राजस्थान विधानसभा का चुनाव 2018

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राजस्थान विधानसभा का चुनाव 2018
राजस्थान विधानसभा का चुनाव 2018

राजस्थान में विधानसभा का चुनाव 7 दिसम्बर 2018 को होने जा रहा है | सत्ता पार्टी भाजपा एवं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों अपनी-अपनी सारी तरकीबें लगा रही है | विगत दशकों में वहाँ की सरकारें एक बार कांग्रेस की बनी है तो दूसरी बार भाजपा की | वहाँ की जनता कभी भी सत्ता वाली पार्टी को दुबारा नहीं चुनती है | यही वहाँ की परम्परा रही है | इस के आधार पर 2018 की सरकार कांग्रेस की बननी चाहिये जिसके लिये कांग्रेस की जी तोड़ प्रयास है | भाजपा भी अपने बीते पाँच सालों के कार्यकाल को भुनाकर दोबारा सत्ता में आना चाहती है |

विगत दशकों की परम्परा पर यदि ध्यान दिया जाय तो 2018 के चुनाव में कांग्रेस की सरकार बननी चाहिये | यदि परम्परा इस बात का द्योतक हो कि राज्य में सरकार बदलती रहे तो सरकार जनता के हाथ में रहती है | सत्तारूढ़ सरकार को भय बना रहता है कि अगर वादें पूरे नहीं किये तो अगली सरकार उनकी पार्टी की नहीं बनेगी | वहाँ की जनता की यह सोच कई मायनें में सही है | कई मायने में यह सोच गलत भी है | अक्सर ऐसा देखा गया है कि सरकारें जब बदल जाती है तब चुनाव से पहले सत्ता वाली सरकार की नीतियाँ दूसरी पार्टी की सरकार द्वारा साफ से उलट दिया जाता है | इसतरह उलट-पुलट होने से पिछली सरकार द्वारा आरम्भ किये गये योजनाओं पर सही तरीके से काम नहीं हो पाता है | ऐसे में किसी भी पार्टी की सरकार पाँच साल में दीर्घ कल्याणकारी योजनाओं को छोड़कर अल्पकालीन लाभ देकर जनता को संतुष्ट करना चाहती है | दीर्घकालीन कार्य नहीं हो पाते हैं | उलटने-पलटने में ही पाँच साल बीत जाते हैं और पाँच साल के बाद दूसरी पार्टी सत्ता में आसानी से आ जाती है | चुनाव होने में चंद दिन बाकी है | निर्णय तो जनता दे ही देगी |

राजस्थान में कांग्रेस पार्टी वर्तमान भाजपा की सरकार की विफलताओं एवं वादा खिलाफी को मुख्य मुद्दा बनाकर जनता को उनके सामने पेश कर रही होगी तो भाजपा अपने द्वारा किये गये लाभकारी योजनाओं से उनको अवगत करा रही होगी और आने वाले पाँच सालों में और कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने की कसमें खाते होंगे साथ ही पिछली कांग्रेस सरकार की योजनाओं को अल्पकालीन, बेबुनियाद एवं जनता की आँखों में धूल झोंकने वाली घोषित कर रहे होंगे |

अगर वहाँ सरकार बदलने की परम्परा को ही ध्यान में रखा जाय तो दोनों ही मुख्य पार्टियों को ज्यादा प्रचार-प्रसार करने की जरुरत नही है | वहाँ की जनता मन बना चुकी होगी | मगर वहाँ पुनः भाजपा सत्ता में लौटती है तो सम्भव है कि राजस्थान की जनता को दीर्घकालीन एवं समुचित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा |

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