रक्षाबंधन

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रक्षाबंधन
रक्षाबंधन

यह रिश्ता है कितना प्यारा,
पवित्र है बंधन दिल से निभाया।
हर बहन को मिले इस जग में भाई, 
रहे न खाली किसी की कलाई। 
आदर प्यार से बनता है ये रिश्ता, 
हट और झगडा से भी सजता, 
कभी रूठता कभी मनाता, 
फिर भी यह बंधन प्यार से निभता। 
यह रिश्ता है कितना प्यारा, 
पवित्र है बंधन दिल से निभाया। 
शतयुग कलयुग हर युग में निभाने, 
इस रिश्ते की लाज है रखने,
धरती को भी स्वर्ग बनाने, 
हर बहन बेटी की लाज बचाने। 
दिया इस धरा को भाई का तौहफा,
बनाया था मिसाल इस धरती पर। 
बन कर भाई लाज बचाई द्रौपदी की तब ।
सीख दिया हर भाई बहन को, 
छोड़े कभी न जो वचन दे एक दूसरे को
ले संकल्प हर भाई बहन यह, 
इसकी रक्षा इसका सम्मान
बदले कभी न इनका मान,
जैसे गिरि नदी से कभी न बिछड़े, 
जैसे रक्षा करे धरा यह 
पेड़ पौधों को पकड़ के ख़ुद मैं। 
वैसे ही टूटे कभी न रिश्ता भाई बहन का ये 
मांगू दुआएं रब से ये ही हर बहन के 
सर पे बन के ठंडी छाँव हो भाई। 
यह रिश्ता है कितना प्यारा 
पवित्र है बंधन दिल से निभाया।


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