नेता या अभिनेता

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नेता या अभिनेता
नेता या अभिनेता

आज चुनाव के इस माहौल  में हर कोई स्वयं को साबित करने में लगा है। कोई पार्टी बड़ी बड़ी रैलियाँ  कर रही है, तो कोई पार्टी खुद के कामों का सर्वेक्षण करवा रही हैं। कहीं पर किसी का दोष साबित किया जा रहा है, तो कहीं स्वयं को सही साबित करने अथवा मतदाताओं का शुभचिंतक बताने की कोशिश की जा रही है। आजकल के चुनाव की स्थिति दसवीं के परीक्षा के जैसी हो गई है। जिसने भी पूरे समय पूरे मन से मेहनत किया वो आगे जाएगा। जिसने नहीं किया वो अगली बार के लिए मेहनत करेगा।

ख़ैर यह तो किस्मत की बात है। इसी भागम-भाग के माहौल में अगर कुछ सोच के विपरीत हो रही है तो वह है हमारे कांग्रेस के नेता अथवा हास्य कवि पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू जी के द्वारा किया गया अनैतिक व्यवहार है। जहां सभी दलों के नेता अपने अपने पार्टी की भलाई और उसे जिताने की जी जान से कोशिश करने में लगे हैं। वहीं श्रीमान सिद्धू जी वो व्यक्ति हैं जो जिस डाल पर बैठे हैं उसी को काटने अथवा बर्बाद करने में लगे हुए हैं। कभी-कभी उनकी हरकतों से लगता है कि वह कांग्रेस पार्टी से कोई निजी दुश्मनी निकाल रहे हैं। नहीं तो जिस पाकिस्तान ने भारत को बर्बाद करने में कोई कमी नहीं छोड़ी उस देश के साथ इतना गहरा दोस्ताना निभाया जा रहा है। 

पहले तो वो पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर इमरान खान के वजीर बनने के खुशी में शामिल होने के लिए पूरे जोश से पाकिस्तान गये फिर वहाँ के लोगों के साथ खूब रिश्तेदारी निभाई। इतने से उनका मन नहीं भरा इसलिये पाकिस्तान सरकार के 100 दिन पूरे होने की खुशी मनाने के लिए फिर पाकिस्तान पहुंच गए। इस बार तो श्रीमान सिद्धू जी ने तो सारे हद ही पार कर दिए। वहां जाकर भारत के लोक सभा चुनाव के बारे में बातें करना यहां की स्थिति की समीक्षा करना, वहां के आर्मी अध्यक्ष से गले मिलना, खालीस्तान समर्थक गोपाल सिंह चावला के साथ फोटो खिंचवाना, उन सबके साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करना। 

यह सब करना क्या सही था? क्या सिद्धू जी पंजाब के ऊरी कांड को भूल गए, आये दिन होनेवाली आतंकवादी हमलों को भूल गए कितने ही निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या को भूल गये। आये दिन पाकिस्तानी सेना के द्वारा हमारे ही घर में घुस कर हमारे निर्दोष नागरिकों और सेना के जवानों पर आतंकी हमले को कैसे इतनी आसानी से भूला दिये सिद्धू जी ने। किस तरह से आज के नौजवानों को भड़काकर पत्थर बाज बना कर अपने ही देश के खिलाफ इसत्माल कराता है पाकिस्तान। कोई कैसे अपने निजी स्वार्थ हेतु देश की सुरक्षा और अखंडता को तार तार कर देते हैं।

उनको कहीं यह तो नहीं लगता है कि वह हास्य कवि सम्मेलन में कविता कर रहे हैं और आम जनता उनकी बातों से मनोरंजन का एहसास कर रहे हैं। एक बात यह भी हो सकती है कि कहीं वह किसी के हाथों की कटपुटली बन कर मनोरंजन तो नहीं दिखा रहे हैं। उनकी पार्टी को लगता होगा पाकिस्तान की मदद से वह हमारे देश में सरकार बना लेंगे। 

एक बात तो तय है कि सिद्धू जी की इन हरकतों से वोट मिले न मिले तिरस्कार मिलना तो तय है। इन हरकतों से एक कहावत याद आती है “हम तो डुबेंगे सनम, तुमको भी ले डुबाऐंगे”। 

अब तो बस देखना इतना ही है, कि हमारे देश की जनता को सिद्धू जी की कविता पर वोट देते हैं या उनकी देश द्रोह वाली पद्धति पर।


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