पुलवामा हमले से बदलती परिस्थितियाँ !

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पुलवामा हमले से बदलती परिस्थितियाँ !
पुलवामा हमले से बदलती परिस्थितियाँ !

14 फरवरी 2019 को सैनिकों से भरी एक बस को जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर आतंकियों ने कार बम से उड़ा दिया | बस में सवार सभी 40 जवानों की मौत मिनटों में हो गई | इस घटना से पूरा देश स्तब्ध हो गया | आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस घटना की जिम्मेवारी लेने की घोषणा की | दुनियां के बड़े बड़े देशों ने इस आतंकी घटना को लेकर दुःख व्यक्त किया और भारत को हर सम्भव मदद की पेशकश की | संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के सदस्य देशों अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस नें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के लिये सुरक्षा परिषद् में प्रस्ताव पेश किया | चीन ने भी पाकिस्तान को ऐसी करतूतों से वाज आने को कहा | रूस भी भारत के समर्थन में खुलकर सामने आया | लेकिन नरेन्द्र मोदी और भाजपा विरोधी लोगों ने इस दुखद घटना पर भी राजनीति करने से वाज नहीं आये | शोक संतप्त परिवारों को शांत्व्ना देना तो दूर सरकार को ही कोसना शुरू किये | कौंग्रेस के एक नेता शशि थरूर ने तो यहाँ तक कह दिया कि राजनीतिक लाभ के लिये यह घटना भाजपा की एक चाल है | विपक्षी दल मोदी एवं सरकार की सारी  निगरानी और जाँच एजेंसियों की विफलताओं को जनता के सामने ऐसे परोस रहे थे मानो उनके यहाँ कोई उत्सव हो | सच मानिये २०१९ के लोकसभा चुनाव के मद्दे नजर उन्होंने इस घटना को एक अलौकिक सौगात के रूप में लिया और इसे भुनाना आरम्भ किया | इस कार्य में उसे पाकिस्तान का भरपूर सहयोग मिला | दोनों का सुर एक हो गया | माहौल ऐसा तैयार होने लगा कि एक भी विपक्षी दल न तो पीड़ित परिवारों के साथ दिखाई दे रहा था और न हीं सरकार के समर्थन में आने की हिम्मत जुटा पा रहा था | उन्हें पाकिस्तान को नाखुस करना किसी भी सूरत में गवारा नहीं था |

पुलवामा की घटना से आम जनता काफी आक्रोशित थी, वो बदला चाहती थी | आहत मोदी जी भी थे लेकिन अपने कार्यक्रमों में उसे व्यक्त नहीं होने दे रहे थे | जनता को भरोस में लाने के लिये बदला लेने की बात वो कुछ इस तरह से करते थे “उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है, उन्हें और उनके सरफरस्तों को उनके किये की सजा जरुर मिलेगी” | विरोधी इसे एक जुमला करार दे रहे थे मगर जनता एकदम चुप थी | आतंकियों के मंसूबे बुलंद थे और विपक्षी दलों के लिये यह एक सुनहरा समय था चुनवी लाभ के लिये, कि इसी बीच अहले सुबह करीब 5 बजे तारीख 26 फरवरी को पाकिस्तान के एक सैन्य अधिकारी के ट्वीटर संदेश ने पुरे विश्व को चौंका कर रख दिया | नींद से जागे भारतीयों ने एक दुसरे के बीच पाक सैन्य अधिकारी के संदेश शेयर कर रहे थे | लोगों के बीच खबर फैल रही थी “भारत ने पाकिस्तान पर हवाई हमला किया है | खबर आग की तरह फ़ैल रही थी | पूरे भारत में “भारत जिंदाबाद”, “मोदी जिंदाबाद” का नारा गूंज उठा | लेकिन भारत सरकार की ओर से कोई अधिकारिक जानकारी नहीं मिल रही थी | सुबह 10 बजे जब आफिसें खुली तब 10:30 के आस पास विदेश मंत्रालय की ओर से इस हवाई हमले की पुष्टि की गई और कहा गया की 12 भारतीय लड़ाकू विमानों ने 26 फरवरी के 3:30 सुबह जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तान अवस्थित आतंकी ठिकानो को मटिया मेट कर दिया गया | हमला बालाकोट, मुज़फ्फराबाद और चिकोटा आतंकी ठिकानों पर किया गया | एक बड़ी संख्या में आतंकी मारे गये हैं | इसके अतिरिक्त कोई जान माल का नुकसान नहीं हुआ है |

भारत और भारतीयों के लिये सबसे अच्छी खबर यह रही कि 12 विमानों द्वारा दिये गये अंजाम की जानकारी पाकिस्तानियो को तब मिली जब उनकी नींद खुली | तब तक भारतीय विमान 21 मिनट का अपना मिशन पूरा कर सुरक्षित लौट आये थे | इधर जिंदाबाद के नारे लग रहे थे उधर विपक्षी दल असमंजस की स्थिति में थे, उन्हें मोदी और उनकी सरकार द्वारा की गयी कारवाई पर विश्वास हीं नहीं हो रहा था | दुनियां के 60 से अधिक बड़े-छोटे देश पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर भारत की कारवाई से खुश थे और पाकिस्तान को चेतावनी दे रहे थे | वहीँ विपक्षियों की बोलती बंद थी |

27 फरवरी 2019 के सुबह लगभग 10 बजे पाकिस्तान के 20 विमानों ने भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमला करने के उद्देश्य से जब भारतीय क्षेत्र में घुसने का प्रयास किया तो भारत की जबावी करवाई में पाकिस्तान का एक लड़ाकू विमान एफ 16 मार गिराया गया और शेष भागने में सफल रहे | इस दौरान भारत का वो मिग 21, जिसने एफ 16 को मार गिराया था, तकनीकी खराबी के कारण अपने ही क्षेत्र में गिर गया लेकिन उसका पायलट अभिनन्दन बर्धमान पैराशूट से उतरते समय हवा में गति के कारण पाकिस्तानी क्षेत्र में चला गया और वह पाकिस्तानी सैनिकों के कब्जे में आ गया |  इन सारी बातों की पुष्टि भारत सरकार द्वारा की गयी | भारत ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए अभिनन्दन को जेनेवा समझौते के अंतर्गत सकुशल वापस लौटाने को कहा | इस दरमियान पाकिस्तान में एक मजेदार घटना घट गई | भारत की जवाबी कारवाई में मार गिराए गये एफ 16 का पायलट तो बच गया और पैरासूट से अपने ही क्षेत्र में उतरा, मगर विधि का विधान कुछ और हीं था | पाकिस्तानियो ने उसे भारतीय समझ कर उसकी खूब धुनाई की और उसके बाद पाकिस्तानी सैनिकों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया | जहाँ दो दिन बाद उसकी मौत हो गई | पाकिस्तान ने अपने अधिकारिक बयान से इसकी पुष्टि की |

27 फरवरी से हीं भारत की ओर से अभिनन्दन को वापस लाने की कुटनीतिक चालें चली जा रही थी | इसे देख विपक्षी दलों में हरकत दिखाई देने लगी | कुछ बोलना, कुछ करना अब उनकी मज़बूरी थी | मगर सरकार का समर्थन या विरोध करने की ताकत किसी एक दल को नहीं था | अंततः उसी दिन 27 फ़रवरी को हीं 21 विपक्षी दलों ने आपसी बैठक की और सामूहिक प्रस्ताव पारित किया कि युद्ध जैसी स्थिति में हम सभी सरकार के साथ हैं लेकिन सरकार को सैनिक कारवाई पर राजनीति नहीं करनी चाहिए |

भारत की मजबूत कूटनीतिक दवाब के आगे पाकिस्तान को झुकना पड़ा और 28 फरवरी को वजीरे आजम इमरान खान को अपने संसद में घोषणा करनी पड़ी कि 01 मार्च को भारतीय पायलट को वापस भारत भेज दिया जायेगा | 01 मार्च के 9:15 बजे रात को पाकिस्तानी सैनिकों ने अभिनन्दन को वाधा बोर्डर पर भारतीय सैनिकों को सौंप दिया | इस पूरी घटनाक्रम में पाकिस्तान की सेना का अधिकृत प्रवक्ता मि० गफूर, विदेश मंत्री मि० कुरैशी और प्र० मंत्री इमरान खान के अधिकारिक बयानों में कभी भी एकरुपता नहीं दिखाई दी | झूठ पर झूठ बोलकर उनकी घबराहट किसी से नहीं छिप  सकी |

आज की स्थिति यह है कि भारत द्वारा नष्ट किये गये आतंकी ठिकानों पर विदेशी पत्रकारों के लिये “no entry” का बोर्ड लगा है | वो अभी तक एफ 16 मार गिराये जाने को कबूल नहीं कर रहा है | हमारे देश के कुछ लोग और विपक्षी पार्टियाँ भी पाकिस्तान की भाषा बोल रहें हैं | वे भी अपनी सरकार से हमलों का सबूत माँगते हैं | मारे गये आतंकियों की संख्या पूछते हैं | पुलवामा के शहीदों के परिवारों के कंधों पर बंदूक रखकर सरकार को घेर रहे हैं | हद तो तब हो गयी जब कौंग्रेस के सांसद एवं महासचिव बी. के. हरिप्रसाद ने कहा है कि पुलवामा की घटना और उससे जुडी समस्यायें मोदी और इमरान की “match fixing” है | आदत से लाचार पाकिस्तान भारतीय सीमा पर गोला बारी कर ही रहा है |

माना की अगले महीनों में लोकसभा का चुनाव होने जा रहा है | सभी राजनीतिक दलों को अपने अपने दम पर चुनाव जीतने का हक़ है लेकिन देश की रक्षा एवं सुरक्षा की जिम्मेवारी जितनी सरकार की होती है उतनी ही विपक्ष की भी है | श्रेय दोनों को जाता है | जनता सजग है | वो अब समझती है “मोदी है तो मुमकिन है” |

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