पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी को श्रद्धांजलि

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी को श्रद्धांजलि
पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी को श्रद्धांजलि

अटल जी एक लोकप्रिय नेता थे | हर कोई उनसे वाकिफ था कि उनकी वाक् पटुता अच्छी थी | मगर वे इतने लोकप्रिय हैं इसकी जानकारी राजनीतिज्ञों को तब हुई जब उनके अन्तिम दर्शन का समय आया | किसी भी राजनेता या नेता को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनके अन्तिम दर्शन के लिये देश-विदेश से इतने लोग आयेंगे | देश के दूसरे स्थानों पर जैसे पानी के सैलाव को देखकर लोग घबराये हुए हैं उसी तरह कल अटल जी की शव यात्रा के दरमियान लोगों का सैलाव उमड़ पड़ा | भीड़ से प्रशासन भी चिन्तित था मगर सब कुछ ठीक रहा | शव यात्रा में लोगों का सैलाव गाँधी जी के बाद दिल्ली ने कभी नहीं देखा था | भीड़ ने एकदम शान्ति बनाये रखा | चूँ शब्द भी कहीं से नहीं आया | स्वर्गीय अटल जी का निवास स्थान हो या भाजपा का कार्यालय, लोग संयमित होकर उनके अन्तिम दर्शन के लिये अपनी बारी की प्रतिक्षा में खड़े थे | चिलचिलाती धूप भी उनकी परीक्षा ले रही थी | गज़ब का दृश्य तो तब देखने को मिला जब शव यात्रा भाजपा कार्यालय से अन्तिम संस्कार के लिये स्मृति स्थल की ओर चली | पीछे हज़ारों-हज़ार लोग आगे सड़क के किनारे हज़ारों-हज़ार लोग अन्तिम दर्शन के लिये खड़े थे | मौन स्तब्ध खड़े लोगों की भीड़ से फूलों की बारिस हो रही थी | भीड़ एकदम संयमित रही – यही विशेषता उनकी लोकप्रियता का सब कुछ बयाँ कर देती है | लगभग आठ वर्षों की राजनीतिक एवं व्यक्तिगत अनुपस्थिति भी उनकी लोकप्रियता कम नहीं कर सकी |

सच तो यह है कि अटल जी के एक हाथ में शान्ति संदेश था तो दूसरे में अस्त्र-शस्त्र | शब्दों के जादूगर थे तो दुश्मनों के काल भी थे | विरोधियों से भी हँसकर और खुलकर बातें करते थे | इसलिये कुछ लोग उन्हें हरफन मौला भी कहा करते थे | वे कट्टर देशभक्त थे | नम्र एवं सरल स्वभाव के साथ-साथ दृढ़ संकल्प एवं अदम्य साहस के धनी थे | विरोधियों को भी उन्होंने यह समझने का मौका नहीं दिया कि वे उनकी बातों से असहमत हैं | अपनी बातों को अटल जी बड़ी सरलता से रखते थे | बातचीत में लगता था कि वे किसी मित्र से बात कर रहे हैं | सबों से मित्रवत व्यवहार था उनका | मगर कभी भी अपने विचारों से समझौता नहीं किया | पोखरण परिक्षण 1 के समय अटल जी ने इंदिरा जी का समर्थन किया था | बांग्लादेश बनने के बाद इंदिरा जी को उन्होंने दुर्गा की संज्ञा भी दी थी | यही कारण था कि सभी राजनीतिक दलों के लोग चाहे वो दक्षिण पंथी हों या वाम पंथी, सबों ने उनकी मृत्यु के उपरान्त अपनी श्रद्धांजलियाँ अर्पित की | वे गरीबों के मसीहा और दलितों के हितैषी थे | उन्होंने कहा था कि निरक्षरता एवं गरीबी एक दूसरे का पर्याय है | इस पर ध्यान देकर उन्होंने सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम पूरे देश में चलाया | जिसके कारण साक्षरता में सामाजिक क्रान्ति आ गई | उनके कार्यकाल में अन्य राजनीतिक दलों की अपेक्षा दलित वर्गों से सबसे अधिक सांसदों का संख्या बल भाजपा में था | इन्हीं कारणों से मृत्योपरान्त भी उनको आज इतना जन समर्थन मिला | ऐसा समर्थन आजतक किसी राजनेता को नहीं मिला था और वर्तमान राजनीतिक परिवेश में न ही किसी को मिलने की उम्मीद है |


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