राहुल गांधी को एक सलाह !

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राहुल गांधी को एक सलाह !
राहुल गांधी को एक सलाह !

राहुल गांधी देश के एक बड़े राष्ट्रीय दल के अध्यक्ष हैं| राष्ट्रीय अध्यक्ष का मुहर उनकी सफलताओं के लिये बहुत ही कारगर अस्त्र है| लकिन उस अस्त्र का संचालन करने में वो सक्षम नहीं दिख रहे हैं| लग्नशीलता तो है मेहनत भी करते हैं मगर प्रॉक्सी लगता है| उन्हें गुरुकुल में शिक्षा की जरुरत है| देश का विभिन्न भू-भाग ही उनका गुरुकुल है| सुदूर देहात, जहाँ अभी भी आवागमन की सुविधा नहीं है, पहाड़ी गाँव, रगिस्तान के वो गाँव जहाँ रेत से पानी निकाला जाता है एवं जंगली इलाका उनका शिक्षा स्थल है| देश की छः ऋतुएँ उनको जीवन शैली के लिये मार्गदर्शक का काम करेगी| कश्मीर से कन्याकुमारी तक, गुजरात से लेकर उत्तरपूर्व के नागालैंड एवं अरुणाचल तक की भाषाएँ उनको देश की संस्कृति से परिचित कराएगी| बाढ़ से सुखाड़ तक, वर्षा से सर्दी के मौसम तक उनको धान गेहूं से लेकर अन्य अनाज, फल एवं सब्जियों की उपज से लेकर भोज्य पदार्थों के भिन्न-भिन्न स्वाद से उनको रूबरू होना पड़ेगा| शहरी जिन्दगी एवं ग्रामीण रहन-सहन में फर्क ही नहीं, दोनों के सामाजिक परिवेश में अंतर को समझना होगा| इस पुरे शिक्षा काल के लिये कम से कम पाँच साल का समय उन्हें देना होगा|

देश की सत्ता का वागडोर राजनीतिक कारणों से आसानी से मिलना सम्भव है परन्तु सम्भालना कठिन है| इतने विविधताओं वाले देश की सत्ता अब वही सम्भाल सकता है जिसे देश के एक कोने से दुसरे कोने तक की स्वयं उपलब्ध की गयी जानकारी हो| प्रॉक्सी का जमाना नहीं रह गया है| राहुल गाँधी को प्राप्त मुहर का फल तभी मिल सकता है जब वो इन सब से विज्ञ हो जाते हैं|

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