नीतीश कुमार की जिम्मेदारी

1
3
नीतीश कुमार की जिम्मेदारी
नीतीश कुमार की जिम्मेदारी

बिहार विधानसभा चुनाव २०२० के शुरूआती महीनों में होने जा रहा है | वहाँ राजग की सरकार है | सरकार में मुख्यमंत्री जद(यु) के मुखिया नीतीश कुमार हैं और साथ में भाजपा एवं लोजपा है | विधान सभा चुनाव की रणनीति तो अभी अभी समाप्त हुए लोकसभा चुनाव के प्रारम्भ से हीं बनने लगी थी | बिहार के राजग के तीनों सदस्य दलों में अपना अपना बर्चस्व बढ़ाने की होड़ लगी थी | अंतत: भाजपा ने खुद नुकसान सहकर गठबंधन को बचा लिया |

भाजपा को २०१४ लोकसभा की जीती हुई पांच सीट जद(यु) को देना पड़ा और लोजपा को छ: सीटों के साथ साथ लोजपा के मुखिया श्री राम विलास पासवान के लिये राज्यसभा की नामुमकिन सीट को मुमकिन करने की कसमें खानी पड़ी | लोकसभा चुनाव के लिये सीटों के इस बँटवारे के पीछे राजग के घटक दलों की नीतियों में आगामी विधान सभा चुनाव भी एक अघोषित मुख्य मुद्दा था |  

आगामी बिहार विधान सभा चुनाव की रणनीतियों में वर्तमान राजनीतिक परवेश को यथास्थिति बनाये रखना अहम था अर्थात जद(यु) की सरकार नीतीश जी के नेतृत्व में बने और परिस्थितिजन्य उत्पन्न कारणों के आलोक में भाजपा एवं लोजपा का अन्दर या बाहर से समर्थन रहे | स्पष्ट है कि जद(यु) बिहार में भाजपा को नम्बर दो की पार्टी से ऊपर नहीं देखना चाहती है | जिसकी पुष्टि केंद्र में मंत्री परिषद के गठन से लेकर बिहार की मंत्री  परिषद् विस्तार के बीच तीन दिनों में जद(यु) द्वारा किये गये घटनाक्रमों से होती है | इसी क्रम में नीतीश कुमार द्वारा अपने को बड़े भाई  का उद्बोध करना बहुत कुछ स्पष्ट कर देता है | ३० मई को केंद्र में मंत्री पद को सांकेतिक हिस्सेदारी कह कर गठबंधन को सांकेतिक करार कर देना और 2 जून को  बिहार मंत्री परिषद् में अपनी हीं भाषा में  भाजपा को सांकेतिक हिस्सेदारी लेने की प्रत्याशा में जद(यु) के आठ सदस्यों को शामिल करना राजग गठबंधन को चुनौती देना नहीं कहा जायेगा तो क्या कहा जायेगा |

विधान सभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे हावी रहते हैं | राज्य सरकार के कार्यों की समीक्षा की जाती है | लोकसभा के चुनाव में बिहार की जनता ने राजग को भरपूर समर्थन दिया | चालीस सीटों में उनचालीस सीट पर राजग के उम्मीदवार विजयी रहे | जिस विश्वास से इतना बड़ा जन समर्थन मिला उस विश्वास को बनाकर रखना बिहार सरकार की जवाबदेही है | इसबार के लोकसभा चुनाव में सिर्फ राष्ट्रीय मद्दे ही कामयाब रहे | स्थानीय स्तर के राजनेता इस कामयाबी में अपनी जो वाहवाही लुट लें मगर उनकी ये भूल होगी | बड़े भाई – छोटे भाई की भावना को त्याग कर गठबंधन धर्म का पालन ही राजग के लिये कल्याणकारी होगा | छ: महीने लगभग समय है अपने किये कार्यों की खुद समीक्षा करें और जन कल्याणकारी योजनाओं को बिना भेद भाव के बढ़ावा दें |


Follow @India71

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here