओं को अपना दुश्मन समझने वाले इस्लाम धर्मावलम्बी का अपने पाक इश्लामिक देश को छोड़कर हिन्दुओं के बीच बसने की मंशा के पीछे की वास्तविकता क्या हो सकती है | नागरिकता प्रदान करने से पहले इस पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाना चाहिये |

हाल के दिनों में आजादी की माँग करने वाले प्रदर्शनकारियों ने आजादी का स्वरूप भी स्पष्ट कर दिया है | उन्होंने जिन्ना वाली आजादी की माँग कर पूरे देश और हिन्दुओं को सन्न कर दिया है | जिन्ना की आजादी की माँग ने एक बार फिर भारत में ‘दो राष्ट्र के सिद्धांत को’ जीवित कर दिया है | इसमें कुछ राजनीतिक दलों की भूमिका भी संदेहास्पद लगती है | क्या भारत एक बार फिर बंटने की स्थिति में आ गया है ? मुस्लिमों का साथ देने वाले कुछ राजनीतिक दलों ने 1947 के बँटवारे के दोषियों पर पर्दा डालने के उद्येश्य से पुन: भारत को और एक बंटवारे की दिशा में ले जाकर वर्तमान नेतृत्व को कलंकित करने का मन बना लिया है | इसके लिये वो नीचे से नीचे स्तर तक गिर रहे हैं | क्या देश की जनता बँटवारे की इजाजत देगी; कभी नहीं | बंटबारे की मानसिकता रखने वाले मुठ्ठी भर लोगों को रास्ते पर लाने के लिये सरकार को कुछ कड़े कदम देश हित में उठाने की आवश्यकता है अन्यथा 5 अगस्त 2019 से पहले की कश्मीर की स्थिति में भारत को ले जाने की उनकी मंशा पूरी होती दिखाई देगी | इसके समाधान के लिये समान नागरिक संहिता लागू करना जरुरी जान पड़ता है | भाजपा सरकार का नेतृत्व कर रहे श्री नरेन्द्र मोदी सफल एवं कर्मठ प्र.मंत्री हैं | जनता को उनसे काफी अपेक्षायें हैं | भारत बँटवारा नहीं चाहता | इसको चाहने वालों को प्रेम से भारत छोड़ देना चाहिये |

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