नसीरुद्दीन शाह की असहिष्णुता

0
5
नसीरुद्दीन शाह की असहिष्णुता
नसीरुद्दीन शाह की असहिष्णुता

परसों ही हामिद अंसारी को ६ साल पाकिस्तान में सजा काटने के बाद भारत लाया गया है | कल ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में भाजपा को रथ यात्रा की अनुमति दी है | कल ही नसीरुद्दीन शाह ने अपने बयान में असहिष्णुता का जिक्र किया है जिससे उनको अपने बच्चे को लेकर काफी चिन्ता हो गई है कि कहीं वे भीड़ से घिर न जाय | मतलब साफ़ है कि उन्हें मॉब लिंचिंग का डर हो गया है |

कल नसीरुद्दीन शाह का बयान देना महज एक संयोग नहीं है | यह एक सोची-समझी चाल है जो देश की अखंडता एवं एकता के लिये खतरा है | 2019 का संसदीय चुनाव कुछ ही महीने के बाद होने वाला है जिसके लिये पृष्ठ भूमि तैयार हो रहा है | नसीरुद्दीन शाह के बयान को सस्ते में नहीं लेना चाहिए | ध्यान देने की बात है कि हामिद को भारत के विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा अपने बेटे की तरह गले लगाना नसीरुद्दीन शाह को रास नहीं आया | कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्णय से वो तिलमिला गये | डर है कि हामिद के प्रति सुषमा का मातृत्व भाव तथा कोर्ट के आदेश से मुसलमान कहीं भाजपा के प्रति नरम न हो जाये | उनका मकसद मुसलामानों को मोदी एवं भाजपा के विरोध में टाइट कम्पार्टमेन्ट में रखना है |

नसीरुद्दीन शाह को खुद की चिन्ता नहीं है | डर है अपने बच्चों के लिये | उनके बच्चे यदि गो मांस के कारोबार से जुड़े होंगे तो स्वाभाविक है कहीं भी कभी भी पुलिस के हत्थे चढ़ सकते हैं | यदि ये बात सच न हो तो उनका इस तरह का बयान उनकी छद्म कलाकारिता की सम्पुष्टि करता है | कुछ समय पहले शाहरुख खान एवं आमिर खान ने भी कुछ इसी तरह का बयान दिया था | बयान से संभावित खतरों एवं आशंकाओं के बीच कुछ लोगों ने अपना राष्ट्रीय पुरस्कार एवं सम्मान लौटा दिया था | मगर कुछ ही दिनों बाद सारी आशंकायें दूर हो गयी और ठंढ़े बस्ते में दब गई | शाहरुख और आमिर ने अपना राष्ट्रीय सम्मान नहीं लौटाया | अब नसीरुद्दीन शाह ने असहिष्णुता की याद को ताजा करने का बीड़ा उठाकर 2019 के चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास किया है |

यहाँ यह भी समझना होगा कि फिल्मों में काल्पनिक दृश्यों को प्रस्तुत करने वाले ये अभिनेता लोग बड़े-बड़े डायलॉग बोलकर सेलिब्रिटीज बन जाते हैं और पद्मश्री, पद्मभूषण आदि राष्ट्रीय सम्मान से नवाजे जाते हैं | इनके आगे पीछे सुरक्षा गार्ड लगा रहता है | जबकि वास्तविक जिन्दगी में नचनियाँ या नटुआ से आगे इनका कोई वजूद नहीं है | गाँव या सुदूर कस्बों में जाकर देखिये, देशी नृत्य-नाटक में भीड़ देखकर आप की आँखें फट जायेगी | उसकी लोकप्रियता में कहीं कोई कमी नहीं है | इतिहास गवाह है कि राजे-रजवाड़े में नर्तक-नर्तकी रहा करती थी | जिससे राजा या राजा के मेहमानों का स्वागत होता था | राष्ट्रीय पुरस्कार का हकदार असल में वे कलाकार हैं जो मंच पर अपनी कला पेश करते हैं | काल्पनिक पर्दे पर छद्म कलाकार आज देश को बताना चाहते हैं कि देश से हम नहीं, हम से देश है | लोग मेरे पीछे भागते हैं | इस मानसिकता में बदलाव आवश्यक है |

जरुरत है देश को इन छद्म कलाकारों को समझना और साथ ही गाँव घर के वास्तविक कलाकारों को प्रोत्साहित करना | ऐसा करने से नसीरुद्दीन शाह जैसे छद्म कलाकार खुद की हैसियत को समझेंगे | लोगों ने नसीरुद्दीन शाह के फिल्मों को बायकाट नहीं किया है, न ही उन्हें धमकी मिली तो फिर क्यों उन्हें असहिष्णुता का एहसास हुआ |

Follow @India71_

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here